राजस्थान में 31 साल बाद बदलेगा पंचायत चुनाव कानून, 2-बच्चे की शर्त हटाने का बिल आज

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राजस्थान की राजनीति में स्थानीय स्तर पर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव में अब दो से ज्यादा बच्चों वाले भी चुनाव लड़ सकेंगे। इस बाध्यता को खत्म करने के लिए गुरुवार को विधानसभा में दो महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश किए जाएंगे। 

राजस्थान में 31 साल बाद बदलेगा पंचायत चुनाव कानून, 2-बच्चे की शर्त हटाने का बिल आज

राजस्थान की राजनीति में स्थानीय स्तर पर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव में अब दो से ज्यादा बच्चों वाले भी चुनाव लड़ सकेंगे। इस बाध्यता को खत्म करने के लिए गुरुवार को विधानसभा में दो महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश किए जाएंगे। सरकार का यह कदम 31 साल पुराने कानून को बदलने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है।

राज्य सरकार गुरुवार को विधानसभा में राजस्थान पंचायतीराज संशोधन विधेयक-2026 और राजस्थान नगरपालिका संशोधन विधेयक-2026 पेश करेगी। पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर पंचायतीराज से जुड़ा संशोधन बिल पेश करेंगे, जबकि शहरी विकास एवं आवास (यूडीएच) मंत्री झाबर सिंह खर्रा नगरपालिका संशोधन बिल सदन के पटल पर रखेंगे।

बीएसी बैठक में तय होगी बिल पारित करने की तारीख

इन दोनों विधेयकों को कब पारित किया जाएगा, इसका फैसला विधानसभा की कार्य सलाहकार समिति (बीएसी) की बैठक में किया जाएगा। फिलहाल विधानसभा का कामकाज 6 मार्च तक ही निर्धारित है।

यदि बीएसी बैठक में सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाने का निर्णय होता है तो इन दोनों विधेयकों को 9 मार्च को पारित किया जा सकता है। वहीं अगर कार्यवाही नहीं बढ़ाई गई तो संभावना है कि 6 मार्च को ही इन्हें सदन में पारित करवा दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि इन संशोधन विधेयकों को राज्य मंत्रिमंडल ने 25 फरवरी को आयोजित कैबिनेट बैठक में मंजूरी दे दी थी। इसके बाद इन्हें विधानसभा में पेश करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

31 साल बाद बदलेगा भैरोंसिंह सरकार का कानून

राजस्थान में पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता का नियम वर्ष 1995 में लागू किया गया था। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने यह प्रावधान कानून में जोड़ा था।

इस नियम के तहत दो से ज्यादा बच्चों वाले व्यक्ति को पंचायत और नगर निकाय चुनावों में उम्मीदवार बनने से अयोग्य घोषित कर दिया जाता था। यह नियम उस समय परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू किया गया था।

अब करीब 31 साल बाद राज्य की मौजूदा भाजपा सरकार इस प्रावधान को खत्म करने जा रही है। संशोधन विधेयक पारित होने के बाद उम्मीदवार बनने के लिए बच्चों की संख्या की कोई बाध्यता नहीं रहेगी।

सरपंच से मेयर तक सभी चुनावों में लागू था नियम

वर्तमान में पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों के कई पदों पर उम्मीदवार बनने के लिए दो बच्चों की सीमा अनिवार्य है। इसमें वार्ड पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति प्रधान, जिला प्रमुख, नगर परिषद या नगर पालिका के पार्षद, नगर पालिका अध्यक्ष, सभापति और मेयर जैसे पद शामिल हैं।

इन पदों के चुनाव में दो से ज्यादा बच्चों वाले व्यक्ति को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं थी। लेकिन संशोधन बिल पारित होने के बाद यह प्रतिबंध पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

यानी नया कानून लागू होने के बाद किसी भी व्यक्ति के बच्चों की संख्या चाहे जितनी भी हो, वह पंच से लेकर मेयर तक का चुनाव लड़ सकेगा।

स्थानीय राजनीति में दिखेगा बड़ा असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से राजस्थान की स्थानीय राजनीति पर बड़ा असर पड़ेगा। दो बच्चों की बाध्यता के कारण अब तक कई ऐसे नेता चुनाव नहीं लड़ पाते थे, जिनकी स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ थी।

अब इस प्रतिबंध के हटने के बाद ऐसे नेताओं के लिए भी चुनावी मैदान खुल जाएगा। इससे पंचायत और निकाय चुनावों में उम्मीदवारों की संख्या बढ़ने की संभावना है और मुकाबला पहले से ज्यादा कड़ा हो सकता है।

जल्द हो सकते हैं पंचायतीराज चुनाव

राजस्थान में इसी महीने पंचायतीराज चुनावों की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में सरकार का यह फैसला चुनाव से ठीक पहले स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद पहली बार बड़ी संख्या में ऐसे उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर सकते हैं, जो अब तक दो बच्चों की बाध्यता के कारण चुनाव नहीं लड़ पाते थे।

सरकार के इस कदम को स्थानीय लोकतंत्र के दायरे को व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी दे सकता है। फिलहाल सभी की नजरें विधानसभा में पेश होने वाले इन संशोधन विधेयकों और उनके पारित होने की प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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