
राजस्थान का बजट कल, उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी पेश करेंगी बजट, इन मुद्दों पर टिकी रहेंगी सूबे की नजरें
राजस्थान विधानसभा में 11 फरवरी को वित्त मंत्री एवं उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी राज्य बजट पेश करेंगी। बजट से पहले प्रदेश के 41 जिलों से सामने आई जमीनी हकीकत ने सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां और उतनी ही बड़ी उम्मीदें खड़ी कर दी हैं।
राजस्थान विधानसभा में 11 फरवरी को वित्त मंत्री एवं उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी राज्य बजट पेश करेंगी। बजट से पहले प्रदेश के 41 जिलों से सामने आई जमीनी हकीकत ने सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां और उतनी ही बड़ी उम्मीदें खड़ी कर दी हैं। शहरी और ग्रामीण—दोनों क्षेत्रों की जनता आज भी पानी, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार और पर्यावरण जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे में इस बजट को केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि जनआकांक्षाओं का बजट माना जा रहा है।
पिछले कई दिनों से राज्य सरकार की ओर से बजट को लेकर सुझाव मांगे जा रहे थे। विभिन्न सामाजिक संगठनों, उद्योग प्रतिनिधियों, किसान संगठनों और आम नागरिकों के साथ बैठकों के कई दौर चले। इन बैठकों और फीडबैक रिपोर्ट से साफ हुआ है कि प्रदेश की 8 करोड़ से अधिक आबादी इस बजट से राहत की उम्मीद लगाए बैठी है।
जल संकट सबसे बड़ी चिंता
राजस्थान के कई जिले आज भी भीषण जल संकट का सामना कर रहे हैं। बाड़मेर और जैसलमेर जैसे मरुस्थलीय जिलों में पेयजल की किल्लत गंभीर बनी हुई है। जालोर में अनियमित जल आपूर्ति आम समस्या है, तो सिरोही में जवाई बांध होने के बावजूद कई गांव प्यासे हैं। चूरू में नहरी पानी के अभाव से किसान संकट में हैं। अलवर में सिलीसेढ़ पेयजल योजना लंबित है, जबकि दौसा में ईआरसीपी से जुड़ी देरी लोगों की चिंता बढ़ा रही है। श्रीगंगानगर में भी नहरी पानी की अनियमित आपूर्ति से खेती प्रभावित हो रही है। बजट से इन जिलों में स्थायी जल समाधान की उम्मीद की जा रही है।
पर्यावरण और प्रदूषण का दबाव
औद्योगिक जिलों में प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन चुका है। भीलवाड़ा में औद्योगिक धुएं से हवा जहरीली होती जा रही है। खैरथल-तिजारा में फैक्ट्रियों से प्रदूषण का असर आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। बालोतरा में देश के बड़े पॉल्यूशन उद्योगों में शामिल होने के बावजूद आधारभूत सुविधाओं की भारी कमी है। पाली में टेक्सटाइल उद्योग का अपशिष्ट जल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, जबकि कोटा में चंबल नदी में गिरता गंदा पानी गंभीर पर्यावरण संकट पैदा कर रहा है। बजट में पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण पर ठोस घोषणाओं की मांग उठ रही है।
सड़क, यातायात और शहरी अव्यवस्था
राजधानी जयपुर में अनियंत्रित शहरीकरण आमजन के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। राजसमंद और भीलवाड़ा में बढ़ते यातायात दबाव से जाम की स्थिति बनती है। बारां में राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरता ट्रैफिक शहर को जाम में झोंक देता है। बहरोड़-कोटपूतली क्षेत्र में रिंग रोड के अभाव से यातायात व्यवस्था चरमरा रही है। उदयपुर में झीलों और हेरिटेज स्थलों पर बढ़ता दबाव चिंता का विषय है, वहीं भरतपुर में पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है।
स्वास्थ्य और प्रशासनिक ढांचे की कमी
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी कई जिलों से आवाज उठ रही है। प्रतापगढ़ में मेडिकल कॉलेज अधूरा है, जबकि फलोदी में मेडिकल कॉलेज की लंबे समय से मांग की जा रही है। हनुमानगढ़ में मिनी सचिवालय नहीं होने से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता है। नागौर जैसे बड़े जिले में भी प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की जरूरत बताई जा रही है।
रोजगार और पलायन का दर्द
धौलपुर, डूंगरपुर, बूंदी और चूरू जैसे जिलों में उद्योगों और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण पलायन बड़ी समस्या बन चुका है। कहीं उद्योगों का अभाव है, तो कहीं कृषि संकट ने रोजगार को प्रभावित किया है। युवाओं की उम्मीदें इस बजट से जुड़ी हैं कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हों।
बजट से बड़ी उम्मीदें
पत्रिका की इस फीडबैक रिपोर्ट में साफ है कि प्रदेश का हर जिला अपनी अलग जरूरत के साथ सरकार की ओर देख रहा है। कहीं पानी और सड़क प्राथमिकता है, तो कहीं स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार। कुल मिलाकर यह बजट राजस्थान की बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए एक रोडमैप साबित हो सकता है। अब सबकी नजरें 11 फरवरी पर टिकी हैं, जब दीया कुमारी का बजट यह तय करेगा कि सरकार इन जमीनी मुद्दों पर कितना खरा उतरती है।

लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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