राजस्थान के पाली में ट्रिपल सुसाइड, बीमारी और डिप्रेशन से टूटा परिवार; मां-बेटों ने दी जान

Apr 10, 2026 03:32 pm ISTSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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राजस्थान के पाली जिले की एक पॉश कॉलोनी में सामूहिक सुसाइड की दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां एक ही परिवार के तीन सदस्यों—मां और दो बेटों—ने आत्महत्या कर ली। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परिवार लंबे समय से बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहा था। 

राजस्थान के पाली में ट्रिपल सुसाइड, बीमारी और डिप्रेशन से टूटा परिवार; मां-बेटों ने दी जान

राजस्थान के पाली जिले की एक पॉश कॉलोनी में सामूहिक सुसाइड की दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां एक ही परिवार के तीन सदस्यों—मां और दो बेटों—ने आत्महत्या कर ली। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परिवार लंबे समय से बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहा था। पुलिस को मौके से सुसाइड नोट और जहर की बोतल भी मिली है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

पॉश कॉलोनी में बंद घर से उठी बदबू, खुला राज

घटना 9 अप्रैल की शाम करीब 6 बजे की है, जब जोधपुर रोड स्थित आशापुरा टाउनशिप के एक मकान से बदबू आने पर पड़ोसियों को शक हुआ। घर दो दिन से बंद था। सूचना मिलने पर परिजन और पुलिस मौके पर पहुंचे। दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे तोड़कर पुलिस अंदर दाखिल हुई।

घर के अंदर का दृश्य बेहद विचलित करने वाला था। बड़े बेटे नरपत लाल (34) का शव पंखे से लटका मिला, जबकि मां शांति देवी (59) और छोटा बेटा रघुवीर (26) फर्श पर मृत अवस्था में पड़े थे। पुलिस ने तीनों शवों को बांगड़ अस्पताल की मॉर्च्यूरी में रखवाया।

मौसेरे भाई ने देखा सबसे पहले मंजर

मृतक नरपत के मौसेरे भाई लक्ष्मण सबसे पहले मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि 8 अप्रैल को ही उनकी नरपत से फोन पर बात हुई थी। नरपत ने शरीर पर घाव और मवाद होने की बात कही थी और अस्पताल ले जाने के लिए कहा था।

लक्ष्मण ने बताया कि उन्होंने उसी दिन शाम को कई बार कॉल किए, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। अगले दिन जब वह घर पहुंचे और दरवाजा खटखटाया, तो कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद वह पुलिस को साथ लेकर अंदर गए, जहां तीनों के शव मिले।

दोस्त से कहा था- कॉल मत करना, दरवाजा खटखटाना

नरपत के पड़ोसी और दोस्त सौरभ ने बताया कि 8 अप्रैल को उसकी मुलाकात नरपत से हुई थी। नरपत ने उसे भी अस्पताल ले चलने को कहा था। उसने शाम 7 बजे घर आने को कहा और यह भी कहा कि मोबाइल बंद रहेगा, इसलिए फोन न करके सीधे दरवाजा खटखटाना।

सौरभ ने बताया कि किसी काम के कारण वह उस दिन नहीं जा सका। अगले दिन जब घटना की जानकारी मिली, तो वह स्तब्ध रह गया।

बीमारी और बेरोजगारी ने तोड़ा हौसला

परिजनों के अनुसार, नरपत लाल एक ऑयल कंपनी में काम करता था, लेकिन शरीर में गंभीर घाव और मवाद की समस्या के चलते करीब 8 महीने पहले उसने नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद वह घर पर ही रहने लगा था।

परिवार में मां शांति देवी भी बीमार रहती थीं, जबकि छोटा बेटा रघुवीर एक मोबाइल शॉप पर काम करता था। दोनों भाइयों की शादी भी नहीं हुई थी। आर्थिक और मानसिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था।

पिता की मौत के बाद बढ़ी मुश्किलें

करीब दो साल पहले परिवार के मुखिया मांगीलाल की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। बताया गया कि उन्हें नहाते समय बाथरूम में अटैक आया था। इसके बाद से परिवार पूरी तरह टूट गया था।

पिता की मौत के बाद तीनों सदस्य ही घर में रह रहे थे और धीरे-धीरे हालात बिगड़ते चले गए।

सुसाइड नोट में डिप्रेशन का जिक्र

पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें बीमारी और डिप्रेशन के चलते यह कदम उठाने की बात लिखी गई है। इसके अलावा दो मोबाइल फोन और जहर की बोतल भी बरामद हुई है।

औद्योगिक नगर थाना प्रभारी निरमा बिश्नोई के अनुसार, दो शवों के पास जहर की बोतल मिली है, जिससे आशंका है कि मां और छोटे बेटे ने जहर खाया, जबकि बड़े बेटे ने फांसी लगाई।

पुलिस हर एंगल से कर रही जांच

डीएसपी सिटी मदन सिंह ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। फिलहाल इसे सुसाइड का मामला माना जा रहा है, लेकिन अन्य संभावनाओं को भी खंगाला जा रहा है।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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