RLP प्रमुख सांसद हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा घटी; आखिर क्या हैं तीन बड़े कारण?
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में राज्य सरकार ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा में कटौती करते हुए जयपुर कमिश्नरेट की ओर से तैनात तीन सुरक्षाकर्मियों को वापस बुला लिया है।

राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में राज्य सरकार ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा में कटौती करते हुए जयपुर कमिश्नरेट की ओर से तैनात तीन सुरक्षाकर्मियों को वापस बुला लिया है। इससे पहले निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी की सुरक्षा में भी कमी की गई थी। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के समय और परिस्थितियों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
दरअसल, हनुमान बेनीवाल पिछले कुछ समय से विभिन्न मुद्दों को लेकर लगातार राज्य सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। हाल ही में जयपुर के निकट भैराणा गांव में आयोजित महापंचायत और आंदोलन के दौरान उन्होंने सरकार पर जमकर निशाना साधा था। उनके जयपुर कूच के आह्वान के बाद सरकार को किसानों की मांगों पर बातचीत के लिए आगे आना पड़ा। आंदोलन समाप्त होने के कुछ ही दिनों बाद उनकी सुरक्षा में कटौती किए जाने से राजनीतिक सवाल खड़े हो रहे हैं।
भैराणा आंदोलन के बाद बढ़ी सियासी तल्खी
भैराणा महापंचायत के दौरान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और मंत्रिमंडल के सदस्यों पर तीखे बयान दिए थे। उन्होंने मंत्रियों और मुख्यमंत्री को लेकर विवादित टिप्पणियां की थीं, जिसके बाद भाजपा नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम सहित कई नेताओं ने बेनीवाल के बयानों की कड़ी आलोचना की थी। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि सरकार के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ लगातार आक्रामक बयानबाजी उनकी सुरक्षा में कटौती के पीछे एक कारण हो सकती है।
पहले बढ़ाई गई थी सुरक्षा
हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा व्यवस्था पहले भी चर्चा का विषय रही है। वर्ष 2025 में SI भर्ती परीक्षा-2021 को रद्द करने की मांग को लेकर उन्होंने जयपुर में लंबा आंदोलन किया था। करीब तीन महीने तक शहीद स्मारक पर धरना देने के बाद मानसरोवर में विशाल रैली आयोजित की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए थे। उस दौरान मिले इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई थी और सुरक्षाकर्मियों की संख्या पांच से बढ़ाकर आठ कर दी गई थी।
सुरक्षा कटौती के पीछे बताए जा रहे तीन कारण
राजनीतिक जानकारों के अनुसार सुरक्षा में कटौती के पीछे तीन प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। पहला, मुख्यमंत्री और भाजपा नेताओं के खिलाफ लगातार की जा रही आक्रामक बयानबाजी। दूसरा, विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों के दौरान प्रशासन पर बढ़ता दबाव। हाल ही में किसानों की मांगों को लेकर बेनीवाल ने बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ प्रदर्शन किया था, जिससे पुलिस और प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। तीसरा कारण युवाओं और किसानों के बीच उनकी मजबूत पकड़ को माना जा रहा है। राजनीतिक रूप से सीमित प्रतिनिधित्व के बावजूद बेनीवाल के आह्वान पर बड़ी संख्या में समर्थक जुट जाते हैं, जिससे उनका जनाधार लगातार चर्चा में रहता है।
8 में से 3 सुरक्षाकर्मी हटाए गए
जानकारी के अनुसार हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा में कुल आठ सुरक्षाकर्मी तैनात थे। इनमें छह सुरक्षाकर्मी एके-47 से लैस थे, जबकि दो सुरक्षाकर्मी पिस्टल के साथ सुरक्षा ड्यूटी पर रहते थे। अब जयपुर में तैनात तीन एके-47धारी सुरक्षाकर्मियों को वापस बुला लिया गया है। हालांकि नागौर और अन्य स्थानों पर उनकी सुरक्षा व्यवस्था यथावत रखी गई है।
बेनीवाल का पलटवार
सुरक्षा में कटौती के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए हनुमान बेनीवाल ने कहा कि उन्हें सरकार की सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके साथ प्रदेश और देश के लाखों युवा खड़े हैं, इसलिए सुरक्षा बढ़ाने या घटाने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। बेनीवाल ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी सुरक्षा बढ़ाने की मांग नहीं की थी। पूर्व में जब उन पर हमला हुआ था, तब सरकार ने स्वयं सुरक्षा उपलब्ध कराई थी और बाद में इंटेलिजेंस रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाई गई थी।
सुरक्षा व्यवस्था में कटौती के इस फैसले ने राजस्थान की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल इसे राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देख रहे हैं, जबकि प्रशासनिक स्तर पर इसे नियमित सुरक्षा समीक्षा का हिस्सा बताया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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