हार के डर से टाले जा रहे चुनाव,निकाय चुनाव पर सचिन पायलट ने कसा तंज
राजस्थान की राजनीति में निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Sachin Pilot ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है

राजस्थान की राजनीति में निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Sachin Pilot ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार जानबूझकर स्थानीय निकाय चुनाव टालने की कोशिश कर रही है। पायलट ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे जनता के अधिकारों का हनन हो रहा है।
जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए पायलट ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों और तय समयसीमा के बावजूद राज्य सरकार चुनाव कराने को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार अड़चनें पैदा कर चुनाव को टालने का प्रयास कर रही है, जिससे स्पष्ट होता है कि वह जनता के बीच जाने से बच रही है।
“सरकार हार के डर से चुनाव टाल रही है” – पायलट
पायलट ने कहा कि गांव, वार्ड, नगर निकाय, जिला परिषद और पंचायत स्तर तक जनता अपने प्रतिनिधि चाहती है, लेकिन पिछले लंबे समय से चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर पांच साल में चुनाव कराना संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन राजस्थान में इस पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को अपनी संभावित हार का डर सता रहा है। उनके अनुसार, यदि निकाय चुनाव समय पर कराए जाते हैं तो जनता का आक्रोश सामने आ सकता है, इसलिए सरकार चुनाव प्रक्रिया को टालने की रणनीति अपना रही है।
प्रशासनिक व्यवस्था और कानून व्यवस्था पर भी सवाल
निकाय चुनावों के मुद्दे के साथ-साथ पायलट ने राज्य की प्रशासनिक और कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों के अभाव में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और मनरेगा जैसे कार्यक्रम भी ठप स्थिति में हैं। पायलट ने आरोप लगाया कि अधिकारी जवाबदेही से बच रहे हैं और जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक अस्थिरता और चुनावों की देरी का सीधा असर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर पड़ता है, जिससे आम जनता परेशान होती है।
“संविधान की मूल भावना का हो रहा उल्लंघन”
Sachin Pilot ने इस मौके पर संविधान और डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान की मूल भावना को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती तभी संभव है जब समय पर चुनाव कराए जाएं और जनता को अपना प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिले।
उन्होंने कहा कि संविधान को केवल सम्मान देने से नहीं, बल्कि उसके प्रावधानों का पालन करने से ही सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है।
महिला आरक्षण और राजनीतिक प्रक्रिया पर टिप्पणी
पायलट ने महिला आरक्षण मुद्दे पर भी अपनी बात रखी और कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण के पक्ष में रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून को लागू करने से पहले उसकी प्रक्रिया और आंकड़ों की पारदर्शिता जरूरी है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज, चुनावी माहौल गर्म
निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस लगातार यह मुद्दा उठा रही है कि स्थानीय चुनावों में देरी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, जबकि सरकार की ओर से इस पर अभी तक कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे निकाय चुनावों का मुद्दा आगे बढ़ेगा, राज्य की राजनीति में यह एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों में सत्ता संतुलन का सीधा असर आगामी विधानसभा समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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