
राजस्थान: नोटिस मिलने के दो दिन बाद SIR कर्मचारी की हार्ट अटैक से मौत
राजस्थान में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान दो दिनों में दो कर्मचारियों की हार्ट अटैक से मौत ने व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजस्थान में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान दो दिनों में दो कर्मचारियों की हार्ट अटैक से मौत ने व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। करौली और सवाई माधोपुर जिलों में हुई इन दोनों घटनाओं को लेकर परिजनों ने आरोप लगाया है कि कर्मचारियों पर काम का अत्यधिक दबाव था, जिसके कारण वे लगातार तनाव में चल रहे थे।
पहली घटना करौली जिले की है, जहां करसौली गांव के रहने वाले संतराम सैनी (45) की बुधवार देर रात हार्ट अटैक से मौत हो गई। संतराम हिंडौन के पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में लेक्चरर थे और इन दिनों SIR कार्य में सुपरवाइजर की भूमिका निभा रहे थे।
परिजनों का कहना है कि संतराम को 17 नवंबर को प्रगति रिपोर्ट में देरी होने पर नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद से वे मानसिक रूप से बेहद परेशान थे। बड़े भाई राजेंद्र सिंह सैनी ने बताया कि संतराम घर आकर भी कम ही बात करते थे और लगातार तनाव में रहते थे। उनका कहना है कि “काम का प्रेशर इतना था कि वह अक्सर चिंतित रहते थे। घर में किसी से बात भी नहीं करते थे।”
बुधवार रात करीब 9:30 बजे संतराम को अचानक सीने में तेज दर्द हुआ। इसके बाद उन्हें उल्टी भी हुई। परिवार के लोग आनन-फानन में उन्हें जिला अस्पताल लेकर निकले, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया।
राजेंद्र सिंह ने बताया कि संतराम की पत्नी ने दो महीने पहले ही सिजेरियन डिलीवरी के बाद बेटे को जन्म दिया था। “घर की जिम्मेदारियां थीं, ऊपर से SIR का दबाव… वह खुद को संभाल नहीं पा रहे थे,” उन्होंने कहा।
संतराम के दो छोटे बेटे हैं—पार्थ (3 साल) और दो महीने का शिशु।
घटना की सूचना पुलिस को दी गई। सदर थाना के एएसआई शिवलाल मीना ने बताया कि परिजनों ने किसी भी तरह की शिकायत दर्ज नहीं करवाई। गुरुवार को पुलिस की मौजूदगी में पोस्टमॉर्टम करवाया गया। परिजनों ने इस दौरान बताया कि संतराम SIR कार्यों के दबाव के कारण तनाव में थे, और यही कारण उनकी मौत की वजह बना। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
इसी से एक दिन पहले सवाई माधोपुर जिले में एक अन्य कर्मचारी की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। यह कर्मचारी विशेष पुनरीक्षण कार्य में BLO (टीचर) के तौर पर नियुक्त था।
परिजनों का दावा है कि हार्ट अटैक आने से ठीक 5 मिनट पहले तहसीलदार का फोन आया था। फोन उठाने के तुरंत बाद कर्मचारी अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा। परिजन उसे अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार के अनुसार, BLO भी पिछले कई दिनों से लगातार काम के दबाव की बात कर रहा था।
SIR के काम में लगे कर्मचारियों की लगातार शिकायत रही है कि निर्धारित समयसीमा और लगातार मॉनिटरिंग के कारण उन पर अत्यधिक मानसिक दबाव रहता है। कई शिक्षक संगठनों ने आयोग से कार्यभार कम करने और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग भी की है।
करौली और सवाई माधोपुर में हुई इन दोनों घटनाओं ने SIR कार्यप्रणाली पर चिंता बढ़ा दी है। परिजन और स्थानीय शिक्षक संगठन प्रशासन से काम के दबाव पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।

लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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