जहां बचती हैं जान, वहां नशे में तैनात था गार्ड! SMS अस्पताल की इमरजेंसी पर नशे में गार्ड ने किया हाई वोल्टेज ड्रामा
राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल की सुरक्षा व्यवस्था इन दिनों खुद सवालों के घेरे में है। जिस अस्पताल में रोज़ाना हजारों मरीज अपनी जिंदगी बचाने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहां तैनात सुरक्षा गार्ड ही इलाज की राह में रोड़ा बनते नजर आ रहे हैं।

राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल की सुरक्षा व्यवस्था इन दिनों खुद सवालों के घेरे में है। जिस अस्पताल में रोज़ाना हजारों मरीज अपनी जिंदगी बचाने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहां तैनात सुरक्षा गार्ड ही इलाज की राह में रोड़ा बनते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला इमरजेंसी गेट नंबर-2 का है, जहां ड्यूटी पर तैनात एक सुरक्षा गार्ड दिन दहाड़े शराब के नशे में धुत मिला और मरीजों को इलाज के बजाय घर लौटने या कहीं और दिखाने की सलाह देता दिखा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गुरुवार को इमरजेंसी के पास मौजूद इस सुरक्षा गार्ड की हालत ऐसी थी कि वह ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था। इसके बावजूद उसे संवेदनशील इमरजेंसी गेट पर ड्यूटी पर लगाया गया था। नशे में धुत गार्ड कुछ मरीजों और उनके परिजनों को इमरजेंसी में प्रवेश से रोक रहा था। जब परिजनों ने इसका विरोध किया तो बात बहस तक पहुंच गई।
मामला बढ़ता देख पास में तैनात अन्य सुरक्षा गार्ड मौके पर पहुंचे। विवाद की स्थिति बनने पर सभी ने मिलकर नशे में मौजूद गार्ड को पकड़ लिया और उसे इंचार्ज के ऑफिस ले जाया गया। वहां उससे वर्दी उतरवाई गई और बाद में उसे घर भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि यह गार्ड बिमला सुरक्षा एजेंसी की वर्दी में ड्यूटी पर तैनात था।
इस पूरे घटनाक्रम ने SMS हॉस्पिटल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सवाल यह है कि आखिर शराब के नशे में गार्ड ड्यूटी तक पहुंचा कैसे और उसकी जांच-पड़ताल किसने की?
SMS हॉस्पिटल में मरीजों और परिजनों का सबसे ज्यादा सामना सुरक्षा गार्डों से ही होता है। वार्ड, आईसीयू, इमरजेंसी और अन्य विभागों में आए दिन गार्डों से बहस और विवाद की घटनाएं सामने आती रहती हैं। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि कई गार्ड बेवजह रोक-टोक करते हैं, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं और कई बार तो मरीजों को अंदर जाने से ही मना कर देते हैं।
इन विवादों को लेकर अस्पताल प्रशासन के पास कई बार शिकायतें भी पहुंच चुकी हैं, लेकिन आरोप है कि उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। नतीजा यह है कि सुरक्षा गार्डों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, SMS हॉस्पिटल में करीब 680 सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति का कॉन्ट्रेक्ट है। इन्हें तीन शिफ्टों में तैनात कर पूरे हॉस्पिटल की सुरक्षा व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें से करीब 95 प्रतिशत गार्ड बिमला सिक्योरिटी एजेंसी के हैं, जबकि शेष 5 प्रतिशत रेस्को सुरक्षा एजेंसी से जुड़े हैं।
हालांकि, जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। ओपीडी का समय खत्म होते ही अस्पताल के अधिकतर हिस्सों में सुरक्षा गार्ड नदारद हो जाते हैं। कई महत्वपूर्ण पॉइंट्स पर तो गार्डों की तैनाती ही नहीं होती। ऐसे में रात के समय मरीजों और परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर स्थिति को लेकर न तो SMS प्रशासन गंभीर नजर आता है और न ही जिम्मेदार अधिकारी। सुरक्षा एजेंसियों की मॉनिटरिंग, गार्डों की मेडिकल जांच और ड्यूटी से पहले अल्कोहल टेस्ट जैसी व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।
इमरजेंसी जैसे संवेदनशील स्थान पर नशे में गार्ड की तैनाती ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों का कहना है कि अगर समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो किसी दिन बड़ा हादसा भी हो सकता है।
इमरजेंसी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. सतीश मीणा ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इमरजेंसी के मुख्य गेट के बाहर तैनात सभी सुरक्षा गार्डों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी मरीज को इमरजेंसी में आने से नहीं रोका जाए। उन्होंने बताया कि यदि चैनल गेट पर तैनात कोई सुरक्षा गार्ड मरीज को रोकता है या उसके साथ गलत व्यवहार करता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज (MOIC) की होगी। ऐसे मामलों में MOIC को तत्काल संज्ञान लेकर स्थिति की समीक्षा करनी होगी और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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