साध्वी प्रेम बाईसा की मौत पर नया मोड़, पिता के कहने पर किया गया पोस्ट, इसलिए टला पोस्टमॉर्टम
कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में बड़ा खुलासा सामने आया है। साध्वी के निधन के करीब चार घंटे बाद उनके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से की गई पोस्ट को लेकर अब स्थिति स्पष्ट होने लगी है।

जोधपुर की कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में बड़ा खुलासा सामने आया है। साध्वी के निधन के करीब चार घंटे बाद उनके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से की गई पोस्ट को लेकर अब स्थिति स्पष्ट होने लगी है। साध्वी का सोशल मीडिया हैंडल संभालने वाले भोमाराम ने जांच एजेंसियों को बताया है कि यह पोस्ट साध्वी के पिता वीरमनाथ के कहने पर ही की गई थी। इसी निर्णय के चलते पोस्टमॉर्टम में करीब चार घंटे की देरी हुई।
क्या बोले सोशल मीडिया हैंडलर
भोमाराम के अनुसार, 28 जनवरी को शाम 6:52 बजे उन्हें वीरमनाथ के मोबाइल फोन से कॉल आया। कॉल पर सुरेश नामक व्यक्ति ने बातचीत करते हुए बताया कि प्रेम बाईसा की तबीयत गंभीर है और तुरंत प्रेक्षा हॉस्पिटल पहुंचने को कहा। भोमाराम ने बताया कि वह शाम 7:31 बजे अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक साध्वी प्रेम बाईसा का निधन हो चुका था।
अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने तत्काल पोस्टमॉर्टम कराने की सलाह दी थी। हालांकि, भोमाराम का कहना है कि इस पर साध्वी के पिता वीरमनाथ ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि पोस्टमॉर्टम जरूर कराया जाएगा, लेकिन उससे पहले साध्वी के पार्थिव शरीर को ससम्मान आश्रम ले जाया जाएगा, ताकि श्रद्धांजलि दी जा सके और संत-महात्माओं को अंतिम दर्शन का अवसर मिल सके।
पार्थिव शरीर को आश्रम लाया गया
भोमाराम के मुताबिक, रात करीब 8:45 बजे साध्वी के पार्थिव शरीर को प्रेक्षा हॉस्पिटल से आरती नगर स्थित आश्रम ले जाया गया। रास्ते में कई संत-महात्माओं और परिचितों को फोन कर साध्वी के निधन की सूचना दी गई। कुछ देर आरती नगर मोड़ पर रुकने के बाद काफिला आश्रम पहुंचा।
आश्रम पहुंचने के बाद वीरमनाथ के निर्देश पर भोमाराम ने रात 9:38 बजे इंस्टाग्राम पर पोस्ट डाली। यह पोस्ट साध्वी के निधन की सूचना देने और न्याय की मांग को लेकर की गई थी। भोमाराम ने स्पष्ट किया कि पोस्ट का पूरा मैसेज वीरमनाथ ने ही तय किया था और उन्होंने उसी शब्दों में पोस्ट किया। इसी वजह से साध्वी की मौत की सार्वजनिक जानकारी देने और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू होने में लगभग चार घंटे का अंतर आ गया।
पोस्ट के वायरल होते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग आश्रम पहुंचने लगे। इसी दौरान 4-5 युवकों ने विरोध शुरू कर दिया और न्याय की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे। भोमाराम के अनुसार, स्थिति इतनी बिगड़ गई कि हाथापाई तक की नौबत आ गई और उनकी गाड़ी के टायरों की हवा निकाल दी गई। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा।
पुलिस के पहुंचने के बाद पार्थिव शरीर को पोस्टमॉर्टम के लिए महात्मा गांधी अस्पताल ले जाया गया। भोमाराम ने यह भी दावा किया कि जिन लोगों ने उस समय हंगामा किया, वे साध्वी की समाधि के समय कहीं नजर नहीं आए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अब तक 37 लोगों से पूछताछ की है। वायरल वीडियो और सोशल मीडिया गतिविधियों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। भोमाराम ने बताया कि SIT ने उनसे एक बार पूछताछ की है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आश्रम लगभग एक साल पुराना है और वहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे, हालांकि कैमरे लगाने की तैयारी के लिए अंडरलाइन डाली गई थी।
वीरमनाथ की ओर से भी इस मामले में भावनात्मक बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि प्रेम बाईसा ने 25 वर्षों तक ब्रह्मचर्य का जीवन जिया और उन पर लगाए गए आरोपों से उन्हें कलंकित किया गया। वीरमनाथ के अनुसार, जब साध्वी ने इस संबंध में शंकराचार्य को पत्र लिखा, उसके बाद ही परिस्थितियां बदलीं और अब वह न्याय की मांग कर रही हैं।
गौरतलब है कि साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के वास्तविक कारणों को लेकर अब तक कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस और SIT सभी पहलुओं चिकित्सकीय रिपोर्ट, सोशल मीडिया गतिविधियों, प्रत्यक्षदर्शियों और आश्रम की परिस्थितियों की गहन जांच कर रही है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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