राजस्थान में अब इलाज के लिए नहीं भटकेंगे रिटायर्ड पुलिसकर्मी, DGP ने बदले नियम
राजस्थान पुलिस के जवानों और उनके परिवारों के लिए राहत और सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। दिन-रात जनता की सेवा में जुटे पुलिसकर्मियों के सामाजिक और आर्थिक संबल को मजबूत करने के लिए विभाग ने अहम फैसले लिए हैं।

राजस्थान पुलिस के जवानों और उनके परिवारों के लिए राहत और सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। दिन-रात जनता की सेवा में जुटे पुलिसकर्मियों के सामाजिक और आर्थिक संबल को मजबूत करने के लिए विभाग ने अहम फैसले लिए हैं।
कल्याण बैठक में अहम निर्णय
जयपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित राजस्थान पुलिस कल्याण निधि बोर्ड की 26वीं बैठक में पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने कई महत्वपूर्ण और मानवीय फैसलों की घोषणा की। इन निर्णयों का उद्देश्य पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को बेहतर सुरक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
रिटायर्ड पुलिसकर्मियों को इलाज की सुविधा
बैठक का सबसे बड़ा फैसला सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के हित में लिया गया। अब तक गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता केवल कार्यरत कर्मियों तक सीमित थी, लेकिन अब रिटायर्ड पुलिसकर्मी भी इस दायरे में आ गए हैं। कैंसर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए उन्हें पुलिस कल्याण निधि से आर्थिक सहायता मिलेगी। इससे लंबे समय तक सेवा देने वाले पूर्व जवानों को बड़ी राहत मिलेगी।
महिला स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
पुलिस परिवारों की महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भी बड़ा कदम उठाया गया है। अब प्रसव के दौरान होने वाले खर्चों में आर्थिक सहायता दी जाएगी। खासकर जटिल सिजेरियन मामलों में, जहां इलाज का खर्च ज्यादा हो जाता है, वहां विभाग निर्धारित सीमा तक सहायता प्रदान करेगा।
शहीद और दिवंगत परिवारों को सहारा
दिवंगत पुलिसकर्मियों के परिवारों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए बोर्ड ने मानवीय फैसला लिया। बीकानेर की तृतीय बटालियन आरएसी के दिवंगत कांस्टेबल रतनदीप मीणा के परिवार पर बकाया 5 लाख रुपये का ऋण पूरी तरह माफ कर दिया गया। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि जवान के निधन के बाद उसका परिवार आर्थिक संकट में न फंसे।
आधुनिक सुविधाओं की दिशा में कदम
दूरदराज और नवगठित जिलों में तैनात पुलिसकर्मियों के लिए भी योजनाओं को मंजूरी दी गई है। पुलिस लाइंस की कैंटीनों और लाइब्रेरी को आधुनिक बनाया जाएगा। साथ ही नए जिलों में सीपीसी कैंटीन खोलने की योजना को भी हरी झंडी दी गई है।
बच्चों के भविष्य पर ध्यान
पुलिसकर्मियों के बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए तकनीकी और व्यावसायिक कोर्स से जुड़ी छात्रवृत्तियों की राशि बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। यह कदम पुलिस परिवारों के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
DGP का स्पष्ट संदेश
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि पुलिस बल का कल्याण विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनका कहना था कि जब जवान का परिवार सुरक्षित और संतुष्ट रहेगा, तभी वह पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा पाएगा।
सकारात्मक बदलाव की पहल
इन फैसलों को पुलिस बल में सकारात्मक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और समर्पण में भी वृद्धि होगी।
जयपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित राजस्थान पुलिस कल्याण निधि बोर्ड की 26वीं बैठक में पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने कई महत्वपूर्ण और मानवीय फैसलों की घोषणा की। इन निर्णयों का उद्देश्य पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को बेहतर सुरक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
रिटायर्ड पुलिसकर्मियों को इलाज की सुविधा
बैठक का सबसे बड़ा फैसला सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के हित में लिया गया। अब तक गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता केवल कार्यरत कर्मियों तक सीमित थी, लेकिन अब रिटायर्ड पुलिसकर्मी भी इस दायरे में आ गए हैं। कैंसर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए उन्हें पुलिस कल्याण निधि से आर्थिक सहायता मिलेगी। इससे लंबे समय तक सेवा देने वाले पूर्व जवानों को बड़ी राहत मिलेगी।
महिला स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
पुलिस परिवारों की महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भी बड़ा कदम उठाया गया है। अब प्रसव के दौरान होने वाले खर्चों में आर्थिक सहायता दी जाएगी। खासकर जटिल सिजेरियन मामलों में, जहां इलाज का खर्च ज्यादा हो जाता है, वहां विभाग निर्धारित सीमा तक सहायता प्रदान करेगा।
शहीद और दिवंगत परिवारों को सहारा
दिवंगत पुलिसकर्मियों के परिवारों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए बोर्ड ने मानवीय फैसला लिया। बीकानेर की तृतीय बटालियन आरएसी के दिवंगत कांस्टेबल रतनदीप मीणा के परिवार पर बकाया 5 लाख रुपये का ऋण पूरी तरह माफ कर दिया गया। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि जवान के निधन के बाद उसका परिवार आर्थिक संकट में न फंसे।
आधुनिक सुविधाओं की दिशा में कदम
दूरदराज और नवगठित जिलों में तैनात पुलिसकर्मियों के लिए भी योजनाओं को मंजूरी दी गई है। पुलिस लाइंस की कैंटीनों और लाइब्रेरी को आधुनिक बनाया जाएगा। साथ ही नए जिलों में सीपीसी कैंटीन खोलने की योजना को भी हरी झंडी दी गई है।
बच्चों के भविष्य पर ध्यान
पुलिसकर्मियों के बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए तकनीकी और व्यावसायिक कोर्स से जुड़ी छात्रवृत्तियों की राशि बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। यह कदम पुलिस परिवारों के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
DGP का स्पष्ट संदेश
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि पुलिस बल का कल्याण विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनका कहना था कि जब जवान का परिवार सुरक्षित और संतुष्ट रहेगा, तभी वह पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा पाएगा।
सकारात्मक बदलाव की पहल
इन फैसलों को पुलिस बल में सकारात्मक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और समर्पण में भी वृद्धि होगी।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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