राजस्थान के भिवाड़ी ब्लास्ट में झुलसे 7 मजदूरों की अब DNA से होगी शिनाख्त
बिहार के मोतिहारी से करीब एक हजार किलोमीटर दूर राजस्थान की औद्योगिक नगरी में बेहतर भविष्य की तलाश में आए सात मजदूरों की जिंदगी एक भीषण धमाके ने छीन ली। खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में रेडिमेड गारमेंट फैक्ट्री की आड़ में चल रही

बिहार के मोतिहारी से करीब एक हजार किलोमीटर दूर राजस्थान की औद्योगिक नगरी में बेहतर भविष्य की तलाश में आए सात मजदूरों की जिंदगी एक भीषण धमाके ने छीन ली। खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में रेडिमेड गारमेंट फैक्ट्री की आड़ में चल रही अवैध पटाखा यूनिट में हुए विस्फोट के बाद हालात इतने भयावह हैं कि शवों की पहचान भी संभव नहीं हो पा रही। अब मृतकों की शिनाख्त डीएनए और दांतों के सैंपल के जरिए की जाएगी।
30 हजार की नौकरी का सपना, डेढ़ महीने में खत्म
जानकारी के मुताबिक सभी मजदूर बिहार के मोतिहारी इलाके के रहने वाले थे। करीब डेढ़ महीने पहले ही उन्होंने यहां काम शुरू किया था। उन्हें 30 हजार रुपये महीने की सैलरी का लालच दिया गया था। परिवारों को उम्मीद थी कि बेटे-भाई की कमाई से घर की किस्मत बदलेगी, लेकिन नियति ने कुछ और ही तय कर रखा था।
मृतकों में एक युवक ऐसा भी था जिसकी शादी को महज दस महीने हुए थे। खुशहाल जिंदगी के सपने के साथ आया वह युवक अब राख में बदल चुका है। धमाका इतना भीषण था कि कई शव कंकाल जैसी अवस्था में मिले। पुलिस के अनुसार, पहचान करना लगभग असंभव हो गया है।
गारमेंट फैक्ट्री के नाम पर बारूद का खेल
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री कागजों में ‘रेडिमेड गारमेंट’ यूनिट के रूप में दर्ज थी, जबकि अंदर अवैध रूप से पटाखे तैयार किए जा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों और बचे मजदूरों ने बताया कि 16 मजदूर अलग-अलग टेबल पर काम कर रहे थे। हर टेबल पर करीब 10-10 किलो बारूद और केमिकल खुले में रखा था। पास के कमरे में सैकड़ों किलो विस्फोटक सामग्री का स्टॉक जमा था।
आग लगते ही एक के बाद एक तीन जोरदार धमाके हुए। विस्फोट की तीव्रता इतनी थी कि फैक्ट्री की दीवारें ढह गईं और आसपास के इलाके में कांच के परखच्चे उड़ गए। धमाके के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई।
सिस्टम पर सवाल
मजदूरों के बयान सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। फैक्ट्री में न तो अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम थे और न ही विस्फोटक सामग्री के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था। खुले में बारूद और केमिकल के साथ काम कराया जा रहा था। सवाल यह भी उठ रहा है कि औद्योगिक क्षेत्र में इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री कैसे जमा की गई और स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
FIR दर्ज, मालिक फरार
मृतक मिन्टू के भाई राजकिशोर की शिकायत पर पुलिस ने फैक्ट्री मालिक राजेंद्र कुमार, हेमंत शर्मा, मैनेजर अभिनंदन और ठेकेदार अजीत के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है।
घटना के तुरंत बाद मुख्य आरोपी राजेंद्र कुमार मोबाइल बंद कर फरार हो गया। पुलिस टीमें उसकी तलाश में उत्तर प्रदेश रवाना हो चुकी हैं। मैनेजर अभिनंदन को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।
DNA और दांतों के सैंपल से पहचान
खैरथल एसपी मनीष कुमार ने बताया कि एफएसएल टीम ने घटनास्थल से सैंपल एकत्र किए हैं। शव पूरी तरह जल चुके हैं, इसलिए पारंपरिक पहचान संभव नहीं है। अब फॉरेंसिक लैब में डीएनए प्रोफाइलिंग और दांतों के सैंपल के जरिए मृतकों की शिनाख्त सुनिश्चित की जाएगी।
परिजनों से भी डीएनए सैंपल लिए जाएंगे, ताकि मिलान कर अंतिम पुष्टि की जा सके। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।
सात परिवारों पर टूटा कहर
इस हादसे ने बिहार के सात परिवारों की दुनिया उजाड़ दी है। गांवों में मातम पसरा है। जिन घरों में कुछ महीने पहले तक नए सपनों की बातें होती थीं, वहां अब सन्नाटा है।
भिवाड़ी का यह हादसा सिर्फ एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि अवैध गतिविधियों और प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर संकेत है। डीएनए रिपोर्ट का इंतजार जहां परिवारों की पहचान की पीड़ा को खत्म करेगा, वहीं यह मामला यह भी तय करेगा कि जिम्मेदारों पर कब और कितनी सख्त कार्रवाई होती है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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