18 महिलाओं की मौत पर उठे सवाल तो हंसते हुए बोले मंत्री जी- ब्रेक के बाद
जब पत्रकारों ने मौतों और जांच को लेकर सवालों की झड़ी लगा दी तो स्वास्थ्य मंत्री अचानक उठ खड़े हुए। जाते-जाते उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि “बाकी बातें ब्रेक के बाद करेंगे।
राजस्थान में प्रसूताओं की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब तक 18 महिलाओं की मौत और कई अन्य महिलाओं के गंभीर रूप से बीमार होने के बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का एक बयान नई बहस छेड़ गया है। गंभीर सवालों के बीच मंत्री का मुस्कुराते हुए “ब्रेक के बाद” कहकर प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़ना विपक्ष के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।
जयपुर में सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री ने प्रसूताओं की मौत के मामले में करीब तीन घंटे तक अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उनसे लगातार सवाल पूछे गए कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में प्रसूताओं की मौत कैसे हुई? जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या स्वास्थ्य विभाग अपनी किसी चूक को स्वीकार करता है? लेकिन इन सवालों के स्पष्ट जवाब देने के बजाय मंत्री मुस्कुराते नजर आए।
जब पत्रकारों ने मौतों और जांच को लेकर सवालों की झड़ी लगा दी तो स्वास्थ्य मंत्री अचानक उठ खड़े हुए। जाते-जाते उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि “बाकी बातें ब्रेक के बाद करेंगे।” उनका इशारा बांसवाड़ा और भीलवाड़ा के प्रस्तावित दौरे के बाद दोबारा मीडिया से बातचीत करने की ओर था, लेकिन उनका यह अंदाज सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन गया।
पहले भी विवादों में रहे मंत्री के बयान
यह पहला मौका नहीं है जब प्रसूताओं के मामले में स्वास्थ्य मंत्री का बयान विवादों में आया हो। इससे पहले उन्होंने कहा था कि महिलाएं “नाचते-गाते अस्पताल नहीं आतीं”, बल्कि पहले से किसी बीमारी या कमजोरी के कारण अस्पताल पहुंचती हैं। उस बयान पर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा था। अब “ब्रेक के बाद” वाला बयान सामने आने के बाद सरकार की संवेदनशीलता पर फिर सवाल उठने लगे हैं।
18 मौतों ने बढ़ाई चिंता
राजस्थान में पिछले कुछ दिनों के दौरान बांसवाड़ा में पांच और भीलवाड़ा में चार प्रसूताओं की मौत हुई। इससे पहले कोटा, जोधपुर और बीकानेर में भी इसी तरह के मामले सामने आ चुके हैं। इन सभी घटनाओं को मिलाकर अब तक 18 महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य महिलाओं का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में जारी है। कुछ महिलाओं की किडनी प्रभावित होने की भी जानकारी सामने आई है।
इन घटनाओं ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतकों के परिजन लगातार निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
जांच में सामने आई चौंकाने वाली बात
स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि जिन ऑक्सीटोसिन इंजेक्शनों का इस्तेमाल किया गया था, उनमें अपेक्षित दवा के बजाय सिर्फ पानी होने की आशंका जताई गई। इस खुलासे के बाद दवा आपूर्ति व्यवस्था और गुणवत्ता नियंत्रण पर भी सवाल उठे हैं। हालांकि सरकार ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
मंत्री ने क्या कहा?
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच चल रही है और बिना रिपोर्ट आए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मातृ मृत्यु दर के मानकों की तुलना में राजस्थान की स्थिति उसी के आसपास है।
हालांकि पत्रकारों ने जब एक साथ हुई इन मौतों के कारणों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर सवाल किए तो मंत्री कोई ठोस जवाब नहीं दे सके। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वह मंगलवार को बांसवाड़ा और बुधवार को भीलवाड़ा जाकर हालात का जायजा लेंगे और उसके बाद विस्तृत जानकारी साझा करेंगे।
विपक्ष को मिला नया मुद्दा
स्वास्थ्य मंत्री के “ब्रेक के बाद” वाले बयान के बाद विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का नया मुद्दा मिल गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि जब राज्य में प्रसूताओं की मौत का इतना गंभीर मामला सामने है, तब सरकार को जवाबदेही दिखानी चाहिए थी। उनका आरोप है कि मंत्री का यह रवैया पीड़ित परिवारों की भावनाओं के प्रति असंवेदनशील दिखाई देता है।
अब सबकी नजर जांच और दौरे पर
फिलहाल पूरे मामले में सरकार की ओर से जांच जारी है और स्वास्थ्य मंत्री बांसवाड़ा व भीलवाड़ा के दौरे पर जाने वाले हैं। अब यह देखना होगा कि दौरे के बाद सरकार इस मामले में क्या निष्कर्ष सामने लाती है और क्या किसी स्तर पर जवाबदेही तय होती है। लेकिन इतना तय है कि 18 महिलाओं की मौत से उठे सवालों के बीच मंत्री का “ब्रेक के बाद” वाला बयान खुद एक बड़ा राजनीतिक और सार्वजनिक मुद्दा बन चुका है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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