राजस्थान में IPL टिकट के नाम पर डिजिटल डकैती; क्लिक करते ही आप हो सकते हैं कंगाल

Sachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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आईपीएल 2026 का शोर जितना स्टेडियम में है, उससे कहीं ज्यादा खतरनाक सन्नाटा साइबर दुनिया में पसरा हुआ है। यहां तालियां नहीं बजतीं यहां चुपचाप खाते खाली होते हैं। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा की एडवाइजरी ने जिस खतरे की ओर इशारा किया है

राजस्थान में IPL टिकट के नाम पर डिजिटल डकैती; क्लिक करते ही आप हो सकते हैं कंगाल

आईपीएल 2026 का शोर जितना स्टेडियम में है, उससे कहीं ज्यादा खतरनाक सन्नाटा साइबर दुनिया में पसरा हुआ है। यहां तालियां नहीं बजतीं यहां चुपचाप खाते खाली होते हैं। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा की एडवाइजरी ने जिस खतरे की ओर इशारा किया है, वह कोई मामूली ठगी नहीं, बल्कि पूरी प्लानिंग के साथ चल रहा ‘डिजिटल डकैती गैंग’ है।

शिकार पहले चुना जाता है, फिर जाल बिछता है

इन्वेस्टिगेशन में साफ हुआ है ये गैंग अंधाधुंध वार नहीं करता। पहले ये ट्रैक करता है कि कौन IPL टिकट सर्च कर रहा है, किस शहर में मैच है, कहां टिकट की किल्लत है। फिर उसी हिसाब से फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया पेज और गूगल ऐड्स तैयार किए जाते हैं।

निशाना इतना सटीक होता है कि यूजर को लगता है यही असली टिकट प्लेटफॉर्म है। कई मामलों में BookMyShow जैसी वेबसाइट की हूबहू कॉपी बनाकर लोगों को फंसाया गया।

यह ठगी नहीं, ‘ऑपरेशन’ है कॉल सेंटर की तरह चलता है पूरा गैंग

सूत्र बताते हैं इस खेल के पीछे पूरा सिस्टम काम करता है।

एक टीम लिंक बनाती है…

दूसरी टीम गूगल पर उसे टॉप पर पहुंचाती है…

तीसरी टीम ‘कस्टमर केयर’ बनकर कॉल करती है…

जैसे ही आप वेबसाइट पर जाते हैं, फोन बजता है

सर, टिकट कन्फर्म करा देते हैं… अभी पेमेंट कर दीजिए…

आवाज इतनी भरोसेमंद कि शक की गुंजाइश ही खत्म।

OTP दिया… खेल खत्म

पेमेंट के वक्त आपसे OTP मांगा जाता है- नाम दिया जाता है कन्फर्मेशन कोड

यहीं सबसे बड़ा वार होता है।

OTP शेयर करते ही अकाउंट की चाबी सीधे ठगों के हाथ में चली जाती है।

इसके बाद पैसा सेकंडों में अलग-अलग खातों में ट्रांसफर और आप देखते रह जाते हैं।

QR कोड नई चाल, नया झांसा

अब ठग सिर्फ पैसे लेकर भाग नहीं रहे वे आपको फर्जी संतोष भी दे रहे हैं।

पेमेंट के बाद व्हाट्सएप पर ई-टिकट भेजा जाता है, जिसमें QR कोड होता है।

आपको लगता है टिकट मिल गया।

लेकिन स्टेडियम के गेट पर स्कैन होते ही सच्चाई सामने INVALID TICKET

तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

दिमाग से खेल- अभी नहीं लिया तो गया मौका

यह गैंग टेक्नोलॉजी से ज्यादा दिमाग पर हमला करता है।

“सिर्फ 2 टिकट बचे हैं…”

“5 मिनट में ऑफर खत्म…”

ऐसे मैसेज आपको सोचने का वक्त नहीं देते।

आप जल्दबाजी में फैसला लेते हैं और वहीं फंस जाते हैं।

पैसा कहां जाता है? सबसे बड़ा सवाल

जांच में सामने आया है कि रकम सीधे ‘म्यूल अकाउंट्स’ में जाती है।

फर्जी या किराए के बैंक अकाउंट… जहां से पैसा तुरंत छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया जाता है।

कुछ ही मिनटों में रकम कई राज्यों में फैल जाती है ट्रैक करना बेहद मुश्किल।

राजस्थान पुलिस को मिले बड़े इनपुट

साइबर क्राइम एसपी शान्तनु कुमार सिंह के मुताबिक, कई केस में एक जैसे मोबाइल नंबर, UPI IDs और लिंक मिले हैं।

स्पष्ट संकेत यह लोकल नहीं, इंटरस्टेट नेटवर्क है।

डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर संदिग्धों तक पहुंचने की कोशिश तेज कर दी गई है।

फंस गए तो याद रखें पहला घंटा ही ‘जीवन रेखा’

ठगी के बाद घबराने से कुछ नहीं होगा एक्शन लेना होगा।

तुरंत 1930 पर कॉल करें या National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें।

यही वो वक्त होता है जब ट्रांजैक्शन रोका भी जा सकता है।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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