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राजस्थान में मुख्यमंत्री दवा वितरण व्यवस्था कौन संभाल रहा? जिला अस्पतालों में फार्मासिस्ट अधीक्षक की कमी से संकट

राजस्थान में मुख्यमंत्री दवा वितरण व्यवस्था कौन संभाल रहा? जिला अस्पतालों में फार्मासिस्ट अधीक्षक की कमी से संकट

संक्षेप:

राजस्थान के जिला अस्पतालों के भीतर इन दिनों एक गहरी खामोशी तैर रही है एक ऐसा सन्नाटा, जो दवा वितरण काउंटर से लेकर इमरजेंसी वार्ड तक महसूस किया जा सकता है। वजह सिर्फ संसाधनों की कमी या बढ़ते मरीजों का दबाव नहीं, बल्कि वह खाली कुर्सी है

Dec 09, 2025 10:01 pm ISTSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान, जयपुर
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राजस्थान के जिला अस्पतालों के भीतर इन दिनों एक गहरी खामोशी तैर रही है एक ऐसा सन्नाटा, जो दवा वितरण काउंटर से लेकर इमरजेंसी वार्ड तक महसूस किया जा सकता है। वजह सिर्फ संसाधनों की कमी या बढ़ते मरीजों का दबाव नहीं, बल्कि वह खाली कुर्सी है, जिस पर बैठने वाला फार्मासिस्ट अधीक्षक महीनों से तय नहीं हो पा रहा। अस्पतालों में फार्मेसी प्रबंधन की कमान कौन संभालेगा? यह सवाल अब आंदोलन का रूप ले सकता है।

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फार्मासिस्ट संवर्ग ने अब इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा फार्मासिस्टों का पृथक कैडर तो सृजित कर दिया गया, लेकिन विडंबना यह है कि जिलों और मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में फार्मासिस्ट अधीक्षक के पद अधिकांश जगहों पर आज भी खाली हैं। मंजूर पद फार्मासिस्ट, फार्मासिस्ट ग्रेड-1, फार्मासिस्ट अधीक्षक और सहायक निदेशक (फार्मासिस्ट) कागज़ों में दर्ज जरूर हैं, पर मैदान में नेतृत्व का अभाव अस्पताल सिस्टम को कमजोर कर रहा है।

फार्मासिस्ट संगठन की मांग साफ है जब तक डीपीसी की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक संबंधित अस्पताल में कार्यरत वरिष्ठतम फार्मासिस्ट ग्रेड-1 को अधीक्षक का प्रभार सौंपा जाए। दावा किया जा रहा है कि इससे मुख्यमंत्री नि:शुल्क निरोगी राजस्थान योजना, आयुष्मान भारत योजना और आरजीएचएस जैसी बड़ी योजनाओं की मॉनिटरिंग बगैर रुकावट संचालित की जा सकेगी।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। मांग यह भी है कि नर्सिंग और रेडियोग्राफर संवर्ग की तर्ज पर फार्मासिस्ट अधीक्षक के लिए अलग कार्यालय, पूरा सेटअप, आधुनिक उपकरण, कंप्यूटर और सुसज्जित कक्ष उपलब्ध करवाए जाएं वरना दवा वितरण व्यवस्था, ड्यूटी रोस्टर और अवकाश प्रबंधन जैसे संवेदनशील कार्य हमेशा अव्यवस्थित ही रहेंगे।

प्रदेशाध्यक्ष तिलकचन्द शर्मा का कहना है कि जब तक सिस्टम में प्रभार की स्पष्टता नहीं होगी, तब तक अस्पतालों में दवा प्रबंधन ‘ड्राइविंग सीट बिना ड्राइवर’ जैसा रहेगा।

अब सवाल यह है कि

क्या सरकार इस बढ़ती आवाज़ को सुनेगी?

क्या खाली कुर्सी पर बैठने वाला अधीक्षक जल्द तय होगा?

या फिर जिला अस्पतालों में यह सन्नाटा और गहराता जाएगा?

आगे क्या होगा इस पर सबकी नज़रें टिकी हैं…।

उम्मीदें तेज हैं, पर जवाब अभी भी अधर में है।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma
इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में पिछले 5 साल का अनुभव है। लाइव हिंदुस्तान से पहले, जी राजस्थान, महानगर टाइम्समें सेवा दे चुके हैं। राजस्थान विश्विद्यालय से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। गुलाबी नगरी जयपुर में ही जन्म हुआ। राजस्थान की राजनीति और समृद्ध कला, संस्कृति पर लिखना पसंद है। और पढ़ें

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