राजस्थान विधानसभा में जोरदार हंगामा, कांग्रेस की नारेबाजी से 7वीं बार स्थगन, BJP विधायक ने मांगी माफी
गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने और जयपुर में कथित गोहत्या के मामले में कार्रवाई को लेकर मंगलवार को विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ। प्रश्नकाल के बाद से सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही। कांग्रेस विधायकों की नारेबाजी और सत्ता पक्ष के तीखे प्रतिवाद के बीच माहौल लगातार गरमाता गया।

गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने और जयपुर में कथित गोहत्या के मामले में कार्रवाई को लेकर मंगलवार को विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ। प्रश्नकाल के बाद से सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही। कांग्रेस विधायकों की नारेबाजी और सत्ता पक्ष के तीखे प्रतिवाद के बीच माहौल लगातार गरमाता गया। स्पीकर को व्यवस्था बहाल करने के लिए कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा।
‘राज्यमाता’ के दर्जे पर सरकार से जवाब तलब
बीजेपी विधायक बालमुंदाचार्य ने गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने और गोवंश तस्करी पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करने की मांग की। जवाब में गोपालन मंत्री ने कहा कि राज्य में गोहत्या रोकने के लिए सख्त कानून पहले से लागू है और उसका प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार ने ‘राज्यमाता’ के दर्जे के सवाल पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि “पिछले सप्ताह जयपुर में गोहत्या की घटना सामने आई। हिंगोनिया गोशाला से गाय का सिर काटकर लाने की बात सामने आई है। इसमें बीजेपी नेता का नाम सामने आ रहा है। सरकार बताए कि क्या कार्रवाई हुई?”
आरोपों पर बीजेपी विधायक गोपाल शर्मा ने आपत्ति जताई और कहा कि दोषी व्यक्ति सामने है। इसी दौरान कांग्रेस विधायक वेल में आकर नारेबाजी करने लगे और पोस्टर लहराए। स्पीकर ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि सदन में पोस्टर दिखाने की अनुमति नहीं है और इस तरह की कार्रवाई सदन की गरिमा के खिलाफ है।
खाद्य सुरक्षा और ई-केवाईसी पर तीखी बहस
इससे पहले खाद्य सुरक्षा योजना में विदेश में मजदूरी के लिए गए लोगों के नाम काटने और ई-केवाईसी के मुद्दे पर खाद्य मंत्री सुमित गोदारा और कांग्रेस विधायक रामनिवास गावड़िया के बीच तीखी नोकझोंक हुई। मंत्री ने कहा कि “पात्र व्यक्ति को वंचित नहीं किया जा रहा है। जो लोग विदेश में कमाई कर रहे हैं, क्या उन्हें भी राशन दिया जाए? यह योजना गरीबों के लिए है।”
इस पर कांग्रेस विधायक अशोक चांदना ने आपत्ति जताते हुए मंत्री से सीधे सवाल का जवाब देने को कहा। मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष के सदस्य सदन में कम आते हैं और पूरी बात सुनते नहीं। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष और मंत्री के बीच भी तीखी टिप्पणियां हुईं।
ट्रैफिक कैमरों पर जूली–बेढ़म में तकरार
प्रश्नकाल में कांग्रेस विधायक विकास चौधरी के सवाल पर गृह राज्य मंत्री ने बताया कि ट्रैफिक व्यवस्था सुधार के लिए 2000 कैमरे लगाए जा रहे हैं। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि “दो हजार कैमरे तो अकेले जयपुर में चाहिए।”
गृह राज्य मंत्री बेढ़म ने तंज कसते हुए कहा कि “नेता प्रतिपक्ष के चश्मे को साफ करना चाहूंगा कि सरकार क्या-क्या कदम उठा रही है।” जवाब में जूली ने कहा कि “जनता को वही चश्मा बांट दीजिए, जिससे जाम दिखाई न दे।”
गोपाल शर्मा ने मांगी माफी
दिनभर के हंगामे के बाद बीजेपी विधायक गोपाल शर्मा ने प्रश्नकाल के दौरान गुस्से में कांग्रेस विधायकों की ओर वेल में जाने की घटना पर माफी मांगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि “आज प्रतिपक्ष के नेता ने मुझे जिन घिनौने आरोपों से जोड़कर संकेत किया, उसे मैं सहन नहीं कर पाया। मैंने यहां तक कह दिया कि यदि आरोप साबित हों तो इस्तीफा देने को तैयार हूं।”
उन्होंने आगे लिखा, “ऐसा करते समय मैं सदन की मर्यादा भूल बैठा। इसके लिए मुझे आजीवन खेद रहेगा।” शर्मा ने यह भी कहा कि वह भारत माता, हिंदुत्व, ब्राह्मण, गौ, गायत्री, गीता और धरती माता के प्रति जीवन भर समर्पित हैं और अंतिम सांस तक समर्पित रहेंगे।
विधानसभा में ‘राज्यमाता’ के मुद्दे पर उठा यह विवाद फिलहाल शांत होता नजर नहीं आ रहा है। विपक्ष सरकार से स्पष्ट रुख और कार्रवाई की मांग पर अड़ा है, जबकि सत्ता पक्ष कानून के सख्त पालन का दावा कर रहा है। आने वाले सत्रों में इस मुद्दे के फिर गूंजने के आसार हैं।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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