राजस्थान में अवैध बजरी खनन के विवाद में डबल मर्डर, 13 दोषियों को उम्रकैद
राजस्थान के झालावाड़ जिले के भवानीमंडी में छह साल पुराने बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। भवानीमंडी के अपर जिला एवं सेशन न्यायालय ने अवैध बजरी खनन को लेकर हुए

राजस्थान के झालावाड़ जिले के भवानीमंडी में छह साल पुराने बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। भवानीमंडी के अपर जिला एवं सेशन न्यायालय ने अवैध बजरी खनन को लेकर हुए खूनी संघर्ष में दो लोगों की हत्या के मामले में 13 आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
छह साल बाद आया अदालत का फैसला
जानकारी के अनुसार यह मामला भवानीमंडी क्षेत्र के गंगपुरा गांव का है। वर्ष 2021 में बांध की भूमि पर कथित रूप से किए जा रहे अवैध बजरी खनन का गांव के कुछ लोगों ने विरोध किया था। इसी विवाद ने बाद में हिंसक रूप ले लिया और दो लोगों की जान चली गई। मामले की सुनवाई लंबे समय तक अदालत में चलती रही, जिसके बाद अब कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुनाया है।
अवैध खनन के विरोध पर हुआ था जानलेवा हमला
अपर लोक अभियोजक हेमराज शर्मा ने बताया कि गंगपुरा गांव में अवैध बजरी खनन को लेकर तनाव बना हुआ था। गांव के बसंतीलाल, गिरिराज, विक्रम और अन्य ग्रामीण बांध की जमीन पर हो रहे खनन का विरोध कर रहे थे। आरोप है कि इससे नाराज होकर फूल सिंह और उसके साथियों ने ग्रामीणों पर हमला कर दिया।
हमले के दौरान आरोपी तलवार, लाठी और सरिया जैसे घातक हथियारों से लैस थे। उन्होंने विरोध कर रहे लोगों पर ताबड़तोड़ हमला किया। इस हमले में बसंतीलाल और गिरिराज की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि विक्रम गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी और लोगों में भारी आक्रोश देखा गया था।
पुलिस ने 13 आरोपियों को किया था गिरफ्तार
घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। शुरुआती कार्रवाई में पुलिस ने 10 आरोपियों को एक साथ गिरफ्तार किया था। वहीं, तीन अन्य आरोपियों को बाद में अलग-अलग समय पर गिरफ्तार किया गया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट पेश की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और अभियोजन पक्ष ने विस्तृत साक्ष्य जुटाए। इसी आधार पर अदालत में मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी।
30 गवाहों और 86 दस्तावेजों के आधार पर दोष सिद्ध
लोक अभियोजक हेमराज शर्मा के अनुसार मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में 30 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इसके अलावा 86 दस्तावेज और 13 आर्टिकल साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए। अदालत ने सभी साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों का गहन परीक्षण किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित होते हैं। इसके बाद अदालत ने सभी 13 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
जमानत पर बाहर थे 11 आरोपी, फैसला आते ही भेजे गए जेल
सूत्रों के अनुसार मामले के 13 आरोपियों में से 11 आरोपी गिरफ्तारी के बाद जमानत पर रिहा हो चुके थे। सजा सुनाए जाने के समय केवल दो आरोपी ही जेल में बंद थे। अदालत का फैसला आने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जमानत पर बाहर चल रहे सभी दोषियों को दोबारा गिरफ्तार कर लिया और उन्हें जेल भेज दिया।
ये हैं सजा पाने वाले दोषी
अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए आरोपियों में फूल सिंह, गोविंद सिंह, कमल सिंह, सुख सिंह, महेंद्र सिंह, नेपाल सिंह, बहादुर सिंह, सरदार सिंह, हुकम सिंह, ईश्वर सिंह, सूरज सिंह, बलबीर सिंह और जयपाल सिंह शामिल हैं। सभी को आजीवन कारावास के साथ 30-30 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
यह फैसला अवैध खनन से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि कानून अपने हाथ में लेने और हिंसा का सहारा लेने वालों को अंततः न्यायालय के सामने जवाबदेह होना पड़ता है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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