न्याय नहीं तो अस्थियां गटर में बहा देना,वीडियो बनाकर राजस्थान में सुसाइड

Sachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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राजस्थान के पाली शहर में गुरुवार रात एक नर्सिंग ऑफिसर द्वारा जहर खाकर आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। मृतक ने सुसाइड से पहले दो वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए, जिनमें एक महिला को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया। घटना कोतवाली थाना क्षेत्र की है। 

न्याय नहीं तो अस्थियां गटर में बहा देना,वीडियो बनाकर राजस्थान में सुसाइड

राजस्थान के पाली शहर में गुरुवार रात एक नर्सिंग ऑफिसर द्वारा जहर खाकर आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। मृतक ने सुसाइड से पहले दो वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए, जिनमें एक महिला को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया। घटना कोतवाली थाना क्षेत्र की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मृतक की पहचान केशव नगर निवासी कैलाश नागौरा (36) के रूप में हुई है, जो Mathura Das Mathur Hospital (एमडीएम हॉस्पिटल), Jodhpur में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे।

जहर खाने के बाद महिला को किया वीडियो कॉल

जानकारी के अनुसार गुरुवार रात करीब 8 बजे कैलाश ने अपने घर में जहर खा लिया। जहर सेवन करने के तुरंत बाद उन्होंने एक महिला को वीडियो कॉल किया। वही महिला उन्हें पाली के Bangur Hospital के ट्रॉमा वार्ड लेकर पहुंची। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत गंभीर होने पर उन्हें जोधपुर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

पुलिस के मुताबिक, शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है। मामले में सुसाइड नोट की जगह सोशल मीडिया पर साझा वीडियो को अहम साक्ष्य माना जा रहा है।

वीडियो में लगाए गंभीर आरोप

सुसाइड से पहले बनाए गए वीडियो में कैलाश ने कहा कि वह अपनी जीवन लीला समाप्त कर रहे हैं और इसके लिए एक महिला को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला उन्हें ब्लैकमेल कर रही थी और झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रही थी।

वीडियो में उन्होंने दावा किया कि महिला और उसकी कुछ सहेलियां लड़कों को फंसाकर पैसे ऐंठती हैं। कैलाश के अनुसार, महिला ने उनसे लाखों रुपये लिए। उन्होंने कहा कि मकान निर्माण के दौरान तीन लाख रुपये दिए थे और कुल मिलाकर करीब 40 लाख रुपये की आर्थिक हानि हुई।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिला ने उनके कार्यस्थल पर जाकर उन्हें बदनाम किया और स्टाफ के बीच गलत बातें फैलाईं। इससे वे मानसिक रूप से टूट गए थे। वीडियो में उन्होंने कहा कि समाज ने उन्हें गलत ठहराया और सवाल उठाया कि क्या हर मामले में केवल पुरुष ही दोषी माना जाता है।

पत्नी-बच्चों से अलगाव और सामाजिक दबाव

वीडियो में कैलाश ने बताया कि उनकी पत्नी और बच्चे मायके में रह रहे हैं। उनका कहना था कि महिला उन्हें परिवार से मिलने नहीं देती थी और लगातार दबाव बना रही थी। उन्होंने अपनी दादी की मृत्यु के समय भी सामाजिक कार्यक्रम में शामिल न हो पाने का जिक्र किया।

कैलाश ने यह भी कहा कि यदि जांच निष्पक्ष नहीं हुई तो भविष्य में भी कई युवक झूठे मामलों में फंसते रहेंगे। उन्होंने आरोपी महिला के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

पुलिस जांच में जुटी

कोतवाली थाना पुलिस ने बताया कि पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जा रही है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और दोनों पक्षों के संबंधों की भी जांच होगी।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामला आत्महत्या का है, लेकिन यदि जांच में ब्लैकमेलिंग या उकसाने के साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।

संवेदनशील मामला, निष्पक्ष जांच की मांग

यह घटना न केवल एक व्यक्ति की दुखद मृत्यु है, बल्कि सामाजिक और कानूनी पहलुओं को भी सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।

पाली में इस घटना के बाद मेडिकल स्टाफ और स्थानीय लोगों में शोक का माहौल है। परिजन और समाज के लोग मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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