साहब मीटिंग में हैं… कौन हैं वो जर्मनी टूर वाले IAS? जिनकी विदेश यात्रा से गरमाए प्रशासनिक गलियारे
DOP से जुड़े अधिकारी से जब लाइव हिंदुस्तान ने बात की तो उन्होंने बताया की परमिशन की फाइल आई है पूरा मामला भी हमारे संज्ञान में आया है

राजस्थान सचिवालय में इन दिनों फाइलों से ज्यादा एक सीनियर IAS अफसर की विदेश यात्रा की चर्चा हो रही है। गलियारों में कानाफूसी है, कॉरिडोर में सवाल हैं और दफ्तरों में एक ही जिज्ञासा साहब आखिर हैं कहां? जवाब मिलता है, मीटिंग में हैं…लेकिन प्रशासनिक हलकों में चर्चा कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, ख़ान पान से जुड़े एक वरिष्ठ IAS अधिकारी 12 जुलाई को जर्मनी के लिए रवाना हुए। बताया जा रहा है कि विदेश जाने से पहले उन्होंने इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवाया और जर्मनी के बाद यूरोप के अन्य देशों में बाइक से एडवेंचर टूर की भी योजना बनाई है। हालांकि इस पूरी यात्रा को लेकर अभी तक न तो संबंधित अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है और न ही राज्य सरकार ने कोई स्पष्टीकरण दिया है।
लेकिन असली चर्चा यात्रा से ज्यादा उसकी प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर है।
क्या बिना मंजूरी विदेश चले गए साहब?
सचिवालय में चर्चा इस बात की है कि क्या अधिकारी ने विदेश यात्रा के लिए सरकार से नियमानुसार अनुमति ली थी? सूत्रों का दावा है कि विदेश यात्रा से जुड़ी फाइल कार्मिक विभाग तक जरूर पहुंची थी, लेकिन उसे अब तक सक्षम स्तर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव या संबंधित प्राधिकारी से अंतिम स्वीकृति नहीं मिली थी।
इसी दावे ने पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और सरकार की ओर से भी इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।
DOP से जुड़े अधिकारी से जब लाइव हिंदुस्तान ने बात की तो उन्होंने बताया की परमिशन की फाइल आई है पूरा मामला भी हमारे संज्ञान में आया है लेकिन अप्रूवल नहीं दी थी छुट्टी की कुछ अर्जेंट होने के कारण चले गए होंगे।
यही वजह है कि सचिवालय में सवाल गूंज रहा है अगर यात्रा निजी थी तो क्या निर्धारित प्रक्रिया पूरी की गई? और यदि सरकारी थी तो उसका उद्देश्य क्या था?
दफ्तर में पूछो तो जवाब - साहब मीटिंग में हैं’
सूत्रों के अनुसार, अधिकारी पिछले कुछ दिनों से कार्यालय में नियमित रूप से मौजूद नहीं हैं। उनके सचिवालय स्थित कार्यालय में आने वाले लोगों को भी यही बताया जा रहा है कि “साहब जरूरी मीटिंग में हैं।”
दिलचस्प यह भी है कि स्टाफ के पास भी उनकी वापसी को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं बताई जा रही। ऐसे में विभाग के भीतर और बाहर चर्चाओं का दौर लगातार तेज होता जा रहा है।
पहले भी सुर्खियों में रहे थे यही अधिकारी
यह पहला मौका नहीं है जब यही वरिष्ठ IAS अधिकारी चर्चा के केंद्र में आए हों। कुछ महीने पहले भी उनके एक फैसले ने प्रशासनिक हलकों में लंबी बहस छेड़ दी थी।
दरअसल, जयपुर के दुर्गापुरा स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र के ऑडिटोरियम में विभाग की ओर से एक बड़ी कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसमें प्रदेशभर से करीब 300 से अधिक जिला रसद अधिकारी, प्रवर्तन अधिकारी, प्रवर्तन निरीक्षक और अन्य विभागीय अधिकारी शामिल हुए थे।
कार्यशाला का एजेंडा विभागीय कामकाज, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और लंबित मामलों पर चर्चा बताया गया था। लेकिन अधिकारियों के मुताबिक कार्यक्रम ने कुछ देर बाद अलग ही मोड़ ले लिया।
विभागीय बैठक में फाउंडेशन की प्रस्तुति
सूत्रों के अनुसार, विभागीय चर्चा के बाद मंच पर मोटिवेशनल स्पीकर्स पहुंचे और फाउंडेशन से जुड़ी विस्तृत प्रस्तुति दी गई। अधिकारियों को संस्था के कार्यक्रमों और उससे जुड़ने के लाभ बताए गए तथा सदस्य बनने के लिए प्रेरित भी किया गया।
चर्चा इस बात को लेकर भी हुई कि बैठक के लिए जारी आधिकारिक आदेश या एजेंडा में कहीं भी ऐसे किसी सत्र का उल्लेख नहीं था। ऐसे में कई अधिकारियों ने इसे लेकर हैरानी जताई।
बताया गया कि बाद में एक सोशल मीडिया ग्रुप भी बनाया गया, जिसमें फाउंडेशन से जुड़े संदेश साझा किए गए। उस समय इस पूरे घटनाक्रम ने विभाग के भीतर काफी बहस छेड़ दी थी और मामला लंबे समय तक प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा।
पुराना विवाद, नई चर्चा
अब उसी अधिकारी की जर्मनी यात्रा की खबर सामने आने के बाद पुराना विवाद भी फिर चर्चा में लौट आया है। सचिवालय के कई अधिकारी इसे लेकर अलग-अलग सवाल उठा रहे हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि विदेश दौरा पूरी तरह निजी है या किसी आधिकारिक उद्देश्य से किया गया है।


