राजस्थान : FIR के लिए 10-15 हजार लेने का आरोप, MLA घोघरा ने पुलिस पर साधा निशाना,सदन में सत्ता-विपक्ष भिड़े
राजस्थान विधानसभा में सोमवार को कानून-व्यवस्था और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। डूंगरपुर से कांग्रेस विधायक गणेश घोघरा ने जिले की पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए

राजस्थान विधानसभा में सोमवार को कानून-व्यवस्था और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। डूंगरपुर से कांग्रेस विधायक गणेश घोघरा ने जिले की पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार बनने के बाद पुलिस आम लोगों को परेशान कर रही है। वहीं गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए पलटवार किया। इसके बाद सदन में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और बेढम के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
डूंगरपुर पुलिस पर कांग्रेस विधायक के गंभीर आरोप
विधानसभा में मुद्दा उठाते हुए गणेश घोघरा ने कहा कि डूंगरपुर जिले के कई थानों में पुलिस का रवैया आमजन के प्रति बेहद खराब है। उन्होंने आरोप लगाया कि रामसांकड़ा थाने में सब-इंस्पेक्टर लोगों को झूठे मामलों में फंसाने का प्रयास कर रहा है। बच्चों से मारपीट के एक मामले में भी पुलिस गलत लोगों को आरोपी बनाने की कोशिश कर रही है।
घोघरा ने आगे कहा कि बिछीवाड़ा थाने में भी यही स्थिति है, जहां लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाया जा रहा है। उनका आरोप था कि पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कराने के लिए भी लोगों से 10 से 15 हजार रुपये तक की मांग की जाती है। उन्होंने कहा कि जब तक पैसे नहीं दिए जाते, तब तक एफआईआर दर्ज नहीं की जाती।
गृह राज्य मंत्री का पलटवार, कहा- आरोप पूरी तरह गलत
कांग्रेस विधायक के आरोपों पर गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि घोघरा के आरोप पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं। बेढम ने कहा कि डूंगरपुर जिले में पुलिस की सख्ती के कारण अपराधों में कमी आई है और कानून-व्यवस्था बेहतर हुई है।
इस दौरान सदन में बेढम और कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा के बीच तीखी बहस भी हुई। दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा, जिससे सदन का माहौल कुछ समय के लिए गरमा गया।
अंग्रेजी मीडियम स्कूलों पर भी सदन में बहस
इसी बीच कांग्रेस सरकार के दौरान शुरू किए गए अंग्रेजी मीडियम और स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूलों में खाली पदों का मुद्दा भी सदन में उठाया गया। भाजपा विधायक बालकनाथ के सवाल पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने 3737 सरकारी स्कूलों को अंग्रेजी मीडियम में बदल दिया, लेकिन एक भी पद सृजित नहीं किया।
दिलावर ने कहा कि बिना पर्याप्त शिक्षकों और संसाधनों के इतने बड़े स्तर पर स्कूलों को अंग्रेजी मीडियम में बदल देना व्यावहारिक नहीं था। उन्होंने कहा कि कई ऐसे स्कूल हैं जहां एक या दो छात्र ही पढ़ रहे हैं। ऐसे में वहां सभी ग्रेड के शिक्षकों की नियुक्ति करना संभव नहीं है।
‘भांग’ बयान पर विपक्ष का कड़ा विरोध
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बयान के दौरान सदन में उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में बिना सोचे-समझे स्कूल खोल दिए गए। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि “पता नहीं भांग खाकर स्कूल खोल दिए।”
इस बयान पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि एक शिक्षा मंत्री को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। जूली ने पलटवार करते हुए कहा कि लगता है मंत्री खुद भांग खाकर जवाब दे रहे हैं।
बयान पर सफाई, डोटासरा पर साधा निशाना
विवाद बढ़ने पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सफाई देते हुए कहा कि उनका बयान किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं था, बल्कि उस समय की नीतियों पर टिप्पणी थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने सीधे तौर पर गोविंद सिंह डोटासरा के कार्यकाल की ओर इशारा किया था, क्योंकि उस समय वे शिक्षा मंत्री थे।
हालांकि इस मुद्दे पर सदन में कुछ देर तक हंगामा जारी रहा और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के सदस्य एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान दोनों मुद्दों पर तीखी राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल को गरमा दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कानून-व्यवस्था और शिक्षा से जुड़े इन मुद्दों पर आने वाले दिनों में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव जारी रह सकता है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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