राजस्थान में ट्रांसपोटर्स ने किया चक्का जाम; 10 हजार ट्रकों के पहिए थमे
राजस्थान से केरल, चेन्नई, गुवाहाटी या अन्य राज्यों तक जाने वाले ट्रकों को अलग-अलग राज्यों का टैक्स देना पड़ता है। कई बार टैक्स और परमिट का खर्च इतना बढ़ जाता है कि वह माल भाड़े के बराबर पहुंच जाता है।

राजस्थान की सड़कों पर सोमवार सुबह एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। जहां रोज हजारों ट्रकों की आवाजाही से हाईवे गुलजार रहते हैं, वहीं आज कई ट्रांसपोर्ट नगरों और लॉजिस्टिक्स हब में ट्रकों की लंबी कतारें खड़ी नजर आईं। वजह है राजस्थान ट्रक ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति के आह्वान पर रविवार रात 12 बजे से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल। दावा किया जा रहा है कि प्रदेशभर में करीब 10 हजार ट्रकों के पहिए थम गए हैं, जिससे माल ढुलाई व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है।
यह आंदोलन किसी एक नियम के खिलाफ नहीं, बल्कि उन व्यवस्थागत खामियों के खिलाफ है, जिन्हें ट्रांसपोर्टर लंबे समय से उठाते आ रहे हैं। ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि सरकार ने व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) अनिवार्य तो कर दिया, लेकिन बाजार में अधिकृत डिवाइस पर्याप्त संख्या में उपलब्ध ही नहीं हैं। ऐसे में हजारों ट्रकों का फिटनेस, परमिट और अन्य जरूरी काम अटक गए हैं।
‘नियमों से नहीं, अधूरी तैयारी से परेशानी’
विश्वकर्मा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश चौधरी का कहना है कि ट्रांसपोर्टर तकनीक का विरोध नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार किसी नई व्यवस्था को लागू करती है तो पहले उसकी पूरी तैयारी भी होनी चाहिए। अभी हालात ऐसे हैं कि अधिकृत कंपनियों के पास VLTD उपलब्ध नहीं हैं और बिना इसके वाहन फिटनेस व परमिट जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो पा रहीं।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि पहले पर्याप्त संख्या में डिवाइस उपलब्ध कराई जाएं, प्रक्रिया सरल बनाई जाए और उसके बाद नियमों को सख्ती से लागू किया जाए। जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को बेवजह आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
परमिट व्यवस्था भी बनी बड़ी परेशानी
हड़ताल की दूसरी बड़ी वजह परमिट व्यवस्था है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि सरकार ने फिलहाल अस्थायी परमिट (TP) की व्यवस्था तो जारी रखी है, लेकिन लंबी दूरी तक माल ढुलाई करने वाले ट्रकों के लिए यह व्यावहारिक समाधान नहीं है।
राजस्थान से केरल, चेन्नई, गुवाहाटी या अन्य राज्यों तक जाने वाले ट्रकों को अलग-अलग राज्यों का टैक्स देना पड़ता है। कई बार टैक्स और परमिट का खर्च इतना बढ़ जाता है कि वह माल भाड़े के बराबर पहुंच जाता है। इसके अलावा ई-डिटेक्शन सिस्टम के जरिए होने वाले चालानों से भी ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। उनका कहना है कि तकनीकी खामियों के कारण कई बार बिना किसी वास्तविक गलती के भी चालान जारी हो जाते हैं।
हर जिले में फिटनेस सेंटर खोलने की मांग
संघर्ष समिति की प्रमुख मांगों में प्रदेश के प्रत्येक जिले में वाहन फिटनेस सेंटर खोलना भी शामिल है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि अभी कई जिलों के वाहन मालिकों को फिटनेस कराने के लिए दूसरे शहरों तक जाना पड़ता है। इससे समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। यदि हर जिले में फिटनेस सेंटर होंगे तो ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
कई बड़े संगठनों ने दिया आंदोलन को समर्थन
यह आंदोलन अब केवल ट्रक ऑपरेटरों तक सीमित नहीं रहा। प्रदेश के कई बड़े ट्रांसपोर्ट संगठनों ने खुलकर इसका समर्थन किया है। लॉजिस्टिक्स एंड ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन (LTOA), जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन, विश्वकर्मा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, जयपुर परचून ट्रांसपोर्ट यूनियन और ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस ऑपरेटर एसोसिएशन सहित कई संगठनों ने संयुक्त रूप से हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की है।
LTOA के अध्यक्ष अनिल आनंद और महासचिव नवीन शर्मा ने जारी समर्थन पत्र में कहा कि ट्रांसपोर्ट उद्योग पहले से बढ़ती लागत, अव्यावहारिक नियमों और प्रशासनिक उदासीनता से जूझ रहा है। ऐसे में सरकार को ट्रांसपोर्टरों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
जरूरी सामान की सप्लाई पर असर की आशंका
यदि यह हड़ताल लंबी चली तो इसका असर आम लोगों तक भी पहुंच सकता है। ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति का कहना है कि प्रदेश में सीमेंट, स्टील, किराना, कृषि उपज, औद्योगिक कच्चे माल और अन्य जरूरी वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। मंडियों से माल की आवाजाही धीमी पड़ने और फैक्ट्रियों तक कच्चा माल समय पर नहीं पहुंचने की स्थिति भी बन सकती है।
व्यापारिक संगठनों की नजर अब सरकार और ट्रांसपोर्टरों के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में सप्लाई चेन पर इसका असर और गहरा हो सकता है।
फिलहाल राजस्थान की सड़कों पर ट्रकों की रफ्तार थम चुकी है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच बातचीत से यह गतिरोध जल्द खत्म होगा या फिर यह हड़ताल प्रदेश की अर्थव्यवस्था और बाजार पर बड़ा असर छोड़ जाएगी।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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