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खतरा! राजस्थान में 15000 ड्राइवर चला रहे कमजोर आंखों के साथ ट्रक, -1 से -6 तक विजन

खतरा! राजस्थान में 15000 ड्राइवर चला रहे कमजोर आंखों के साथ ट्रक, -1 से -6 तक विजन

संक्षेप:

राजस्थान के हाईवे पर दौड़ रहे हजारों ट्रक सिर्फ भारी सामान नहीं ढो रहे, बल्कि एक अदृश्य खतरा भी अपने साथ लिए चल रहे हैं। यह खतरा है ड्राइवरों की कमजोर नजर का। स्वास्थ्य विभाग की ताजा जांच में सामने आया है कि प्रदेश में 15 हजार से ज्यादा ट्रक ड्राइवर ऐसे हैं, जिनकी आंखों की रोशनी बेहद कमजोर है

Jan 26, 2026 10:56 am ISTSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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राजस्थान के हाईवे पर दौड़ रहे हजारों ट्रक सिर्फ भारी सामान नहीं ढो रहे, बल्कि एक अदृश्य खतरा भी अपने साथ लिए चल रहे हैं। यह खतरा है ड्राइवरों की कमजोर नजर का। स्वास्थ्य विभाग की ताजा जांच में सामने आया है कि प्रदेश में 15 हजार से ज्यादा ट्रक ड्राइवर ऐसे हैं, जिनकी आंखों की रोशनी बेहद कमजोर है, इसके बावजूद वे नेशनल और स्टेट हाईवे पर भारी वाहन चला रहे हैं।

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हालात इतने गंभीर हैं कि कई ड्राइवर 5–6 फीट की दूरी के बाद साफ देख ही नहीं पाते, तो कुछ ऐसे भी मिले जिनकी नजर इतनी कमजोर है कि -6 नंबर का चश्मा पहनाने के बाद भी धुंधलापन बना रहता है। कई मामलों में ड्राइवर ट्रक की खिड़की के बाहर खड़े व्यक्ति तक को पहचानने में असमर्थ पाए गए।

64 हजार ड्राइवरों की जांच, चौंकाने वाले नतीजे

प्रदेश में बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पहली बार हाईवे पर भारी वाहन चालकों की आंखों की विशेष जांच करवाई। यह अभियान ‘मां नेत्र योजना’ के तहत चलाया गया।

स्टेट और नेशनल हाईवे पर चलने वाले 64 हजार से ज्यादा ट्रक ड्राइवरों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें से 15,824 ड्राइवर यानी करीब 25 फीसदी विजन डिफेक्ट के शिकार निकले।

इन ड्राइवरों में आंखों का नंबर माइनस 1 से लेकर माइनस 6 तक दर्ज किया गया। चिंताजनक बात यह है कि कमजोर नजर सिर्फ बुजुर्ग ड्राइवरों तक सीमित नहीं है, बल्कि 30–35 साल के युवा ड्राइवरों में भी गंभीर विजन प्रॉब्लम सामने आई है।

हाईवे पर ऐसे ड्राइवर, जो साइन बोर्ड तक नहीं पढ़ पाते

जांच में पाया गया कि 84 फीसदी ड्राइवरों की नजर माइनस 1 से 2.50 के बीच है। ऐसे ड्राइवरों को दूर की चीजें धुंधली दिखती हैं। कई ड्राइवरों ने बताया कि सड़क तो दिख जाती है, लेकिन हाईवे पर लगे साइन बोर्ड तब तक पढ़ में नहीं आते, जब तक गाड़ी बिल्कुल पास न पहुंच जाए।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रात के समय यह समस्या और बढ़ जाती है। कम रोशनी में धुंधलापन बढ़ता है, सामने से आ रही गाड़ियों की हेडलाइट फैली हुई लगती है और अचानक आने वाले मोड़ या संकेत पहचानने में देरी हो सकती है।

10–15 फीट के बाद कुछ भी साफ नहीं

करीब 9.16 फीसदी ड्राइवरों का चश्मे का नंबर माइनस 2.75 से माइनस 4 के बीच पाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, इस स्तर की नजर में 10–15 फीट के बाद सब कुछ धुंधला नजर आता है। पैदल यात्री या साइकिल सवार सिर्फ परछाई जैसे दिखते हैं। सड़क की बनावट, गड्ढे और सामने से आ रही गाड़ी की दूरी का सही अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

सबसे खतरनाक श्रेणी: -6 नंबर वाले ड्राइवर

जांच में करीब 0.63 फीसदी ड्राइवरों की नजर माइनस 4.25 से माइनस 6 तक पाई गई। इनमें 100 ड्राइवर ऐसे हैं, जिन्हें माइनस 6 नंबर का चश्मा जरूरी है।

नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी कमजोर नजर में बिना चश्मे के ड्राइविंग सीधे जानलेवा साबित हो सकती है। सामने वाली गाड़ी की टेल लाइट भी सिर्फ लाल धब्बे की तरह दिखाई देती है और दूरी का अंदाजा पूरी तरह खत्म हो जाता है।

दिल्ली–जयपुर हाईवे सबसे ज्यादा प्रभावित

दिल्ली–जयपुर नेशनल हाईवे पर मनोहरपुर–शाहपुरा सेंटर में सबसे ज्यादा जांच हुई। यहां 21 हजार ड्राइवरों की आंखों की जांच की गई, जिनमें से 9 हजार से ज्यादा की नजर कमजोर पाई गई।

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समाधान की पहल: मुफ्त चश्मे बांटे गए

स्वास्थ्य विभाग ने जांच के बाद इन ड्राइवरों को मुफ्त चश्मे वितरित किए। विभाग ने प्रदेशभर में 65 डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर बनाए हैं। स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा के अनुसार, अप्रैल 2024 से अब तक लगातार स्क्रीनिंग की जा रही है।

राजस्थान सरकार ने मुख्यमंत्री नेत्र वाउचर योजना के तहत बस और ट्रक ड्राइवरों सहित कारीगरों को भी मुफ्त चश्मे देने की व्यवस्था की है।

एक्सपर्ट चेतावनी

नेत्र विशेषज्ञ डॉ. सोनू गोयल का कहना है कि हाईवे पर सही दूरी का आंकलन बेहद जरूरी होता है। कमजोर नजर वाला ड्राइवर देर से ब्रेक लगाएगा और यही देरी बड़े हादसों की वजह बन सकती है। उनके अनुसार, ड्राइवर का सही विजन सड़क सुरक्षा की पहली शर्त है।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma
इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में पिछले 5 साल का अनुभव है। लाइव हिंदुस्तान से पहले, जी राजस्थान, महानगर टाइम्समें सेवा दे चुके हैं। राजस्थान विश्विद्यालय से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। गुलाबी नगरी जयपुर में ही जन्म हुआ। राजस्थान की राजनीति और समृद्ध कला, संस्कृति पर लिखना पसंद है। और पढ़ें

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