पंजाब में AAP के गढ़ को भेदने का टास्क सतीश पूनिया को, राष्ट्रीय महामंत्री बनने के एक दिन बाद मिली जिम्मेदारी

लाइव हिन्दुस्तान, जयपुर
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सतीश पूनिया को हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले राज्य का प्रभारी बनाया गया था। अब विधानसभा चुनाव से पहले ही पार्टी ने उनका प्रभार बदलकर पंजाब कर दिया है। इससे साफ है कि भाजपा हाईकमान पंजाब में पूनिया के संगठनात्मक अनुभव का इस्तेमाल करना चाहता है।

पंजाब में AAP के गढ़ को भेदने का टास्क सतीश पूनिया को, राष्ट्रीय महामंत्री बनने के एक दिन बाद मिली जिम्मेदारी
सतीश पूनिया को हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले राज्य का प्रभारी बनाया गया था। अब विधानसभा चुनाव से पहले ही पार्टी ने उनका प्रभार बदलकर पंजाब कर दिया है। इससे साफ है कि भाजपा हाईकमान पंजाब में पूनिया के संगठनात्मक अनुभव का इस्तेमाल करना चाहता है।

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री बनने के एक दिन बाद ही डॉ. सतीश पूनिया को पार्टी ने नई और अहम जिम्मेदारी सौंपी है। भाजपा ने पूनिया को हरियाणा की जगह अब पंजाब का प्रभारी बनाया है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश, गुजरात और पंजाब के संगठनात्मक प्रभार में बदलाव किया है। पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले मिली यह जिम्मेदारी पूनिया के लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पूनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती पंजाब में भाजपा के संगठन को मजबूत करने के साथ आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को बेहतर करना होगी। भाजपा ने पंजाब में काफी पहले से चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं। ऐसे में पूनिया को चुनावी रणनीति, संगठन विस्तार और स्थानीय राजनीतिक समीकरण साधने की जिम्मेदारी संभालनी होगी।

हरियाणा के बाद अब पंजाब का जिम्मा

सतीश पूनिया को हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले राज्य का प्रभारी बनाया गया था। अब विधानसभा चुनाव से पहले ही पार्टी ने उनका प्रभार बदलकर पंजाब कर दिया है। इससे साफ है कि भाजपा हाईकमान पंजाब में पूनिया के संगठनात्मक अनुभव का इस्तेमाल करना चाहता है।

पूनिया राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं और संगठन के स्तर पर लंबे समय तक काम कर चुके हैं। हाल ही में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। इसके अगले ही दिन पंजाब का प्रभारी बनाए जाने को पार्टी में उनकी बढ़ती संगठनात्मक भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है।

किसान नाराजगी दूर करना बड़ी चुनौती

राजनीतिक जानकारों के अनुसार पंजाब में पूनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में किसान वर्ग की नाराजगी दूर करना शामिल है। किसान आंदोलन के बाद पंजाब में भाजपा के लिए राजनीतिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण रही हैं। ऐसे में पार्टी की कोशिश किसान वर्ग के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की होगी।

हरियाणा और पंजाब दोनों ही राजस्थान से सटे हुए राज्य हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे सीमावर्ती जिलों का पंजाब से सामाजिक और राजनीतिक संपर्क भी रहा है। ऐसे में पूनिया को पंजाब की जिम्मेदारी देना राजस्थान से जुड़े संगठनात्मक नेटवर्क के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजस्थान के नेताओं-कार्यकर्ताओं की भी लग सकती है ड्यूटी

पूनिया के पंजाब प्रभारी बनने के बाद राजस्थान के कई भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को पंजाब विधानसभा चुनाव में जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। खासतौर पर श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और बीकानेर के भाजपा नेताओं के पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में लंबे समय से संपर्क रहे हैं।

पार्टी चुनावी रणनीति में इन संपर्कों और स्थानीय नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकती है। हालांकि भाजपा हर विधानसभा चुनाव में दूसरे राज्यों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियां देती रही है, लेकिन पंजाब में राजस्थान की टीम का इस्तेमाल पूनिया के लिए अतिरिक्त ताकत साबित हो सकता है।

गठबंधन और स्थानीय समीकरण साधना भी चुनौती

पंजाब की राजनीति अन्य राज्यों की तुलना में काफी अलग और जटिल मानी जाती है। यहां आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के बीच राजनीतिक समीकरण लगातार बदलते रहे हैं। भाजपा के लिए सबसे अहम चुनौती अपने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर प्रभाव बढ़ाने की होगी।

इसके अलावा चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर भी पार्टी को रणनीति बनानी होगी। भाजपा अगर सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की दिशा में आगे बढ़ती है तो उसे हर सीट पर मजबूत संगठन और प्रभावी उम्मीदवार खड़े करने की चुनौती होगी।

फरवरी में हो सकते हैं विधानसभा चुनाव

पंजाब में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। राज्य में कुल 117 विधानसभा सीटें हैं और फिलहाल आम आदमी पार्टी की सरकार है। भगवंत मान मुख्यमंत्री हैं।

2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 92 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था। वहीं भाजपा का प्रदर्शन सीमित रहा था। अब 2027 के चुनाव में भाजपा राज्य में अपना आधार बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

भाजपा की ओर से पंजाब की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी की चर्चा है। ऐसे में पार्टी के सामने सिर्फ चुनाव जीतने की चुनौती नहीं, बल्कि राज्य में मजबूत राजनीतिक विकल्प के तौर पर अपनी पहचान बनाने का भी टास्क होगा।

पूनिया के लिए क्यों अहम है पंजाब की जिम्मेदारी?

राष्ट्रीय महामंत्री बनने के तुरंत बाद पंजाब का प्रभार मिलना सतीश पूनिया के राजनीतिक करियर के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पार्टी हाईकमान की उम्मीदों के मुताबिक पंजाब में संगठन को मजबूत करना और चुनाव में बेहतर नतीजा दिलाना उनकी प्राथमिकता होगी।

पूनिया के लिए पंजाब में किसान, ग्रामीण वोट बैंक, क्षेत्रीय मुद्दे, जातीय समीकरण, स्थानीय नेतृत्व और गठबंधन की राजनीति को एक साथ साधना चुनौती होगी। इसके अलावा भाजपा को AAP सरकार के खिलाफ मजबूत चुनावी नैरेटिव तैयार करना होगा।

ऐसे में पंजाब का चुनाव पूनिया के लिए सिर्फ एक राज्य का संगठनात्मक प्रभार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महामंत्री के तौर पर उनकी संगठनात्मक क्षमता की बड़ी परीक्षा भी माना जा रहा है।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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