मंत्री ने पटके कागज, कलेक्टर को सुनाई खरी-खरी; जूली बोले यही है राजस्थान का असली हाल, बाकी सब चंगा है जी

Dec 24, 2025 05:30 pm ISTSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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राजस्थान की राजनीति में इन दिनों पारा सिर्फ मौसम का नहीं, बल्कि सत्ता और ब्यूरोक्रेसी के बीच छिड़ी 'जंग' का भी चढ़ा हुआ है। मंगलवार को सीकर में जो कुछ हुआ, उसने न केवल प्रशासनिक अनुशासन की पोल खोल दी

मंत्री ने पटके कागज, कलेक्टर को सुनाई खरी-खरी; जूली बोले यही है राजस्थान का असली हाल, बाकी सब चंगा है जी

राजस्थान की राजनीति में इन दिनों पारा सिर्फ मौसम का नहीं, बल्कि सत्ता और ब्यूरोक्रेसी के बीच छिड़ी 'जंग' का भी चढ़ा हुआ है। मंगलवार को सीकर में जो कुछ हुआ, उसने न केवल प्रशासनिक अनुशासन की पोल खोल दी, बल्कि विपक्ष को बैठे-बिठाए सरकार को घेरने का सुनहरा मौका दे दिया। प्रभारी मंत्री संजय शर्मा की नाराजगी और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के तंज ने प्रदेश की सियासत में 'मिर्च-मसाला' लगा दिया है।

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किस्सा शुरू हुआ सीकर के शहरी सेवा शिविर से, जहाँ प्रभारी मंत्री संजय शर्मा 'अचानक' धावे पर पहुंचे थे। मंत्री जी को उम्मीद थी कि कर्मचारी जनता की सेवा में पसीना बहा रहे होंगे, लेकिन वहां तो नजारा ही जुदा था। कुर्सियां खाली थीं, और साहब लोग नदारद। जब मंत्री ने हिसाब मांगा, तो अधिकारी मोबाइल दिखाने लगे।

मंत्री संजय शर्मा का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने दहाड़ते हुए कहा "मजाक समझ रखा है क्या? मैं प्रदेश का मंत्री हूं, प्रिंट आउट लेकर आओ!" माहौल तब और गर्मा गया जब जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा अपने मातहतों के बचाव में उतरे। मंत्री ने दो टूक कह दिया"कलेक्टर साहब, इन चोरों को प्रोटेक्शन देने की जरूरत नहीं है। अब आप ही अपनी मर्जी से जिला चलाओ, मैं तो जयपुर जा रहा हूं।" कागज मेजों पर पटके गए और मंत्री जी तमतमाते हुए बाहर निकल गए।

सीकर की इस 'तू-तू मैं-मैं' की गूंज अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस आग में घी डालने का काम कर दिया। जूली ने इस पूरे घटनाक्रम पर चुटकी लेते हुए सरकार की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया।

जूली ने तंज कसते हुए कहा अफ़सर सुन नहीं रहे, मंत्री जी गुस्से में आ रहे हैं। काग़ज़ मेज़ों पर उड़ रहे हैं और हालात खुद अपनी कहानी कह रहे हैं। राजस्थान में आज यही आलम है—मंत्रियों की अपनी ही ब्यूरोक्रेसी में कोई पूछ नहीं है। जनता परेशान है, मंत्री नाराज हैं और अफ़सर बेपरवाह। लेकिन अगर आप सरकार से पूछेंगे, तो वो कहेंगे सब चंगा है जी!'"

शिविर में केवल मंत्री और कलेक्टर के बीच ही बहस नहीं हुई, बल्कि एक आम महिला अन्नू देवी ने भी प्रशासन की कलई खोल दी। महिला एक महीने से अवैध निर्माण की शिकायत लेकर भटक रही थी। मंत्री ने कलेक्टर को महिला की ओर इशारा करते हुए कहा “लो देख लो, यह है आपकी व्यवस्था। अब इसकी एप्लिकेशन मैं जयपुर ले जा रहा हूं, वहीं सुनवाई होगी।”

मंत्री के जाने के बाद यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा मौके पर पहुंचे और डैमेज कंट्रोल की कोशिश की, लेकिन तब तक तीर कमान से निकल चुका था।

सीकर की इस घटना ने राजस्थान की 'डबल इंजन' सरकार के भीतर के सामंजस्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। एक तरफ मंत्री भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ कलेक्टर साहब अपने कर्मचारियों की ढाल बन रहे हैं। टीकाराम जूली का यह बयान कि 'अफ़सर सुन नहीं रहे', अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर आक्रामक है। जूली का 'सब चंगा है जी' वाला कटाक्ष सीधे तौर पर सरकार के उन दावों पर हमला है जहाँ सब कुछ ठीक होने की बात कही जाती है।

मंत्री संजय शर्मा अब इस मामले की रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंपने की तैयारी में हैं। इधर, जूली के बयान ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया है। क्या इस विवाद के बाद सीकर प्रशासन पर गाज गिरेगी? या फिर जूली का यह तंज अफ़सर सुन नहीं रहे' आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति का नया नारा बनेगा?

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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