नशे के सौदागरों पर डिजिटल शिकंजा कसने की तैयारी, राजस्थान में पर्ची वाली 50 दवाओं की बिक्री अब एप से होगी ट्रैक
राजस्थान में नशीली दवाओं की अवैध बिक्री पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ा और निर्णायक कदम उठने जा रहा है। ड्रग कंट्रोलर विभाग अब शेड्यूल एच-1 में शामिल दवाओं की फैक्ट्री से लेकर मरीज तक पूरी डिजिटल निगरानी करेगा।
राजस्थान में नशीली दवाओं की अवैध बिक्री पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ा और निर्णायक कदम उठने जा रहा है। ड्रग कंट्रोलर विभाग अब शेड्यूल एच-1 में शामिल दवाओं की फैक्ट्री से लेकर मरीज तक पूरी डिजिटल निगरानी करेगा। इसके लिए एक खास मोबाइल एप और वेब पोर्टल तैयार किया जा रहा है, जिसमें दवा बनाने वाली कंपनी, डिस्ट्रीब्यूटर और मेडिकल स्टोर—तीनों को अनिवार्य रूप से एंट्री करनी होगी।
अब सवाल यह है कि यह सिस्टम काम कैसे करेगा और इससे मेडिकल नशे पर कैसे लगाम लगेगी?
दरअसल, शेड्यूल एच-1 में वे दवाएं आती हैं, जिनका दुरुपयोग नशे के तौर पर होने की सबसे ज्यादा आशंका रहती है। इनमें तेज पेन किलर, खांसी की दवाएं, नींद और मनोरोग से जुड़ी दवाएं, कुछ एंटीबायोटिक्स और टीबी रोधी दवाएं शामिल हैं। राजस्थान में ऐसी करीब 50 दवाएं हैं, जिन्हें बिना डॉक्टर की पर्ची बेचना कानूनन अपराध है। इसके बावजूद अब तक इनकी निगरानी छापेमारी तक सीमित थी।
अब तकनीक के जरिए इस पूरे खेल की कमर तोड़ने की तैयारी है।
तीन लेयर में होगी निगरानी
ड्रग कंट्रोलर विभाग का यह नया सिस्टम तीन स्तरों पर मॉनिटरिंग करेगा।
पहला स्तर – फार्मा कंपनी:
मान लीजिए किसी दवा कंपनी ने एक महीने में शेड्यूल एच-1 की एक लाख टैबलेट बनाई। कंपनी को एप पर बताना होगा कि कितनी दवा बनी और किस-किस डिस्ट्रीब्यूटर को कब और कितनी सप्लाई की गई।
दूसरा स्तर – डिस्ट्रीब्यूटर:
डिस्ट्रीब्यूटर को यह दर्ज करना होगा कि उसने कंपनी से कितना स्टॉक लिया और आगे किन मेडिकल स्टोर्स को कितनी दवा सप्लाई की।
तीसरा और सबसे अहम स्तर – मेडिकल स्टोर:
मेडिकल स्टोर को न सिर्फ स्टॉक की एंट्री करनी होगी, बल्कि यह भी बताना होगा कि दवा किस मरीज को, किस तारीख को और किस डॉक्टर की पर्ची पर बेची गई।
बिल काटना अनिवार्य होगा। मरीज का मोबाइल नंबर और डॉक्टर की पर्ची भी एप पर अपलोड करनी पड़ेगी।
यानी अब हर गोली का डिजिटल हिसाब रहेगा।
इस पूरे सिस्टम को सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग (DoIT) की मदद से तैयार किया जा रहा है। इसके लिए 2 करोड़ 39 लाख रुपए का बजट भी मंजूर हो चुका है। जिला मुख्यालय पर बैठे अधिकारी अपने ऑफिस से ही पूरे जिले में शेड्यूल एच-1 दवाओं की खरीद-बिक्री पर नजर रख सकेंगे।
इस एप से यह भी साफ हो जाएगा कि कौन सा डॉक्टर इन दवाओं को बार-बार लिख रहा है। डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन नंबर राजस्थान मेडिकल काउंसिल से लिंक रहेगा।
अगर कोई मरीज बार-बार बड़ी मात्रा में ये दवाएं खरीद रहा है, तो वह भी सिस्टम में दिखेगा।
किसी मेडिकल स्टोर की बिक्री अगर संदिग्ध पाई गई, तो कार्रवाई तय मानी जाएगी।
पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में मेडिकल नशे के कई गंभीर मामले सामने आए हैं।
दो साल पहले जयपुर में एक डॉक्टर की क्लिनिक से 11 लाख रुपए की नशीली दवाएं जब्त हुई थीं। इनमें ब्यूप्रेनोर्फिन, अल्प्राजोलम और जोल्पीडेम जैसी दवाएं शामिल थीं।
इसी साल फरवरी में जयपुर के एक मेडिकल स्टोर का लाइसेंस रद्द किया गया, जहां बिना बिल के एनडीपीएस श्रेणी की दवाएं रखी मिलीं।
राजस्थान के ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक का कहना है कि यह सिस्टम चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले सभी स्टेकहोल्डर्स को जागरूक किया जाएगा। नियमों का पालन नहीं करने पर एनडीपीएस एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई होगी।
उनके मुताबिक, शेड्यूल एच-1 और एंटीबायोटिक दवाओं के अधिक इस्तेमाल से शरीर में रेजिस्टेंस बढ़ रहा है। यह एप न सिर्फ नशे पर, बल्कि दवाओं के गलत इस्तेमाल पर भी रोक लगाएगा।
कुल मिलाकर, राजस्थान में अब मेडिकल नशे के लिए रास्ते आसान नहीं रहेंगे। हर दवा का डिजिटल ट्रैक तय करेगा कि गोली इलाज के लिए है या नशे के लिए।

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Sachin Sharmaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




