जब गहलोत ने हाथ मिलाते ही पूछा लाल डायरी?… पढ़िए जयपुर के एक शादी समारोह का सियासी किस्सा
राजस्थान की राजनीति में कभी तूफान खड़ा करने वाली लाल डायरी एक बार फिर चर्चा में आ गई लेकिन इस बार विधानसभा या प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं, बल्कि एक सगाई समारोह के मंच पर। माहौल पूरी तरह सामाजिक था

राजस्थान की राजनीति में कभी तूफान खड़ा करने वाली लाल डायरी एक बार फिर चर्चा में आ गई लेकिन इस बार विधानसभा या प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं, बल्कि एक सगाई समारोह के मंच पर। माहौल पूरी तरह सामाजिक था, मगर जब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा आमने-सामने आए तो राजनीति की पुरानी कहानी पर हल्की-फुल्की चुटकी ने पूरे पंडाल में ठहाके लगवा दिए।
समारोह में दिलचस्प माहौल
दरअसल, कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौड़ के बेटे के सगाई कार्यक्रम में कई दिग्गज नेता पहुंचे हुए थे। इसी कार्यक्रम में राजेंद्र गुढ़ा भी मेहमान बनकर पहुंचे। राजनीति के मैदान में कई बार आमने-सामने आ चुके ये चेहरे जब एक ही मंच पर दिखे तो माहौल थोड़ा दिलचस्प हो गया।
बताया जा रहा है कि धर्मेंद्र राठौड़ खुद राजेंद्र गुढ़ा का हाथ पकड़कर उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास लेकर गए। राठौड़ ने मुस्कुराते हुए कहा- गुढ़ाजी आए हैं। गहलोत ने जैसे ही गुढ़ा को देखा, चेहरे पर मुस्कान आई और हाथ मिलाते हुए तुरंत चुटकी ले डाली- लाल डायरी?
बस, इतना सुनते ही आसपास मौजूद लोगों के बीच ठहाके गूंज उठे। क्योंकि राजस्थान की राजनीति में लाल डायरी कोई साधारण शब्द नहीं है। कुछ समय पहले यही लाल डायरी सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई थी।
सरकार भी इन्होंने ही बचाई
हालांकि माहौल हल्का-फुल्का था और गुढ़ा भी चुप रहने वालों में से नहीं हैं। उन्होंने भी तुरंत जवाब देते हुए माहौल को और रोचक बना दिया। गुढ़ा ने मुस्कुराते हुए कहा सरकार भी इन्होंने ही बचाई थी।”
उनके इस जवाब पर वहां मौजूद नेताओं और मेहमानों के बीच फिर से हंसी का दौर चल पड़ा।
दरअसल, राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी अक्सर परिस्थितियों के हिसाब से बदलती रहती है। एक समय ऐसा भी था जब राजेंद्र गुढ़ा गहलोत सरकार में मंत्री थे। लेकिन बाद में उन्होंने अपने ही साथी धर्मेंद्र राठौड़ को लेकर “लाल डायरी” का मुद्दा उठाया था और कई बड़े दावे किए थे। इस पूरे विवाद ने उस समय प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त हलचल मचा दी थी।
लाल डायरी चर्चा में रही
गुढ़ा के इन आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल इतना गरमा गया था कि आखिरकार उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त भी कर दिया गया था। उस दौर में लाल डायरी शब्द मीडिया और राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।
लेकिन सियासत का यही रंग है जहां कभी आरोप-प्रत्यारोप और तीखे बयान होते हैं, वहीं किसी सामाजिक कार्यक्रम में वही नेता सहजता से मिलते भी नजर आ जाते हैं। जयपुर के इस सगाई समारोह में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।
नेता हंसी-मजाक करते नज़र आए
धर्मेंद्र राठौड़ ने जहां पूरे आत्मीयता के साथ राजेंद्र गुढ़ा का स्वागत किया, वहीं गहलोत और गुढ़ा के बीच हुई हल्की नोकझोंक ने माहौल को हल्का और मनोरंजक बना दिया। दिलचस्प बात यह रही कि जिस लाल डायरी ने कभी राजनीतिक भूचाल खड़ा किया था, वही इस कार्यक्रम में मजाक और चुटकी का विषय बन गई।
राजनीतिक जानकार भी कहते हैं कि राजस्थान की राजनीति में रिश्ते अक्सर मंच के हिसाब से बदलते नजर आते हैं। विधानसभा में जहां तल्ख़ी दिखाई देती है, वहीं सामाजिक कार्यक्रमों में वही नेता हंसी-मजाक करते भी नजर आते हैं।
जयपुर के इस सगाई समारोह में गहलोत और गुढ़ा की मुलाकात ने एक बार फिर यह याद दिला दिया कि राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता न दोस्ती, न दुश्मनी… लेकिन लाल डायरी का किस्सा अब भी लोगों को मुस्कुराने का मौका दे देता है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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