क्या राजस्थान में शादियों की धूम में BJP की पचपदरा रैली की चमक पड़ जाएगी फीकी? कैसे होगा क्राउड मैनेजमेंट
राजस्थान की सियासत इन दिनों एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है, जहां एक तरफ रिश्तों की रस्में हैं, तो दूसरी ओर राजनीति की परीक्षा। 21 अप्रैल को पचपदरा में प्रस्तावित रिफाइनरी उद्घाटन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा भाजपा के लिए मेगा शो साबित होने जा रही है

राजस्थान की सियासत इन दिनों एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है, जहां एक तरफ रिश्तों की रस्में हैं, तो दूसरी ओर राजनीति की परीक्षा। 21 अप्रैल को पचपदरा में प्रस्तावित रिफाइनरी उद्घाटन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा भाजपा के लिए मेगा शो साबित होने जा रही है, लेकिन इस शो पर ‘शादियों का ग्रहण’ लगता नजर आ रहा है।
दरअसल, पार्टी ने इस आयोजन के लिए 2 लाख लोगों की भीड़ जुटाने का टारगेट सेट किया है। लेकिन यही तारीख ऐसे समय पर आ गई है जब प्रदेशभर में शादियों का पीक सीजन चल रहा है। नतीजा जनसभा के लिए भीड़ जुटाना अब संगठन के लिए ‘टफ टेस्ट’ बन गया है।
जब बारात और रैली आमने-सामने
राजस्थान में 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया का अबूझ सावा है, जिसे शादी-विवाह के लिए सबसे शुभ मुहूर्त माना जाता है। इसके बाद 20 और 21 अप्रैल को भी बड़ी संख्या में शादियां तय हैं। गांव-गांव से लेकर शहरों तक बैंड-बाजे की गूंज है, मैरिज गार्डन फुल हैं और हर घर में रिश्तेदारी निभाने की तैयारियां चल रही हैं।
ऐसे में आमजन के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है करीबी की शादी में जाएं या प्रधानमंत्री की रैली में शामिल हों?
जवाब भी लगभग साफ है ज्यादातर लोग रिश्तों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बसों की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा
भीड़ जुटाने में सबसे बड़ी अड़चन इस समय वाहनों की किल्लत बन गई है। शादी सीजन के चलते बसें, जीप, टैक्सी और छोटे वाहन पहले से ही बुक हैं। कई बस मालिकों ने महीनों पहले एडवांस ले रखा है।
नतीजा यह कि भाजपा कार्यकर्ताओं के सामने लोगों को रैली स्थल तक लाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। कई जगहों पर बसों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है, तो कहीं वैकल्पिक साधनों की तलाश जारी है।
15 जिलों को जिम्मेदारी, बाड़मेर पर सबसे बड़ा दबाव
इस मेगा इवेंट को सफल बनाने के लिए भाजपा संगठन ने 15 जिलों को जिम्मेदारी सौंपी है। जोधपुर, जैसलमेर, पाली, जालोर और बाड़मेर जैसे आसपास के जिलों को खास तौर पर अलर्ट किया गया है।
इनमें भी बाड़मेर जिले की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है, जहां से करीब 50 हजार लोगों को लाने का लक्ष्य रखा गया है। शिव, चौहटन और बायतु इलाकों में विशेष फोकस किया जा रहा है ताकि बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
संगठन पूरी ताकत झोंकने में जुटा
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के नेतृत्व में मंत्रियों, विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों को बूथ स्तर तक सक्रिय किया गया है। मंत्री जोगाराम कुमावत, केके विश्नोई, विधायक अरुण चौधरी, हमीर सिंह भायल और सांसद लुंबाराम चौधरी सहित कई नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है।
करीब 200 से अधिक पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष और सोशल मीडिया टीम इस आयोजन को सफल बनाने के लिए मैदान में उतर चुके हैं।
धार्मिक मुहूर्त और राजनीतिक इवेंट का टकराव
21 अप्रैल को बैशाख शुक्ल पंचमी का शुभ मुहूर्त है, जिसे रिफाइनरी उद्घाटन के लिए चुना गया है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन बेहद खास माना जाता है, लेकिन यही तारीख शादी सीजन के पीक से टकरा रही है।
यानी एक तरफ शुभ कामों का उत्सव है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन और दोनों के बीच फंसा आम आदमी।
‘भीड़ का गणित’ या ‘रिश्तों की जीत’?
अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा संगठन 2 लाख की भीड़ का लक्ष्य हासिल कर पाता है या नहीं। फिलहाल हालात यही इशारा कर रहे हैं कि इस बार पचपदरा की रैली में सिर्फ राजनीतिक मैनेजमेंट ही नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरण भी बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं।
क्योंकि राजस्थान में एक बात हमेशा भारी पड़ती है पहले रिश्ते, फिर राजनीति।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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