राजस्थान में DMD से जंग लड़ रहे 15 वर्षीय गर्वित बने एक दिन के कलेक्टर, संभाली जिले की कमान
राजस्थान के डीडवाना जिला मुख्यालय में गुरुवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी को भावुक भी किया और प्रेरित भी। लाडनूं क्षेत्र के ग्राम रोडू निवासी 15 वर्षीय गर्वित रेवाड़ को एक दिन के लिए जिला कलेक्टर बनाया गया।

राजस्थान के डीडवाना जिला मुख्यालय में गुरुवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी को भावुक भी किया और प्रेरित भी। लाडनूं क्षेत्र के ग्राम रोडू निवासी 15 वर्षीय गर्वित रेवाड़ को एक दिन के लिए जिला कलेक्टर बनाया गया। गर्वित ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कलेक्टर की कुर्सी संभाली, अधिकारियों की बैठक ली और प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं।
राजकीय सम्मान के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचा ‘एक दिन का कलेक्टर’
इस विशेष पहल की शुरुआत पूरे सरकारी प्रोटोकॉल के साथ हुई। गर्वित रेवाड़ को राजकीय वाहन से कलेक्ट्रेट लाया गया। कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचने पर जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने स्वयं आगे बढ़कर उनका स्वागत किया और गुलदस्ता भेंट कर सम्मानित किया। इसके बाद गर्वित को कलेक्टर के मुख्य चेंबर में ले जाया गया, जहां उन्होंने कलेक्टर की कुर्सी संभाली।
अधिकारियों की बैठक लेकर दिए जनहित के निर्देश
कलेक्टर की जिम्मेदारी संभालने के बाद गर्वित ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आमजन की शिकायतों और समस्याओं का समयबद्ध और प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाना चाहिए। उनकी बातों में प्रशासनिक समझ और परिपक्वता साफ दिखाई दी।
अवकाश की घोषणा पर गूंज उठी तालियां
बैठक के दौरान गर्वित ने एक दिन के राजकीय अवकाश की घोषणा भी कर दी। यह सुनते ही बैठक कक्ष में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने मेज थपथपाकर तथा तालियां बजाकर अपनी खुशी जाहिर की। इस दौरान कई स्थानीय नागरिक भी उनसे मिलने पहुंचे और अपनी समस्याओं से जुड़े ज्ञापन सौंपे। कुछ लोगों ने विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए उन्हें आमंत्रित भी किया।
डीएमडी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है गर्वित
24 अगस्त 2010 को जन्मे गर्वित रेवाड़ की जिंदगी संघर्ष और साहस की मिसाल है। वह ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (DMD) नामक गंभीर और लाइलाज जेनेटिक बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी के कारण उनके शरीर के अधिकांश अंग काम नहीं करते, जबकि हाथों की हथेलियां और मस्तिष्क सामान्य रूप से कार्य करते हैं। चिकित्सकों के अनुसार इस बीमारी से पीड़ित बच्चों की औसत आयु सामान्यतः 18 से 20 वर्ष तक ही होती है।
सामान्य बचपन के बाद बदली जिंदगी
परिजनों के अनुसार गर्वित शुरुआती सात से आठ वर्षों तक अन्य बच्चों की तरह सामान्य जीवन जीता था। वह खेलता-कूदता और पढ़ाई करता था, लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे बीमारी के लक्षण सामने आने लगे। समय के साथ शारीरिक क्षमता प्रभावित होती चली गई, लेकिन उसके हौसले कभी कमजोर नहीं पड़े।
शारीरिक अक्षमता के बावजूद 10वीं में हासिल किए 82.83 प्रतिशत अंक
गर्वित की सबसे बड़ी ताकत उसका तेज दिमाग है। वर्ष 2026 के माध्यमिक शिक्षा बोर्ड परीक्षा परिणाम में उसने 82.83 प्रतिशत अंक हासिल कर सभी को प्रभावित किया। शारीरिक रूप से लिखने में असमर्थ होने के कारण वह परीक्षा में उत्तर बोलता था, जबकि उसकी जगह 9वीं कक्षा के एक छात्र ने उत्तर पुस्तिका में जवाब लिखे।
पिता से मिली प्रशासनिक सेवा में जाने की प्रेरणा
गर्वित के पिता सरकारी शिक्षक हैं और वर्तमान में आरएएस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। गर्वित का कहना है कि घर में हमेशा शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं का माहौल रहा है। पिता को मेहनत करते देखकर ही उसके मन में देश सेवा और आईएएस बनने का सपना पैदा हुआ।
‘मुश्किलें कितनी भी हों, हार नहीं माननी चाहिए’
गर्वित ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में कितनी भी बड़ी परेशानी क्यों न आए, कभी हार नहीं माननी चाहिए। पढ़ाई और अपने लक्ष्य के लिए पूरी निष्ठा और मेहनत से काम करना चाहिए। सच्ची लगन से की गई मेहनत का फल देर-सवेर सफलता के रूप में जरूर मिलता है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बना गर्वित: कलेक्टर अवधेश मीणा
जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने बताया कि कुछ दिन पहले गर्वित के माता-पिता उनसे मिले थे और बच्चे की इच्छा साझा की थी। उन्होंने कहा कि डीएमडी जैसी गंभीर बीमारी के बावजूद 10वीं बोर्ड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना पूरे जिले के लिए गर्व की बात है। इसी उपलब्धि और उसके जज्बे को सम्मान देने के लिए उसे एक दिन का कलेक्टर बनाया गया।
संघर्ष से सफलता तक की मिसाल
डीडवाना कलेक्ट्रेट में बीता यह एक दिन केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि मजबूत इरादों के सामने परिस्थितियां छोटी पड़ जाती हैं। व्हीलचेयर पर बैठा यह किशोर आज हजारों युवाओं के लिए उम्मीद, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक बन गया है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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