राजस्थान में फर्जी FMGE सर्टिफिकेट रैकेट का पर्दाफाश, SOG ने दो डॉक्टरों को दबोचा

Sachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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राजस्थान में फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) के फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन हासिल करने वाले बड़े रैकेट का स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने खुलासा किया है। एसओजी ने इस मामले में दो डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है

राजस्थान में फर्जी FMGE सर्टिफिकेट रैकेट का पर्दाफाश, SOG ने दो डॉक्टरों को दबोचा

राजस्थान में फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) के फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन हासिल करने वाले बड़े रैकेट का स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने खुलासा किया है। एसओजी ने इस मामले में दो डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है, जबकि विदेश से MBBS की डिग्री लेकर आए 73 अन्य डॉक्टरों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। यह पूरा मामला राज्य की चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण बेहद गंभीर माना जा रहा है।

एडीजी (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी भानाराम माली उर्फ भानू (30) निवासी बर, ब्यावर हाल जनकपुरी-द्वितीय, ज्योति नगर और इंद्रराज सिंह गुर्जर (27) निवासी दौसा कोतवाली क्षेत्र शामिल हैं। भानाराम माली इस पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तारी, पांच देशों में काटी फरारी

एसओजी के अनुसार, मामले में पहले तीन डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद मुख्य आरोपी भानाराम माली फरार हो गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह भारत छोड़कर थाईलैंड, श्रीलंका, कजाकिस्तान, दुबई और नेपाल जैसे पांच देशों में छिपता रहा। एसओजी को जैसे ही उसके दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने की सूचना मिली, टीम ने 2 फरवरी को उसे दबोच लिया। इसके बाद 4 फरवरी को इस मामले में नया प्रकरण दर्ज किया गया।

पहले भी तीन डॉक्टर हो चुके हैं अरेस्ट

एसओजी ने इससे पहले फेक FMGE स्क्रीनिंग टेस्ट सर्टिफिकेट मामले में डॉक्टर पीयूष कुमार त्रिवेदी, देवेंद्र सिंह गुर्जर और शुभम गुर्जर को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि इन तीनों ने विदेश से MBBS की डिग्री प्राप्त की थी, लेकिन FMGE परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाए थे। इसके बावजूद, उन्होंने भानाराम माली को मोटी रकम देकर फर्जी FMGE पास सर्टिफिकेट हासिल किया और उसी के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया।

खुद भी विदेश से MBBS कर चुका है मुख्य आरोपी

जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी भानाराम माली खुद विदेश से MBBS की डिग्री लेकर आया डॉक्टर है। उसने अपने संपर्कों और नेटवर्क के जरिए फर्जी FMGE स्क्रीनिंग टेस्ट पास सर्टिफिकेट तैयार करवाए और इन्हें अन्य डॉक्टरों को बेचता रहा। इसी रैकेट के जरिए कई लोगों ने राजस्थान में इंटर्नशिप और प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन हासिल किया।

73 विदेशी डिग्रीधारी डॉक्टरों की जांच

एसओजी की जांच में सामने आया कि कुल 73 ऐसे कैंडिडेट हैं, जिन्होंने विदेश से MBBS की डिग्री प्राप्त की थी, लेकिन FMGE परीक्षा पास नहीं की थी। इसके बावजूद, इन सभी ने फर्जी FMGE सर्टिफिकेट बनवाकर RMC में इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया। अब एसओजी इन सभी मामलों की अलग-अलग जांच कर रही है और दस्तावेजों की सत्यता की पड़ताल की जा रही है।

कजाकिस्तान से MBBS, फर्जी सर्टिफिकेट से इंटर्नशिप

दूसरे आरोपी इंद्रराज सिंह गुर्जर के संबंध में जांच में पता चला कि उसने कजाकिस्तान से MBBS की डिग्री हासिल की थी। दिसंबर 2022 का फर्जी FMGE स्क्रीनिंग टेस्ट पास सर्टिफिकेट उसने भानाराम माली से पैसे देकर लिया। इसके आधार पर उसने RMC में ऑनलाइन आवेदन किया और राजीव गांधी मेडिकल कॉलेज, अलवर से इंटर्नशिप पूरी कर प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन भी प्राप्त कर लिया। इतना ही नहीं, इंद्रराज सिंह ने इसी नेटवर्क के जरिए अन्य कैंडिडेट्स को भी फर्जी सर्टिफिकेट दिलवाने में भूमिका निभाई।

चिकित्सा व्यवस्था पर बड़ा सवाल

इस पूरे मामले ने राजस्थान की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था और रेगुलेटरी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना FMGE पास किए डॉक्टरों का इंटर्नशिप और मरीजों का इलाज करना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि आम जनता की जान से भी खिलवाड़ है। एसओजी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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