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राजस्थान के नागौर में दो भाइयों ने भरा 1 करोड़ 61 लाख का मायरा; साल का पहला सबसे बड़ा मायरा

राजस्थान के नागौर में दो भाइयों ने भरा 1 करोड़ 61 लाख का मायरा; साल का पहला सबसे बड़ा मायरा

संक्षेप:

राजस्थान के नागौर जिले में मायरा परंपरा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। इस बार जायल कस्बे में भाई-बहन के प्रेम और पारिवारिक परंपराओं की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने पूरे क्षेत्र का ध्यान खींच लिया। 

Feb 10, 2026 06:46 pm ISTSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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राजस्थान के नागौर जिले में मायरा परंपरा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। इस बार जायल कस्बे में भाई-बहन के प्रेम और पारिवारिक परंपराओं की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने पूरे क्षेत्र का ध्यान खींच लिया। जायल निवासी दो भाइयों ने अपनी बहन के बेटे की शादी में 1 करोड़ 61 लाख रुपये का मायरा भरकर न केवल सामाजिक परंपराओं को भव्य रूप से निभाया, बल्कि इसे इस वर्ष का सबसे बड़ा मायरा भी बताया जा रहा है।

जायल में निभाई गई मायरा परंपरा, बना चर्चा का विषय

नागौर जिला पहले भी बड़े मायरों को लेकर सुर्खियों में रहा है और एक बार फिर इसी परंपरा ने क्षेत्र को चर्चा में ला दिया। जायल कस्बे में आयोजित इस मायरा रस्म में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भाई-बहन के अटूट प्रेम की झलक साफ नजर आई। मायरा भरने वाले दोनों भाई ललित कुमार व्यास और ओमप्रकाश व्यास हैं, जिन्होंने अपनी बहन गायत्री देवी के पुत्र नीलेश की शादी के अवसर पर यह भव्य मायरा भरा।

1 करोड़ 61 लाख का मायरा, नकद और आभूषण शामिल

मायरे की कुल राशि 1 करोड़ 61 लाख रुपये बताई जा रही है। इसमें 81 लाख रुपये नकद, 25 तोला सोना और चांदी के आभूषण शामिल हैं। इतनी बड़ी राशि और बहुमूल्य भेंट को देखकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी हैरान रह गए। सामाजिक कार्यक्रमों में आमतौर पर देखे जाने वाले मायरों की तुलना में यह मायरा असाधारण माना जा रहा है, जिसे लोग पूरे वर्ष का सबसे बड़ा मायरा बता रहे हैं।

माहेश्वरी भवन में पारंपरिक विधि-विधान से संपन्न हुआ कार्यक्रम

मायरा की रस्म जायल स्थित माहेश्वरी भवन में पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक परंपराओं और रीति-रिवाजों का पूरी निष्ठा से पालन किया गया। आयोजन में समाज के कई गणमान्य लोग, रिश्तेदार, परिचित और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम में उत्साह, उल्लास और भावनात्मक माहौल देखने को मिला।

पिता की मौजूदगी में निभाई गई रस्म

परिवार के मुखिया श्यामसुंदर व्यास की मौजूदगी में दोनों भाइयों ने अपनी बहन गायत्री देवी को चुनड़ी ओढ़ाकर मायरा की रस्म पूरी की। यह क्षण न केवल भावुक था, बल्कि भाई-बहन के मजबूत रिश्ते और पारिवारिक एकजुटता का प्रतीक भी बना। उपस्थित लोगों ने इस दृश्य को पारिवारिक संस्कारों और परंपराओं का जीवंत उदाहरण बताया।

पिछले साल भी नागौर में चर्चा में रहा था रिकॉर्ड मायरा

गौरतलब है कि इससे पहले पिछले साल नागौर जिले के झाड़ेली गांव में पोटलिया परिवार द्वारा भरा गया 21 करोड़ 11 लाख रुपये का मायरा प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना था। उसी कड़ी में इस बार जायल का यह मायरा भी सामाजिक और सांस्कृतिक चर्चाओं में शामिल हो गया है। हालांकि राशि के लिहाज से यह पिछले रिकॉर्ड से छोटा है, लेकिन वर्ष 2026 का यह पहला और सबसे बड़ा मायरा माना जा रहा है।

समाज में गया सकारात्मक संदेश

इतनी बड़ी राशि का मायरा भरने की घटना केवल ब्राह्मण समाज ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे भाई-बहन के प्रेम, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक परंपराओं के सम्मान का उदाहरण बता रहे हैं। आयोजन से समाज में यह संदेश भी गया कि आधुनिक दौर में भी पारंपरिक रिश्तों और संस्कारों की अहमियत बरकरार है।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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