राजस्थान में पटवारी की जगह BJP MLA का कर दिया तबादला; नाम देख अधिकारी भी चौंके

लाइव हिन्दुस्तान, जयपुर
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इस चूक का सबसे बड़ा असर उस पटवारी पर पड़ा है, जिसका वास्तव में तबादला किया गया था। आदेश में नाम गलत होने के कारण वह फिलहाल नई जगह पर कार्यभार ग्रहण नहीं कर पा रहा है।

राजस्थान में पटवारी की जगह BJP MLA का कर दिया तबादला; नाम देख अधिकारी भी चौंके

राजस्थान सरकार की ओर से जारी पटवारियों की तबादला सूची इस बार एक ऐसी गलती की वजह से चर्चा में आ गई है, जिसने पूरे राजस्व विभाग को असहज स्थिति में डाल दिया। ट्रांसफर लिस्ट में जिस पटवारी का तबादला होना था, उसकी जगह सीधे एक विधायक का नाम दर्ज हो गया। यह मामला सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर सरकारी दफ्तरों तक चर्चा का विषय बन गया। हालांकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह पूरी तरह टाइपिंग की गलती है, लेकिन इस एक चूक की वजह से संबंधित पटवारी फिलहाल नया कार्यभार भी ग्रहण नहीं कर पा रहे हैं।

ट्रांसफर होना था पटवारी का, सूची में पहुंच गए विधायक

राज्य सरकार ने शुक्रवार को पटवारियों की स्थानांतरण सूची जारी की थी। इस सूची में रिटायर्ड सैनिक एवं पटवारी नरेंद्र सिंह का तबादला बालोतरा जिले के नवोडा को बेरा पाटोदा से डीग जिले के सोनगांव किया जाना था। लेकिन आदेश तैयार करते समय उनके नाम की जगह डीग-कुम्हेर विधायक शैलेश सिंह का नाम दर्ज हो गया।

सरकारी आदेश में विधायक का नाम दिखाई देने के बाद पूरे राजस्व विभाग में हैरानी फैल गई। जिस कर्मचारी को नई जगह जॉइन करना था, वह अब संशोधित आदेश का इंतजार कर रहा है क्योंकि मौजूदा आदेश के आधार पर कार्यभार ग्रहण करना संभव नहीं है।

एक टाइपिंग एरर ने बढ़ाई मुश्किल

जानकारी के अनुसार यह गड़बड़ी आदेश तैयार करने के दौरान हुई टाइपिंग की गलती का परिणाम है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि दस्तावेज तैयार करते समय नाम बदल गया और अंतिम जांच में भी यह त्रुटि पकड़ में नहीं आ सकी। यही वजह रही कि विधायक का नाम आधिकारिक ट्रांसफर सूची में प्रकाशित हो गया।

अब इस गलती ने सरकारी दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारी संगठनों और विभागीय अधिकारियों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि इतनी महत्वपूर्ण सूची बिना पूरी तरह सत्यापन के कैसे जारी कर दी गई।

असली पटवारी नहीं कर पा रहा जॉइन

इस चूक का सबसे बड़ा असर उस पटवारी पर पड़ा है, जिसका वास्तव में तबादला किया गया था। आदेश में नाम गलत होने के कारण वह फिलहाल नई जगह पर कार्यभार ग्रहण नहीं कर पा रहा है। जब तक राजस्व विभाग संशोधित आदेश यानी कोरिजेंडम जारी नहीं करता, तब तक उनकी नियुक्ति प्रक्रिया अटकी रहेगी।

सूत्रों का कहना है कि विभाग ने गलती को गंभीरता से लिया है और जल्द ही संशोधित आदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।

विधायक के पीए ने भी माना- गलती से जुड़ गया नाम

इस पूरे मामले में विधायक शैलेश सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। हालांकि उनके निजी सहायक (पीए) रुपेश कंसल ने स्पष्ट किया कि विधायक का नाम गलती से तबादला सूची में दर्ज हो गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल तकनीकी त्रुटि है और इसका वास्तविक तबादले से कोई संबंध नहीं है।

जिम्मेदार अधिकारियों से नहीं हो सका संपर्क

मामले में राजस्व विभाग के रजिस्ट्रार महावीर प्रसाद और डिप्टी रजिस्ट्रार मोहनलाल से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों अधिकारियों ने फोन रिसीव नहीं किया। विभाग की ओर से भी फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

सरकारी तबादला आदेश केवल एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं होता, बल्कि कर्मचारियों की पोस्टिंग, जॉइनिंग और सेवा रिकॉर्ड का आधार भी होता है। ऐसे में नाम जैसी बुनियादी जानकारी में हुई चूक ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग यह भी पूछ रहे हैं कि यदि अंतिम स्तर पर दस्तावेज की ठीक से जांच होती, तो यह गलती आसानी से पकड़ी जा सकती थी।

फिलहाल सभी की नजरें राजस्व विभाग पर हैं। उम्मीद की जा रही है कि विभाग जल्द संशोधित आदेश जारी कर न केवल संबंधित पटवारी की जॉइनिंग का रास्ता साफ करेगा, बल्कि इस तरह की गलतियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी आवश्यक कदम उठाएगा। तब तक यह मामला सरकारी गलियारों में “पटवारी की जगह विधायक का तबादला” वाली अनोखी प्रशासनिक भूल के रूप में चर्चा का विषय बना रहेगा।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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