दिल्ली में छिपे रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल? 900 करोड़ JJM घोटाले में दूसरे दिन भी ताबड़तोड़ छापे
राजस्थान के बहुचर्चित 979 करोड़ रुपए के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में सस्पेंस गहराता जा रहा है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की विशेष जांच टीम (SIT) ने बुधवार को लगातार दूसरे दिन दिल्ली, राजस्थान समेत कई राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी की।

राजस्थान के बहुचर्चित 979 करोड़ रुपए के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में सस्पेंस गहराता जा रहा है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की विशेष जांच टीम (SIT) ने बुधवार को लगातार दूसरे दिन दिल्ली, राजस्थान समेत कई राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में हैं रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल, जिनके खिलाफ एसीबी ने ‘लुकआउट नोटिस’ जारी कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी को आशंका है कि अग्रवाल देश छोड़कर विदेश भागने की फिराक में हैं। इसी आशंका के चलते उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है, ताकि वे किसी भी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से बाहर न जा सकें। फिलहाल अग्रवाल समेत चार आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। सभी के मोबाइल फोन बंद हैं और उनके ठिकानों का कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिल पाया है।
दिल्ली में बदल-बदल कर रह रहे थे ठिकाने
जांच एजेंसियों को मिली जानकारी के अनुसार, सुबोध अग्रवाल कई दिन पहले ही अपना स्थायी ठिकाना छोड़ चुके थे। वे दिल्ली में स्थान बदलकर रह रहे थे और कथित तौर पर केवल खाना खाने के लिए घर आते थे। यह इनपुट मिलते ही एसीबी की टीमें दिल्ली में सक्रिय हुईं और कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई, लेकिन दूसरे दिन भी उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
इस बीच, मंगलवार को गिरफ्तार किए गए 10 आरोपियों को अदालत ने तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। एसीबी अब इन आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर कमीशन, टेंडर में गड़बड़ी और फाइल मूवमेंट से जुड़े सवालों पर पूछताछ कर रही है।
तीन चीफ इंजीनियर समेत 10 गिरफ्तार
मंगलवार सुबह एसआईटी ने विभिन्न राज्यों में 15 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में मुख्य अभियंता (प्रशासन) दिनेश गोयल, मुख्य अभियंता (ग्रामीण) के.डी. गुप्ता, तत्कालीन सचिव RWSSMC (एसीई) जयपुर द्वितीय शुभांशु दीक्षित, वित्तीय सलाहकार (अक्षय ऊर्जा) सुशील शर्मा, सीई (चूरू) निरिल, निलंबित एसई विशाल सक्सेना, रिटायर्ड सीई अरुण श्रीवास्तव, डी.के. गौड़, रिटायर्ड एसई महेंद्र सोनी और झारखंड से मुकेश पाठक को गिरफ्तार किया गया था।
सबसे दिलचस्प गिरफ्तारी विशाल सक्सेना की रही। सूत्रों के अनुसार, वह जयपुर से बाड़मेर भाग गया था और वहां से किसी परिचित के साथ फरार होने की योजना बना रहा था। लेकिन एसीबी की टीम ने उसे बाड़मेर रेलवे स्टेशन से ही दबोच लिया।
आमने-सामने बैठाकर हो रही तस्दीक
डीआईजी (एसीबी) डॉ. रामेश्वर सिंह के मुताबिक, जांच के दौरान टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं और कथित कमीशनखोरी के पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा रही है, ताकि बयानों में विरोधाभास और पैसों के लेन-देन की कड़ियां सामने आ सकें।
सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं। जांच एजेंसी दस्तावेजी साक्ष्यों, बैंक ट्रांजेक्शन और टेंडर फाइलों की भी गहन जांच कर रही है।
979 करोड़ के घोटाले का क्या है मामला?
यह पूरा मामला जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन, सप्लाई और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्यों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में मिलीभगत कर नियमों की अनदेखी की गई और भारी कमीशनखोरी के जरिए सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया।
अब सबकी नजरें फरार चल रहे रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल और अन्य तीन आरोपियों पर टिकी हैं। क्या वे जल्द गिरफ्त में आएंगे या जांच एजेंसियों को और इंतजार करना पड़ेगा? लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।
फिलहाल, 979 करोड़ के इस घोटाले में जांच की सुई तेजी से घूम रही है और हर दिन नए खुलासों की उम्मीद बढ़ती जा रही है। राजस्थान के प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई ने हलचल मचा दी है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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