राजस्थान की यूनिवर्सिटियों में बड़ा खेल! दो-दो विश्वविद्यालयों के कुलपति प्रो. देवस्वरूप बर्खास्त

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

राजस्थान की उच्च शिक्षा व्यवस्था में गुरुवार को उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया, जब राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने दो-दो विश्वविद्यालयों के कुलपति प्रो. देवस्वरूप को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया।

राजस्थान की यूनिवर्सिटियों में बड़ा खेल! दो-दो विश्वविद्यालयों के कुलपति प्रो. देवस्वरूप बर्खास्त

राजस्थान की उच्च शिक्षा व्यवस्था में गुरुवार को उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया, जब राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने दो-दो विश्वविद्यालयों के कुलपति प्रो. देवस्वरूप को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया। आरोप इतने गंभीर हैं कि जांच रिपोर्ट पढ़ने के बाद राजभवन ने बिना देरी कार्रवाई कर दी। मामला सिर्फ नियुक्तियों में गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को नौकरियां बांटी गईं, फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और आरक्षित वर्ग के योग्य उम्मीदवारों के साथ खुला अन्याय किया गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिन दो विश्वविद्यालयों—विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय और बाबा आम्टे दिव्यांग विश्वविद्यालय—की जिम्मेदारी प्रो. देवस्वरूप संभाल रहे थे, वहां जमीन पर व्यवस्था लगभग नदारद थी। विश्वविद्यालयों के नाम पर सिर्फ कुलपति कार्यालय संचालित हो रहे थे, लेकिन हर महीने करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे थे। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकारी खजाने का पैसा कहां और किस पर बहाया जा रहा था?

शिकायत से शुरू हुआ खेल का खुलासा

पूरा मामला तब सामने आया जब जयपुर की डॉ. प्रेमलता सिंगारिया ने राज्यपाल को शिकायत भेजी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राजस्थान विश्वविद्यालय में वर्ष 2011-12 और 2013-14 की नियुक्तियों में नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से चयन किया गया। आरोप था कि योग्य अभ्यर्थियों को जानबूझकर कम अंक देकर बाहर किया गया, जबकि चहेते उम्मीदवारों को इंटरव्यू में लगभग पूरे अंक थमा दिए गए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. भगवती प्रसाद सारस्वत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की। जांच रिपोर्ट ने पूरे सिस्टम की परतें खोल दीं।

जांच रिपोर्ट में क्या-क्या निकला?

रिपोर्ट के मुताबिक प्रो. देवस्वरूप ने कुलपति रहते हुए यूजीसी नियमों को नजरअंदाज कर चयन समितियों की बैठकें मनमाने तरीके से आयोजित कीं। इतना ही नहीं, सिंडिकेट बैठकों के मिनट्स भी कथित तौर पर प्रचलित प्रक्रिया से हटकर तैयार किए गए। जांच में जाली, कूटरचित और भ्रामक दस्तावेज तैयार करने तक की बात सामने आई है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि डॉ. प्रेमलता सिंगारिया का शैक्षणिक रिकॉर्ड और रिसर्च बेहतर होने के बावजूद उन्हें बेहद कम अंक दिए गए। वहीं कुछ पसंदीदा अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में 50 में से 49 अंक तक दिए गए। जांच समिति ने साफ माना कि रिसर्च और योग्यता को नजरअंदाज कर इंटरव्यू के जरिए चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।

सबसे गंभीर आरोप यह भी है कि अनुसूचित जाति, जनजाति और दिव्यांग वर्ग के उम्मीदवारों के लिए बने नियमों की भी अनदेखी की गई। यानी आरक्षण व्यवस्था तक को कथित तौर पर मनमर्जी से प्रभावित किया गया।

गहलोत सरकार के दौर में मिली थी जिम्मेदारी

प्रो. देवस्वरूप को पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के दौरान दो विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन अब भाजपा सरकार के कार्यकाल में राजभवन की इस कार्रवाई ने साफ संदेश दे दिया है कि विश्वविद्यालयों में नियुक्ति घोटालों और वित्तीय अनियमितताओं पर सख्ती बरती जाएगी।

राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारों में यह कार्रवाई बड़ी मानी जा रही है, क्योंकि किसी कुलपति को इस तरह गंभीर आरोपों के आधार पर हटाया जाना दुर्लभ माना जाता है।

अब किसे मिली जिम्मेदारी?

राज्यपाल ने तुरंत नए अंतरिम इंतजाम भी कर दिए हैं। राजस्थान कृषि एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (राजुवास), जोबनेर के कुलगुरु प्रो. त्रिभुवन शर्मा को बाबा आम्टे दिव्यांग विश्वविद्यालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। वहीं हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. एन.के. पाण्डेय को विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी दी गई है।

राजस्थान की यूनिवर्सिटी राजनीति में यह कार्रवाई अब आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों का संकेत मानी जा रही है। सवाल सिर्फ एक कुलपति का नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम का है, जहां शिक्षा के मंदिरों में नियुक्तियों का खेल लंबे समय से चलता रहा।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।