राजस्थान हेल्थ सिस्टम को बड़ा झटका;जयपुर के टॉप न्यूरोसर्जन डॉ. अचल शर्मा ने SMS से लिया VRS
राजस्थान के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल (एसएमएस हॉस्पिटल) के सीनियर न्यूरोसर्जन डॉ. अचल शर्मा ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। राज्य सरकार ने बुधवार को उनका वीआरएस मंजूर कर लिया। डॉ. शर्मा ने कुछ माह पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था और तब से इसके अनुमोदन के लिए प्रयासरत थे।

राजस्थान के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल (एसएमएस हॉस्पिटल) के सीनियर न्यूरोसर्जन डॉ. अचल शर्मा ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। राज्य सरकार ने बुधवार को उनका वीआरएस मंजूर कर लिया। डॉ. शर्मा ने कुछ माह पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था और तब से इसके अनुमोदन के लिए प्रयासरत थे। उनके वीआरएस को मंजूरी मिलने के बाद चिकित्सा महकमे में हलचल तेज हो गई है।
चिकित्सा क्षेत्र में मजबूत पहचान, कई जटिल सर्जरी में महारत
डॉ. अचल शर्मा जयपुर के जाने-माने न्यूरोसर्जनों में गिने जाते रहे हैं। उन्होंने वर्षों तक एसएमएस हॉस्पिटल में सेवाएं दीं और जटिल न्यूरोसर्जरी मामलों में विशेषज्ञता हासिल की। उनके कार्यकाल के दौरान कई गंभीर मरीजों का सफल इलाज हुआ और चिकित्सा क्षेत्र में उनकी अलग पहचान बनी। उनके वीआरएस लेने से अस्पताल प्रशासन और मरीजों में आश्चर्य का माहौल है।
अधीक्षक रहते उजागर किया था चर्चित किडनी कांड
डॉ. शर्मा का प्रशासनिक कार्यकाल भी काफी अहम रहा है। वे एसएमएस हॉस्पिटल के अधीक्षक पद पर रह चुके हैं। इसी दौरान उन्होंने अस्पताल में सामने आए ‘किडनी कांड’ की शिकायत सरकार और एसीबी स्तर पर की थी, जिसके बाद मामला सार्वजनिक हुआ और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। हालांकि इस प्रकरण के बाद सरकार ने उन्हें अधीक्षक पद से हटा दिया था।
न्यूरोसर्जरी विभाग के एचओडी के रूप में भी निभाई अहम भूमिका
डॉ. शर्मा एसएमएस मेडिकल कॉलेज में न्यूरोसर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) भी रह चुजयपुर | न्यूरोसर्जरी विभाग के एचओडी के रूप में भी निभाई अहम भूमिकाके हैं। उनके नेतृत्व में विभाग ने कई उपलब्धियां हासिल कीं और जटिल सर्जरी के मामलों में बेहतर परिणाम सामने आए। चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है।
एसएमएस में वीआरएस का बढ़ता ट्रेंड, कई सीनियर डॉक्टर कतार में
एसएमएस हॉस्पिटल में पिछले कुछ समय से वरिष्ठ डॉक्टरों के वीआरएस लेने का सिलसिला जारी है। जानकारी के अनुसार, नेफ्रोलॉजी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. विनय मल्होत्रा और पूर्व अधीक्षक डॉ. सुशील भाटी ने भी वीआरएस के लिए आवेदन कर रखा है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में और भी वरिष्ठ डॉक्टर सेवा से अलग हो सकते हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से सेवाओं पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि वरिष्ठ डॉक्टरों के लगातार वीआरएस लेने से अस्पताल की सेवाओं पडॉ. शर्मा एसएमएस मेडिकल कॉलेज में न्यूरोसर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) भी रह चुजयपुर | न्यूरोसर्जरी विभाग के एचओडी के रूप में भी निभाई अहम भूमिकाके हैं। उनके नेतृत्व में विभाग ने कई उपलब्धियां हासिल कीं और जटिल सर्जरी के मामलों में बेहतर परिणाम सामने आए। चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है।र असर पड़ सकता है, खासकर सुपर स्पेशलिटी विभागों में। एसएमएस हॉस्पिटल प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां दूर-दराज के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अनुभवी डॉक्टरों की कमी चिंता का विषय बन सकती है।
वीआरएस के कारणों पर सस्पेंस, सरकार की रणनीति पर नजर
फिलहाल, डॉ. अचल शर्मा के वीआरएस के पीछे के कारणों को लेकर आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। उनके इस फैसले ने स्वास्थ्य विभाग में नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को कैसे पूरा करती है और अस्पताल की सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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