काम की बात : सरस डेयरी से जुड़कर आत्मनिर्भर बनेंगी राजस्थान की महिलाएं, लखपति दीदी योजना में बड़ा बदलाव
राजस्थान की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भजनलाल सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ‘लखपति दीदी’ योजना का दायरा बढ़ाते हुए महिलाओं के लिए ऋण सीमा 1.5 लाख रुपये तक कर दी है

राजस्थान की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भजनलाल सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ‘लखपति दीदी’ योजना का दायरा बढ़ाते हुए महिलाओं के लिए ऋण सीमा 1.5 लाख रुपये तक कर दी है, वहीं ब्याज दर घटाकर मात्र 1.5 प्रतिशत कर दी गई है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य गांवों की महिलाओं को छोटे रोजगार, डेयरी व्यवसाय और स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
सरकार ने इस योजना को केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि महिलाओं को सीधे बाजार से जोड़ने के लिए सरस डेयरी के साथ नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत अब महिला स्वयं सहायता समूहों को डेयरी उत्पादों की बिक्री और कैंटीन संचालन जैसी जिम्मेदारियां भी दी जाएंगी।
महिलाओं को मिलेगा सस्ता और बड़ा लोन
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत महिलाओं को पहले की तुलना में अधिक आर्थिक सहायता मिल सकेगी। ऋण सीमा बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये करने से ग्रामीण और छोटे कस्बों की महिलाएं अपना व्यवसाय शुरू करने या उसे विस्तार देने में सक्षम होंगी। खास बात यह है कि सरकार ने ब्याज दर भी घटाकर 1.5 प्रतिशत कर दी है, जिससे महिलाओं पर कर्ज का बोझ काफी कम होगा।
सरकार का मानना है कि कम ब्याज दर पर आसान ऋण मिलने से महिलाएं डेयरी, सिलाई, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और छोटे व्यापार जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
सरस डेयरी और राजीविका मिलकर करेंगे काम
महिलाओं को बाजार से जोड़ने के लिए सरकार ने राजीविका और सरस डेयरी को एक साझा मॉडल पर काम करने के निर्देश दिए हैं। इस योजना के तहत प्रदेश में संचालित 273 ‘लखपति दीदी’ कैंटीनों पर अब सरस डेयरी के उत्पाद उपलब्ध होंगे। इन कैंटीनों में दूध, दही, पनीर, छाछ और अन्य डेयरी उत्पाद बेचे जाएंगे।
सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं की आय बढ़ेगी और उन्हें स्थायी रोजगार का अवसर मिलेगा। साथ ही उपभोक्ताओं को भी गुणवत्तापूर्ण डेयरी उत्पाद आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।
जिला कलेक्ट्रेट में खुलेंगी सरस कैंटीन
योजना के पहले चरण में प्रदेश के सभी जिला कलेक्ट्रेट परिसरों में नई ‘सरस कैंटीन’ शुरू की जाएंगी। इन कैंटीनों का संचालन महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपा जाएगा। इससे महिलाओं को प्रशासनिक परिसरों में सीधे व्यवसाय करने का मौका मिलेगा।
सरकार ने नए सरस बूथों और आउटलेट्स के आवंटन में भी महिलाओं को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। इससे शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
महिलाओं को ‘लाभार्थी’ नहीं, ‘बिजनेस लीडर’ बनाने की तैयारी
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकार महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ लेने वाली श्रेणी में नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें उद्यमी और बिजनेस लीडर के रूप में विकसित करना चाहती है।
आरसीडीएफ की प्रबंध संचालक श्रुति भारद्वाज के अनुसार, इस मॉडल के जरिए महिलाएं डेयरी सेक्टर की पूरी वैल्यू चेन का हिस्सा बनेंगी। इससे उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘लखपति दीदी’ योजना और सरस डेयरी मॉडल का यह संयोजन राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। गांवों में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार बढ़ेगा और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी मजबूत होगी।
सरकार की इस पहल को महिला सशक्तिकरण के बड़े मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। अब गांव की महिलाएं केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि डेयरी उत्पादों की बिक्री, कैंटीन संचालन और छोटे कारोबार के जरिए अपनी अलग पहचान भी बनाएंगी।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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