भांग खाकर स्कूल खोल दिए…शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बयान से राजस्थान विधानसभा में हंगामा
राजस्थान विधानसभा में सोमवार को शिक्षा व्यवस्था और महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पद सृजन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

राजस्थान विधानसभा में सोमवार को शिक्षा व्यवस्था और महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पद सृजन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच आरोप-प्रत्यारोप इतने तीखे हो गए कि सदन का माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया। बहस के दौरान पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का भी जिक्र आया और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाए।
स्कूलों में पद सृजन को लेकर छिड़ी बहस
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक बालकनाथ ने पिछली कांग्रेस सरकार के समय खोले गए महात्मा गांधी सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में रिक्त पदों को लेकर सवाल उठाया। इसके जवाब में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने बड़ी संख्या में स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में बदल तो दिया, लेकिन उनमें पढ़ाने के लिए शिक्षकों के नए पद सृजित नहीं किए गए।
दिलावर ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने 3,737 स्कूलों को महात्मा गांधी सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में बदल दिया, लेकिन एक भी नया शिक्षक पद स्वीकृत नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि कई जगह ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई, जो स्वयं अंग्रेजी माध्यम से पढ़े हुए नहीं थे। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ा।
“भांग खाकर स्कूल खोल दिए” बयान से बढ़ा विवाद
बहस के दौरान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “क्या जीरो बच्चों पर भी स्कूल चलते हैं? क्या दस बच्चों पर भी स्कूल चलाए जाते हैं? पिछली सरकार के समय भांग खाकर स्कूल खोल दिए गए।” उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का नाम लेते हुए कहा कि बिना संसाधनों के स्कूल खोलने का फैसला गलत था।
मंत्री के इस बयान पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पलटवार करते हुए कहा कि जिस तरीके से मंत्री बात कर रहे हैं, ऐसा लगता है कि जवाब ही भांग खाकर दिया जा रहा है। इसके बाद दिलावर, जूली और डोटासरा के बीच सदन में काफी देर तक तीखी नोकझोंक चलती रही।
छोटे स्कूलों के अधिकार पर विपक्ष का तर्क
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि 10 से 20 छात्रों वाले स्कूलों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि मौजूदा नीतियों के कारण स्कूलों में ड्रॉपआउट की समस्या बढ़ रही है। जूली ने कहा कि पिछली सरकार का उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बच्चों को बेहतर शिक्षा देना था, इसलिए वहां अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोले गए।
इस पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जवाब देते हुए कहा कि जब गोविंद सिंह डोटासरा शिक्षा मंत्री थे, तब उन्होंने केवल लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र में ही 203 स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में बदल दिया, लेकिन उनके लिए जरूरी पद और संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार अब इन स्कूलों में आवश्यक पदों को स्वीकृत कर योग्य शिक्षकों की नियुक्ति कर रही है, ताकि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।
खेल विभाग में लंबे समय बाद भर्ती की घोषणा
विधानसभा में शिक्षा के साथ-साथ खेल विभाग को लेकर भी महत्वपूर्ण घोषणा की गई। निर्दलीय विधायक युनूस खान के सवाल के जवाब में खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने बताया कि प्रदेश में खेल प्रशिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
उन्होंने कहा कि 2012 के बाद पहली बार खेल विभाग में भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई है। इसके तहत 140 स्थायी कोच की भर्ती के लिए वित्त विभाग से मंजूरी मिल चुकी है और कर्मचारी चयन बोर्ड इसके लिए आगे की कार्रवाई कर रहा है। इसके अलावा प्रदेश के खेल प्रशिक्षण केंद्रों में व्यवस्था मजबूत करने के लिए 700 अस्थायी कोच भी नियुक्त किए जाएंगे।
राठौड़ ने कहा कि इन भर्तियों से प्रदेश के अधिकांश खेल प्रशिक्षण केंद्रों पर प्रशिक्षक उपलब्ध हो सकेंगे और खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण मिल पाएगा। सरकार का लक्ष्य खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षकों की उपलब्धता को मजबूत करना है।
सदन में गरमाया माहौल
सोमवार को विधानसभा में हुई बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखे शब्दों का आदान-प्रदान हुआ। हालांकि बाद में सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई, लेकिन महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर शुरू हुई यह बहस प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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