राजस्थान के इस स्कूल में 14 साल के छात्र की मौत, परिवार बोला हत्या, सबूत मिटाने का आरोप
संक्षेप: राजस्थान के पाटन में स्थित एक जवाहर नवोदय स्कूल का हॉस्टल अब गम और सवालों की चपेट में है। 14 साल के धीरज वर्मा ने 9 अक्टूबर को अपने कमरे में फंदा लगाकर जान देने की कोशिश की

राजस्थान के पाटन में स्थित एक जवाहर नवोदय स्कूल का हॉस्टल अब गम और सवालों की चपेट में है। 14 साल के धीरज वर्मा ने 9 अक्टूबर को अपने कमरे में फंदा लगाकर जान देने की कोशिश की, लेकिन डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद 13 अक्टूबर की रात जयपुर के जेके लोन हॉस्पिटल में उनकी मौत हो गई। इस हादसे ने परिवार और पूरे इलाके को झकझोर दिया है।
धीरज का परिवार इस घटना को आत्महत्या नहीं मान रहा है। उनके दादा मोतीलाल वर्मा ने स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बच्चे के हाथों पर चोट के निशान थे और कमरे के बाहर बरामदे में खून के भी दाग मिले थे। मोतीलाल ने साफ कहा, “यह आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या है। और स्कूल प्रशासन ने सबूत मिटाने की कोशिश की।”
घटना के दिन, हॉस्टल गार्ड अशोक कुमार ने धीरज को फंदे पर लटका हुआ देखा और तुरंत उसे बचाने के लिए अपनी ताकत लगा दी। उन्होंने फंदे से छात्र को उतारा और साथी स्टाफ के साथ मिलकर तुरंत अस्पताल ले गए। अशोक कुमार की सतर्कता ने शायद धीरज की जिंदगी कुछ घंटे और बढ़ाई, लेकिन डॉक्टरों की रिपोर्ट ने परिवार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
पाटन थाना अधिकारी विद्याधर शर्मा ने बताया कि धीरज 10वीं कक्षा का छात्र था और हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। स्कूल प्रशासन ने घटना के तुरंत बाद परिवार को नीमकाथाना हॉस्पिटल बुलाया और फिर जयपुर रेफर किया। लेकिन दादा मोतीलाल का आरोप है कि स्कूल ने शव लेने के लिए परिवार पर दबाव डाला और पोस्टमार्टम कराने के लिए जल्दबाजी की।
धीरज के मामा अजय कुमार ने भी प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि “हम तब तक शव नहीं लेंगे जब तक पूरी जांच नहीं होती।” उन्होंने पाटन थाने में हत्या के प्रयास, सबूत मिटाने और दलित उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया है। अब यह केस नीमकाथाना डिप्टी एसपी अनुज डाल की देखरेख में जांच के लिए भेजा गया है।
राजस्थान में धीरज की तरह हर दिन लगभग 15 लोग आत्महत्या कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, पिछले 5 साल में 27,676 लोग अपनी जिंदगी खत्म कर चुके हैं, जिनमें से 73 प्रतिशत पुरुष हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें सबसे अधिक युवा शामिल हैं। 14 से 18 साल की उम्र के स्कूल स्टूडेंट की आत्महत्या की संख्या साल 2023 में 344 और 2024 में 365 रही।
धीरज की कहानी केवल एक नाम नहीं है; यह राजस्थान के युवा छात्रों की बढ़ती मानसिक चुनौतियों और स्कूल सिस्टम में हो रही लापरवाहियों का दुखद आईना है। स्कूल का हॉस्टल, जो बच्चों की सुरक्षा का वादा करता है, अब सवालों की वजह से हलचल में है। परिवार का रो-रोकर कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए, न कि केवल सांत्वना।
धीरज के माता-पिता और दादा-दादी की आंखों में ग़म और सवाल एक ही बात कह रहे हैं क्या कोई स्कूल ऐसा हो सकता है जो अपने ही बच्चों की सुरक्षा में विफल हो जाए? राजस्थान के लिए यह चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान न दिया गया तो इन मासूमों की जान हर रोज़ खतरे में रहेगी।

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Sachin Sharmaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




