ये पन्ने नहीं, रवन्ने हैं, बजट को विकसित राजस्थान का ट्रेलर बताकर MLA गोपाल शर्मा विधानसभा में गरजे
राजस्थान विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान शुक्रवार को सियासी पारा उस समय चरम पर पहुंच गया, जब सिविल लाइंस से विधायक गोपाल शर्मा ने सरकार के बजट को “विकसित राजस्थान का ट्रेलर” बताते हुए विपक्ष पर तीखे हमले शुरू कर दिए।

राजस्थान विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान शुक्रवार को सियासी पारा उस समय चरम पर पहुंच गया, जब सिविल लाइंस से विधायक गोपाल शर्मा ने सरकार के बजट को “विकसित राजस्थान का ट्रेलर” बताते हुए विपक्ष पर तीखे हमले शुरू कर दिए। करीब 15 मिनट के अपने जोशीले संबोधन में उन्होंने आंकड़ों की झड़ी लगाई, तो सत्ता पक्ष की मेजें लगातार थपथपाती रहीं, वहीं विपक्षी सदस्यों ने हंगामा और नारेबाजी के जरिए विरोध जताया।
महाराजा सूरजमल को नमन, इतिहास से शुरुआत
विधायक शर्मा ने अपने भाषण की शुरुआत महान जाट शासक महाराजा सूरजमल की 320वीं जयंती पर उन्हें नमन करते हुए की। उन्होंने सूरजमल को “मुगलों को धूल चटाने वाला योद्धा” बताते हुए कहा कि राजस्थान की धरती वीरों की परंपरा से जुड़ी है और आज का बजट उसी परंपरा को आगे बढ़ाने वाला दस्तावेज है।
“देश के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण बजट”
शर्मा ने दावा किया कि भारत के 78 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी राज्य का बजट उसकी जीडीपी का 32 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि विकसित राष्ट्रों में भी यह अनुपात 30 से 40 प्रतिशत के बीच रहता है। राज्य की 18.75 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था और 10.24 प्रतिशत विकास दर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान अब तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं की कतार में खड़ा है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 2 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है और पिछले दो वर्षों में इसमें 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उनके अनुसार यह “डबल इंजन सरकार” की नीतियों और वित्तीय अनुशासन का परिणाम है।
‘पन्ने नहीं, रवन्ने हैं’
विपक्ष द्वारा बजट को “सिर्फ पन्नों का पुलिंदा” बताए जाने पर पलटवार करते हुए शर्मा ने कहा, “ये पन्ने नहीं, रवन्ने हैं।” उन्होंने कहा कि 6.11 लाख करोड़ रुपये का यह ऐतिहासिक बजट प्रदेश को विकसित राजस्थान 2047 की दिशा में तेज रफ्तार से आगे बढ़ाएगा।
उन्होंने वर्ष 2023-24 के बजट से तुलना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में 73 प्रतिशत, ऊर्जा में 66 प्रतिशत, ग्रामीण विकास में 68 प्रतिशत, शिक्षा में 29 प्रतिशत और शहरी विकास में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। “यह आंकड़े खुद बोलते हैं, विपक्ष के पास इनका जवाब नहीं है,” उन्होंने कहा।
कांग्रेस पर सीधा प्रहार, सदन में हंगामा
सदन का माहौल तब और गरमा गया जब विधायक शर्मा ने कांग्रेस शासन को “लेन-देन वाली सरकार” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार के समय “ढाई लाख लाओ और सीमेंट फैक्ट्री ले जाओ” जैसी कथित प्रवृत्तियां चलीं। इस टिप्पणी पर विपक्षी सदस्य अपनी सीटों से खड़े हो गए और जोरदार विरोध दर्ज कराया।
शर्मा ने एक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि मैगसेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह ने उन्हें पत्र लिखकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री कमलनाथ द्वारा अरावली क्षेत्र में अवैध खनन के मुद्दे को उठाने का आग्रह किया था। इस दावे पर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई और सदन में शोर-शराबा बढ़ गया।
उन्होंने जोधपुर से जुड़े एक पुराने मामले का जिक्र करते हुए ‘काले हिरण के शिकारी’ को सरकारी गाड़ी में घुमाने और उसके बचाव में कांग्रेस द्वारा केस लड़ने का आरोप भी लगाया। इस बयान के बाद सदन में हंगामा चरम पर पहुंच गया और कुछ समय के लिए कार्यवाही बाधित होने जैसी स्थिति बन गई।
सत्ता पक्ष की तालियां, विपक्ष की नाराजगी
शर्मा के पूरे भाषण के दौरान सत्ता पक्ष के सदस्य मेजें थपथपाकर समर्थन जताते रहे। दूसरी ओर विपक्षी सदस्यों ने बीच-बीच में टोका-टाकी और नारेबाजी की। अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद ही माहौल कुछ शांत हुआ।
अपने संबोधन के अंत में गोपाल शर्मा ने कहा, “यह बजट सिर्फ शुरुआत है, विकसित राजस्थान की पूरी पिक्चर अभी बाकी है। जब परिणाम सामने आएंगे, तब विपक्ष में और खलबली मचेगी।”
सदन में बजट पर बहस जारी है, लेकिन शुक्रवार की कार्यवाही ने यह स्पष्ट कर दिया कि आगामी दिनों में बजट को लेकर सियासी टकराव और तेज होने वाला है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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