राजस्थान में इस बार कमजोर पड़ेगा मानसून: पूर्वी जिलों में कम बारिश, सिर्फ 4 जिलों में राहत
राजस्थान में इस साल मानसून के कमजोर रहने का अनुमान जताया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र नई दिल्ली द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार राज्य में कुल मिलाकर बारिश सामान्य से थोड़ी कम रह सकती है।

राजस्थान में इस साल मानसून के कमजोर रहने का अनुमान जताया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र नई दिल्ली द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार राज्य में कुल मिलाकर बारिश सामान्य से थोड़ी कम रह सकती है। खासतौर पर पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में वर्षा में कमी देखने को मिल सकती है, जबकि पश्चिमी राजस्थान में स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित रहने की संभावना है।
पश्चिमी राजस्थान में सामान्य बारिश की उम्मीद
मौसम विभाग के फोरकास्ट के मुताबिक पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर संभाग—जिसमें जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं—में इस बार मानसून सामान्य के आसपास रह सकता है। इन जिलों में जून से सितंबर तक औसतन 283.6 मिमी बारिश होती है।
गौरतलब है कि पिछले साल 2025 में इस क्षेत्र में सामान्य से काफी अधिक बारिश दर्ज की गई थी। आंकड़ों के अनुसार यहां 481.2 मिमी वर्षा हुई थी, जो सामान्य से करीब 70 प्रतिशत ज्यादा थी। ऐसे में इस साल का पूर्वानुमान पिछले साल की तुलना में कम सक्रिय मानसून की ओर संकेत करता है।
पूर्वी राजस्थान में कम बारिश के संकेत
वहीं, पश्चिमी हिस्से को छोड़कर राज्य के बाकी पूर्वी जिलों—कोटा, उदयपुर, जयपुर, भरतपुर और अजमेर संभाग—में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई गई है। इन क्षेत्रों में मानसून सीजन के दौरान औसत वर्षा 626.6 मिमी होती है।
पिछले वर्ष 2025 में पूर्वी राजस्थान में मानसून काफी सक्रिय रहा था और यहां 1010.5 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जो सामान्य से लगभग 61 प्रतिशत अधिक थी। इस बार के पूर्वानुमान में इस ट्रेंड के उलट स्थिति दिखाई दे रही है।
केवल कुछ जिलों में बेहतर बारिश के आसार
विशेषज्ञों के मुताबिक राज्य के केवल 4 जिलों में ही सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है, जबकि अधिकांश जिलों में बारिश औसत से कम रह सकती है। हालांकि इन जिलों के नामों को लेकर विस्तृत जानकारी अलग-अलग अपडेट में स्पष्ट की जाएगी।
कमजोर मानसून के पीछे ये हैं प्रमुख कारण
मौसम वैज्ञानिकों ने मानसून के कमजोर रहने के पीछे वैश्विक जलवायु कारकों को प्रमुख वजह बताया है। इस साल जून से सितंबर के बीच मध्य प्रशांत महासागर में अलनीनो की स्थिति तटस्थ (न्यूट्रल) रहने का अनुमान है। आमतौर पर अलनीनो की सक्रिय स्थिति भारतीय मानसून को प्रभावित करती है, लेकिन न्यूट्रल स्थिति में भी मानसून की तीव्रता सीमित रह सकती है।
इसके साथ ही हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति भी न्यूट्रल रहने का अनुमान है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब IOD पॉजिटिव अवस्था में होता है, तब यह दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाता है।
IOD का असर क्यों है अहम
पॉजिटिव IOD की स्थिति में हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से का तापमान बढ़ जाता है, जिससे वाष्पीकरण की प्रक्रिया तेज होती है। इसका सीधा असर मानसूनी हवाओं पर पड़ता है और बारिश की संभावना बढ़ जाती है।
हालांकि इस साल IOD के पॉजिटिव फेज में आने की संभावना सितंबर के बाद जताई गई है, जब मानसून अपने अंतिम चरण में होता है। ऐसे में पूरे सीजन के दौरान इसका सकारात्मक प्रभाव सीमित रहने की आशंका है।
कृषि और जल प्रबंधन पर पड़ सकता है असर
मानसून के कमजोर रहने के अनुमान से राज्य में कृषि और जल संसाधनों पर असर पड़ सकता है। विशेष रूप से पूर्वी राजस्थान, जहां खेती बड़े पैमाने पर मानसून पर निर्भर है, वहां किसानों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम के पूर्वानुमानों को ध्यान में रखते हुए फसल योजना बनाएं और जल संरक्षण के उपायों पर जोर दें।
कुल मिलाकर, इस साल राजस्थान में मानसून की चाल सामान्य से धीमी रह सकती है, जिससे राज्य के कई हिस्सों में बारिश की कमी देखने को मिल सकती है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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