
राजस्थान: अफसरों को कौन सा बुखार? बाड़मेर कैम्प में सचिव का फूटा ग़ुस्सा; IAS टीना डाबी ने मौके पर संभाला मोर्चा
राजस्थान के बाड़मेर जिले में उस वक्त प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई, जब एक सरकारी कैंप के दौरान सचिव की जुबान से निकला तीखा सवाल “अफसरों को आखिर कौन सा बुखार चढ़ा है?”। यह टिप्पणी किसी सामान्य नाराज़गी का इज़हार नहीं थी
राजस्थान के बाड़मेर जिले में उस वक्त प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई, जब एक सरकारी कैंप के दौरान सचिव की जुबान से निकला तीखा सवाल “अफसरों को आखिर कौन सा बुखार चढ़ा है?”। यह टिप्पणी किसी सामान्य नाराज़गी का इज़हार नहीं थी, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सीधा हमला थी। इसी बीच भाजपा नेता ने भ्रष्टाचार को लेकर ऐसा आरोप लगाया कि पूरा प्रशासन कटघरे में खड़ा नजर आने लगा।
मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अचानक कलेक्टर आईएएस टीना डाबी की सरप्राइज एंट्री ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। सवाल यह है कि क्या इस अप्रत्याशित दौरे से व्यवस्था की पोल खुल गई, या फिर टीना डाबी ने समय रहते मोर्चा संभाल लिया?
जानकारी के अनुसार, जिले में चल रहे एक प्रशासनिक कैंप में योजनाओं के क्रियान्वयन और लंबित शिकायतों की समीक्षा हो रही थी। इसी दौरान सचिव ने खुले मंच से अफसरों की कार्यशैली पर नाराज़गी जाहिर की। उनका कहना था कि ज़मीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं, लेकिन रिपोर्टों में सब कुछ “ऑल इज़ वेल” दिखाया जा रहा है।
सचिव के शब्दों में,
“जनता परेशान है, काम अटके पड़े हैं, और अफसर फाइलों में व्यस्त हैं। आखिर ये ढिलाई क्यों?”
यह टिप्पणी प्रशासनिक अमले के लिए असहज करने वाली थी और यहीं से माहौल गरमाने लगा।
इसी बीच कैंप में मौजूद भाजपा नेता ने प्रशासन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा दिए। उन्होंने दावा किया कि कुछ विभागों में बिना “लेन-देन” के काम आगे नहीं बढ़ता। योजनाओं में कमीशनखोरी और चयनित लोगों को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाते हुए उन्होंने सीधे जिला प्रशासन से जवाब मांगा।
भाजपा नेता के आरोपों ने मामले को सियासी रंग दे दिया। विपक्षी खेमे में हलचल मच गई, वहीं प्रशासनिक अधिकारी बचाव की मुद्रा में नजर आए।
जब माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो चुका था, तभी बाड़मेर कलेक्टर आईएएस टीना डाबी अचानक कैंप में पहुंचीं। उनके पहुंचते ही अफसरों में खामोशी छा गई। टीना डाबी ने बिना भूमिका बांधे सीधे फीडबैक लेना शुरू किया—कर्मचारियों से लेकर आम लोगों तक की शिकायतें सुनीं।
सूत्रों के मुताबिक, कलेक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि लापरवाही और भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने मौके पर ही कुछ मामलों की जांच के निर्देश दिए और लंबित कार्यों की समय-सीमा तय की।
टीना डाबी की इस सक्रियता को उनके समर्थक “सिस्टम पर पकड़” बता रहे हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि अगर हालात इतने बिगड़े थे, तो पहले निगरानी क्यों नहीं हुई?
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने बाड़मेर प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सचिव की फटकार, भाजपा नेता के आरोप और कलेक्टर की अचानक मौजूदगी—इन तीनों ने मिलकर यह साफ कर दिया है कि ज़िले में सब कुछ सामान्य नहीं है।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या जांच और कार्रवाई सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहेगी, या वाकई सिस्टम में सुधार की शुरुआत होगी? बाड़मेर की जनता जवाब चाहती है, और प्रशासन के लिए यह अग्निपरीक्षा से कम नहीं।

लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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