राजस्थान: RMSCL के टेंडरों में धांधली? CAG ने 10 खरीदों में नियम उल्लंघन बताया, मुख्य सचिव से मांगी कार्रवाई
राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड (RMSCL) द्वारा तीन वर्षों के दौरान किए गए टेंडरों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है।
राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड (RMSCL) द्वारा तीन वर्षों के दौरान किए गए टेंडरों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। भारत के महालेखा नियंत्रक (CAG) ने एक विस्तृत ऑडिट के बाद मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित चार वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर कार्रवाई की अनुशंसा की है। CAG की रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि RMSCL ने टेंडर प्रक्रिया में कई बार मनमाने संशोधन किए, जो न केवल RTPP एक्ट का उल्लंघन है, बल्कि इससे राज्य को बड़े वित्तीय नुकसान की आशंका भी बढ़ती है।
CAG की ओर से की गई यह ऑडिट वर्ष 2021 से 2023 के बीच जारी सभी महत्वपूर्ण टेंडरों पर आधारित है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस अवधि में RMSCL ने कई टेंडरों की शर्तें एक से अधिक बार बदलीं, जिससे प्रतियोगिता सीमित होकर केवल एक या दो कंपनियों तक रह गई। ये संशोधन ऐसे थे, जिनसे लाभ उठाने वाली कंपनियाँ पहले से ही प्री-बिड बैठक में सुझाव दे चुकी थीं — और RMSCL ने उन्हीं के अनुसार टेंडर की शर्तों में बार-बार बदलाव किए।
ऑडिट में सामने आई गड़बड़ियों ने खरीद प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं:
• RTPP एक्ट सेक्शन 22(1): किसी भी सरकारी एजेंसी को प्री-बिड बैठक में सिर्फ तकनीकी संदेह दूर करने की अनुमति होती है। कंपनियों से शर्तों पर सुझाव लेने या उनकी मांगों पर टेंडर संशोधन करना नियम के खिलाफ है। RMSCL ने यही किया।
• RTPP एक्ट सेक्शन 23(1): प्री-बिड मीटिंग के बाद अगर कोई संशोधन किया जाता है, तो उसे सभी अखबारों में प्रकाशित करना या नए सिरे से टेंडर जारी करना अनिवार्य है। लेकिन RMSCL ने ऐसा नहीं किया — संशोधन केवल पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए।
• RTPP रूल्स 46: मीटिंग मिनिट्स तैयार कर उन्हें आधिकारिक तौर पर सभी बिडर्स को भेजना आवश्यक है। कई मामलों में ऐसा भी नहीं किया गया।
• लगातार संशोधन के बाद RMSCL ने नई कंपनियों को भाग लेने का मौका नहीं दिया। सिर्फ उन्हीं कंपनियों को फायदा हुआ, जिनके अनुरूप शर्तें बदली गईं।
ऑडिट रिपोर्ट में 10 ऐसे टेंडरों का उल्लेख है, जिनमें बार-बार संशोधन किए गए और यह संशोधन केवल चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने वाले साबित हुए।
कुछ प्रमुख उदाहरण:
1. HFNC मशीन (2023) – 15 करोड़ रुपये का टेंडर
20 जुलाई 2023 की प्री-बिड मीटिंग के बाद इस टेंडर में 3 बार संशोधन किया गया। सभी संशोधन केवल पोर्टल पर अपलोड हुए, जिससे कई कंपनियाँ बाहर हो गईं।
2. बेबी रिसिविंग किट (2021) – 18 करोड़ रुपये का टेंडर
इस टेंडर में RMSCL ने 7 बार शर्तें बदलीं। नतीजतन, अंत में केवल 1 फर्म ही सप्लाई के लिए बची।
3. हीमोग्लोबिन टेस्ट मीटर व स्ट्रिप्स (2021) – 44 करोड़ रुपये
3 बार संशोधन के बाद सिर्फ 2 कंपनियाँ ही क्वालिफाई कर सकीं।
4. ग्लूको स्ट्रिप, लेंसेंट व मीटर (2022) – 8.96 करोड़ रुपये
4 बार संशोधन किया गया और इस प्रक्रिया के बाद महज़ 3 कंपनियाँ ही टेंडर में बचीं।
CAG ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर गंभीर चिंता जताई है कि टेंडरों की शर्तों में मनमर्जी से किए गए बदलाव प्रतियोगिता कम कर देते हैं, जिससे खरीद की लागत बढ़ने की संभावना रहती है। ऑडिट में स्पष्ट कहा गया है कि RMSCL के अधिकारियों ने RTPP एक्ट के प्रावधानों का पालन नहीं किया और इससे सरकारी खजाने को संभावित नुकसान हुआ।

लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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