
राजस्थान में अंता उपचुनाव से पहले भाजपा में उठे बगावत के सुर, इस नामांकन ने बढ़ा दी कई दिग्गज नेताओं की धड़कनें
अंता विधानसभा उपचुनाव का राजनीतिक माहौल हर दिन और रोचक होता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने दो दिन पहले मोरपाल सुमन को अपना उम्मीदवार घोषित किया, लेकिन पार्टी के भीतर उठते बगावती सुरों ने चुनावी समीकरण को उलझा दिया है।
अंता विधानसभा उपचुनाव का राजनीतिक माहौल हर दिन और रोचक होता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने दो दिन पहले मोरपाल सुमन को अपना उम्मीदवार घोषित किया, लेकिन पार्टी के भीतर उठते बगावती सुरों ने चुनावी समीकरण को उलझा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की पसंद वाले मोरपाल सुमन के लिए बीजेपी की राह अब आसान नहीं रही। आज दोपहर करीब 12:30 बजे पार्टी से नाराज पूर्व विधायक रामपाल मेघवाल ने अंता विधानसभा से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में नामांकन करने की घोषणा की, जिससे चुनावी पारा और चढ़ गया है।

भाजपा के पुराने नेता और बारां-अटरू सीट से पूर्व विधायक रामपाल मेघवाल ने साल 2018 से लगातार टिकट की मांग कर रहे थे। उनकी नाराजगी का कारण साल 2013 का निर्णय है जब उन्होंने 20,600 वोटों के अंतर से चुनाव जीतकर पार्टी को सफलता दिलाई थी, लेकिन सिटिंग विधायक होने के बावजूद पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। मेघवाल का कहना है कि पार्टी लगातार उन्हें दरकिनार कर रही है और 2018 के बाद 2023 में भी उन्हें मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा, “मैं किसी से झगड़ा नहीं करना चाहता, मैं सिर्फ अपना हक मांग रहा हूं। जब पार्टी ने टिकट नहीं दिया, तो मैंने स्वतंत्र रूप से अंता विधानसभा में चुनाव लड़ने का फैसला किया। इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।”
राजस्थान की राजनीति में इस सीट की अहमियत इस बात से भी जाहिर होती है कि अंता विधानसभा एकमात्र ऐसी सीट है, जहां पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं। चुनावी समीकरण को जातिगत आधार पर भी देखा जा रहा है। अंता विधानसभा में लगभग 60,000 अनुसूचित जाति के मतदाता हैं। हालांकि यह सीट जनरल वर्ग की है, लेकिन वोटिंग पैटर्न पर जातिगत प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। भाजपा के पूर्व विधायक रामपाल मेघवाल ने इसी वोट बैंक का ध्यान रखते हुए चुनावी ताल ठोकने का मन बना लिया है।
मोरपाल सुमन का नामांकन पत्र बारां-झालावाड़ के सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह ने दाखिल किया था। लेकिन मेघवाल की बागी रणनीति बीजेपी के लिए जीत का समीकरण बिगाड़ सकती है। पार्टी संगठन के नेताओं की कोशिशें मेघवाल को मनाने की फिलहाल सफल नहीं हो रही हैं। दो बार टिकट न मिलने का गुस्सा और पार्टी के साथ लगातार होने वाली उपेक्षा ने उन्हें दृढ़ बना दिया है कि इस बार वे अंता विधानसभा से चुनाव लड़ेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रामपाल मेघवाल का कदम बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होगा। मोरपाल सुमन को पार्टी का उम्मीदवार बनाकर उतारने से पार्टी को उम्मीद थी कि वसुंधरा राजे के समर्थन से सीट पर विजय सुनिश्चित होगी, लेकिन मेघवाल के बागी होने से मुकाबला और तीव्र हो गया है। अंता विधानसभा में इस उपचुनाव की किस्मत अब अनुसूचित जाति के मतदाताओं के रुझान और बागी उम्मीदवार की स्वीकार्यता पर टिकी है।

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Sachin Sharmaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




