सेक्स ट्रीटमेंट की आड़ में स्कैम,फर्जी फार्मेसी से चल रहा था इंजेक्शन का धंधा, जयपुर के अस्पताल में रेड

Sachin Sharma हिन्दुस्तान टाइम्स
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राजधानी में सेक्सुअल इलाज के नाम पर चल रहे अवैध इंजेक्शन रैकेट पर बड़ी कार्रवाई हुई है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) और राजस्थान ड्रग कंट्रोल की टीम ने गोपालपुरा बाइपास स्थित भंडारी हॉस्पिटल पर छापा मारकर पूरे खेल का पर्दाफाश किया।

सेक्स ट्रीटमेंट की आड़ में स्कैम,फर्जी फार्मेसी से चल रहा था इंजेक्शन का धंधा, जयपुर के अस्पताल में रेड

राजधानी में सेक्सुअल इलाज के नाम पर चल रहे अवैध इंजेक्शन रैकेट पर बड़ी कार्रवाई हुई है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) और राजस्थान ड्रग कंट्रोल की टीम ने गोपालपुरा बाइपास स्थित भंडारी हॉस्पिटल पर छापा मारकर पूरे खेल का पर्दाफाश किया। कार्रवाई के दौरान कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए।

नाम बड़ा, दवा गायब

जांच में सामने आया कि ‘ट्राइमेक्स’ नाम से इंजेक्शन ऑनलाइन बेचा जा रहा था, जबकि इस नाम की कोई दवा रजिस्टर्ड ही नहीं है। असल में यह इंजेक्शन तीन दवाओं पौपावेरिन, एल्प्रोस्टैडिल और क्लोरप्रोमाजिन—की डोज मिलाकर तैयार किया जा रहा था। यानी ब्रांड का नाम फर्जी, अंदर का माल जुगाड़!

OH! MAN प्लेटफॉर्म पर खेल

यह पूरा नेटवर्क ‘OH! MAN’ नाम के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए चलाया जा रहा था। हैरानी की बात यह है कि इस नाम से कोई वैध फार्मेसी रजिस्ट्रेशन भी नहीं मिला। इलाज के नाम पर डिजिटल ठगी का पूरा सेटअप तैयार था।

कर्मचारी निकला मास्टरमाइंड

हॉस्पिटल प्रशासन ने सारा खेल अपने कर्मचारी मनीष कुमार सोनी पर डाल दिया है। आरोप है कि उसने ‘ओमेन फार्मेसी’ के नाम से फर्जी सिस्टम बनाया, डॉक्टरों के नकली सिग्नेचर किए और मरीजों को सीधे इंजेक्शन भेजकर पैसे अपने खाते में डलवाए।

फर्जी प्रिस्क्रिप्शन, असली कमाई

2019 से कार्यरत यह कर्मचारी खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों से मोटी रकम वसूलता था। अस्पताल के दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड और GST नंबर तक का इस्तेमाल कर उसने पूरा फर्जी नेटवर्क खड़ा कर लिया। इलाज कम, कमाई ज्यादा!

अब घेरे में और लोग भी

मामला सामने आते ही अस्पताल प्रशासन ने साइबर थाने में FIR दर्ज करवाई। उधर, ड्रग कंट्रोल विभाग ने अस्पताल के सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. चिराग भंडारी की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है और राजस्थान मेडिकल काउंसिल को कार्रवाई के लिए पत्र भेजने की तैयारी है।

हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं

अस्पताल प्रशासन ने साफ कहा कि उनके यहां केवल रजिस्टर्ड और अनुमोदित दवाओं का ही इस्तेमाल होता है। किसी भी अवैध या ऑनलाइन दवा बिक्री से उनका कोई संबंध नहीं है और ‘ट्राइमेक्स’ इंजेक्शन अस्पताल में उपयोग नहीं किया जाता।

इलाज या जाल?

फिलहाल जांच जारी है, लेकिन इस खुलासे ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है ऑनलाइन इलाज के नाम पर आखिर कितने ऐसे ‘इंजेक्शन जाल’ चल रहे हैं? मरीज सावधान रहें, क्योंकि यहां भरोसे के नाम पर खेल बड़ा है!

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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