
राजस्थान में पूर्व विधायक गिर्राज मलिंगा की बढ़ीं मुश्किलें, एससी-एसटी कोर्ट ने सात पर तय किए आरोप
राजस्थान में इंजीनियर हर्षाधिपति के साथ मारपीट के बहुचर्चित मामले में बुधवार को बड़ी कानूनी कार्रवाई हुई। जयपुर स्थित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) मामलों की विशेष अदालत ने पूर्व विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा सहित सात आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए।
राजस्थान में इंजीनियर हर्षाधिपति के साथ मारपीट के बहुचर्चित मामले में बुधवार को बड़ी कानूनी कार्रवाई हुई। जयपुर स्थित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) मामलों की विशेष अदालत ने पूर्व विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा सहित सात आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए। अदालत के इस आदेश के साथ ही मामले की ट्रायल प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है।
एससी-एसटी न्यायालय के न्यायाधीश विद्यानंद शुक्ला ने इस प्रकरण में सभी सात आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए। जिन आरोपियों पर आरोप तय हुए हैं, उनमें पूर्व विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा के अलावा राकेश, भोला, सचिन, गुमान, प्रमोद और समीर शामिल हैं। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सामग्री और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप तय करने को उचित माना।
अदालत द्वारा जिन धाराओं में आरोप तय किए गए हैं, उनमें अवैध भीड़ बनाना, सरकारी कर्मचारी के साथ मारपीट, जानलेवा हमला, धमकी देना और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं, इसलिए आरोप तय किए जाना न्यायसंगत है।
यह मामला शुरू से ही राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में खासा चर्चित और संवेदनशील रहा है। घटना के बाद इसे लेकर प्रदेशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं। पीड़ित इंजीनियर हर्षाधिपति ने आरोप लगाया था कि भूमि संबंधी एक सरकारी कार्रवाई के दौरान पूर्व विधायक गिर्राज मलिंगा और उनके समर्थकों ने उनके साथ न केवल दुर्व्यवहार किया, बल्कि बेरहमी से मारपीट भी की। इस हमले में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए यह मामला पहले धौलपुर की अदालत में दर्ज था, लेकिन बाद में राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर इसे वहां से स्थानांतरित कर जयपुर की एससी-एसटी विशेष अदालत में सुनवाई के लिए भेजा गया। हाईकोर्ट ने निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया था। इसके बाद से जयपुर की अदालत में इस मामले की कार्यवाही चल रही थी, जिसमें बुधवार को आरोप तय किए जाने का अहम पड़ाव सामने आया।
अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई कि आरोपियों ने संगठित रूप से एक सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य निर्वहन के दौरान निशाना बनाया। अभियोजन के अनुसार, यह हमला न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाला था, बल्कि एक सरकारी अधिकारी के मनोबल को तोड़ने का प्रयास भी था। अभियोजन ने यह भी कहा कि घटना के दौरान आरोपियों ने आपसी साजिश के तहत जानलेवा हमला किया और पीड़ित को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
वहीं, बचाव पक्ष की ओर से आरोपों को निराधार बताते हुए कहा गया कि मामले में राजनीतिक द्वेष के चलते आरोपियों को फंसाया गया है। हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं करते हुए कहा कि यह ट्रायल का विषय है और साक्ष्यों के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा।
अदालत के इस आदेश के बाद अब मामले में गवाहों के बयान और साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होगी। कानूनी जानकारों के अनुसार, आरोप तय होना अभियोजन पक्ष के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि अदालत ने मामले को गंभीरता से लिया है।

लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
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