राजस्थान से दिल्ली तक फैला फ्रॉड नेटवर्क, 400 करोड़ घोटाले की सफेदपोश घेरे में
डिजिटल इंडिया के दौर में साइबर ठगी का एक खतरनाक और ‘अपडेटेड’ मॉडल सामने आया है, जिसने सरकारी सिस्टम की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जयपुर पुलिस ने 400 करोड़ रुपये के एक्सपोर्ट इंसेंटिव फ्रॉड का खुलासा करते हुए एक ऐसे संगठित सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है,

डिजिटल इंडिया के दौर में साइबर ठगी का एक खतरनाक और ‘अपडेटेड’ मॉडल सामने आया है, जिसने सरकारी सिस्टम की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जयपुर पुलिस ने 400 करोड़ रुपये के एक्सपोर्ट इंसेंटिव फ्रॉड का खुलासा करते हुए एक ऐसे संगठित सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जो आम लोगों की पहचान का दुरुपयोग कर सरकारी सब्सिडी पर डाका डाल रहा था। इस मामले में जांच अब राजस्थान से निकलकर दिल्ली तक पहुंच चुकी है और कई चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) फर्में जांच के दायरे में हैं।
डिजिटल पहचान का दुरुपयोग बना हथियार
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने आम लोगों के आधार और पैन कार्ड की जानकारी अवैध रूप से हासिल की। इसके बाद इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट तैयार किए गए। यही डिजिटल पहचान इस पूरे घोटाले की ‘मास्टर चाबी’ साबित हुई। ठगों ने इन जाली सिग्नेचर्स के जरिए सरकारी पोर्टल में लॉगइन कर एक्सपोर्ट से जुड़ी सब्सिडी योजनाओं का गलत तरीके से फायदा उठाया।
DGFT-ICEGATE सिस्टम में सेंध
आरोपियों ने विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) और ICEGATE जैसे संवेदनशील सरकारी पोर्टल्स को निशाना बनाया। यहां से उन्होंने ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स जैसी योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभ को फर्जी इंपोर्टर-एक्सपोर्टर कोड (IEC) के जरिए अपने खातों में ट्रांसफर कराया। ये स्क्रिप्स एक तरह के डिजिटल कूपन होते हैं, जिन्हें बाद में बाजार में भुनाया जाता है। इस प्रक्रिया के जरिए करोड़ों रुपये की सरकारी सब्सिडी को अवैध रूप से निकाला गया।
‘म्यूल अकाउंट्स’ का जाल, गरीब बने माध्यम
ठगी की रकम को छिपाने के लिए गिरोह ने सैकड़ों ‘म्यूल अकाउंट्स’ का इस्तेमाल किया। ये खाते अक्सर गरीब मजदूरों या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के नाम पर खोले गए थे। आरोपियों ने इन्हें मामूली लालच देकर उनके बैंक दस्तावेज हासिल किए और खातों को लेनदेन के लिए इस्तेमाल किया। अब पुलिस इन खातों की मनी ट्रेल खंगाल रही है, ताकि असली मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।
दिल्ली की CA फर्मों पर शक गहराया
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा दिल्ली की कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्मों की संभावित भूमिका को लेकर हुआ है। जयपुर पुलिस के स्पेशल कमिश्नर ओम प्रकाश के अनुसार, इतनी बड़ी और तकनीकी ठगी बिना किसी विशेषज्ञ की मदद के संभव नहीं थी। पुलिस को संदेह है कि इन फर्मों ने न केवल तकनीकी सहायता दी, बल्कि कानूनी खामियों का फायदा उठाने के तरीके भी सुझाए। फिलहाल इन फर्मों के वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
राजस्थान से दिल्ली तक ताबड़तोड़ रेड
मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर पुलिस की टीमें दिल्ली, सीकर और जोधपुर में एक साथ छापेमारी कर रही हैं। हाल ही में जोधपुर से पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच को नई दिशा मिली है। पुलिस का कहना है कि ये गिरफ्तारियां महज ‘हिमशैल का सिरा’ हैं और आने वाले दिनों में कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
रिमांड पर आरोपी, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच जारी
गिरफ्तार आरोपियों में सुल्तान खान, नंद किशोर, निर्मल सोनी, अशोक कुमार भंडारी और प्रमोद खत्री शामिल हैं, जिन्हें पांच दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। इनके पास से जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल फोन और फर्जी दस्तावेजों का फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि इन डिजिटल डिवाइसेज से गिरोह के नेटवर्क, फंड फ्लो और मास्टरमाइंड की पहचान से जुड़े अहम सुराग मिलेंगे।
सिस्टम की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हाई-प्रोफाइल घोटाले ने सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस आसानी से ठगों ने फर्जी पहचान के जरिए सिस्टम में सेंध लगाई, वह भविष्य में और बड़े साइबर खतरों की चेतावनी देता है।
जांच जारी, बड़े खुलासों की उम्मीद
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही है। मनी ट्रेल, डिजिटल सिग्नेचर के स्रोत और CA फर्मों की भूमिका को जोड़कर इस घोटाले के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश जारी है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही इस हाईटेक ठगी के पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जाएगा।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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