
राजस्थान के अंता में त्रिकोणीय मुकाबला, बीजेपी ने मोरपाल सुमन को दिया टिकट
संक्षेप: अंता विधानसभा सीट पर आगामी उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मोरपाल सुमन को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। मोरपाल वर्तमान में बारां पंचायत समिति के प्रधान हैं
अंता विधानसभा सीट पर आगामी उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मोरपाल सुमन को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। मोरपाल वर्तमान में बारां पंचायत समिति के प्रधान हैं और स्थानीय होने के साथ ही लो प्रोफाइल नेता के रूप में जाने जाते हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मोरपाल का नाम कई महीनों की मंथन और सभी नेताओं के विचार विमर्श के बाद फाइनल किया गया। उनके पक्ष में यह भी देखा गया कि जातिगत समीकरणों के लिहाज से वे अंता विधानसभा क्षेत्र के लिए उपयुक्त उम्मीदवार हैं।

बीजेपी की टिकट वितरण रणनीति में सैनी समाज का ध्यान रखा गया है। मोरपाल सुमन भी सैनी समाज से हैं, और अंता में सैनी समाज के प्रभाव को देखते हुए पार्टी ने यह कदम उठाया। इसके अलावा, मोरपाल को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नजदीकी नेताओं में माना जाता है, जिससे उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत मानी जा रही है।
इस सीट पर कांग्रेस ने पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा, नरेश मीणा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव में उतर रहे हैं। ऐसे में अंता विधानसभा में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना बन रही है, जिसमें स्थानीय राजनीति और जातीय समीकरण निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
अंता विधानसभा सीट पिछले साल मई में खाली हुई थी। पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा की विधायकी 20 साल पुराने मामले में सजा होने के बाद रद्द कर दी गई थी। कंवरलाल पर एसडीएम के खिलाफ पिस्टल तानने का आरोप था, जिसके चलते उनकी सदस्यता समाप्त हुई। इसके बाद इस सीट पर छह महीने के भीतर उपचुनाव आयोजित करना अनिवार्य हो गया।
वोटर तैयारियों की बात करें तो अंता में कुल 2,26,227 वोटर हैं, जिनमें 1,15,982 पुरुष, 1,10,241 महिला और 4 अन्य वोटर शामिल हैं। उपचुनाव की तैयारियों के लिए वोटर लिस्ट में अपडेशन अभियान भी चलाया गया, जिसके दौरान 1,336 नए वोटर जुड़े। फाइनल वोटर लिस्ट 1 अक्टूबर को प्रकाशित हुई थी, जिससे सभी दलों को आगामी चुनाव में रणनीति बनाने में मदद मिली।
राजस्थान में पिछले कुछ सालों में हुए उपचुनावों के रुझानों को देखें तो बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर रहा है। बीजेपी ने अब तक हुए सात उपचुनावों में पांच सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई है, जबकि कांग्रेस को केवल एक सीट पर सफलता मिली। खींवसर, देवली-उनियारा, झुंझुनूं, रामगढ़ और सलूंबर में बीजेपी की जीत हुई थी। वहीं कांग्रेस और हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी को इन चुनावों में भारी नुकसान उठाना पड़ा।
विश्लेषकों के अनुसार, अंता उपचुनाव का परिणाम सरकार की स्थायित्व पर प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं डालेगा, लेकिन यह राजनीतिक माहौल और जनता के नजरिए को प्रभावित करेगा। अगर बीजेपी यहां जीत दर्ज करती है तो इसे सरकार की कामकाजी छवि पर जनता की मुहर के रूप में पेश किया जाएगा। वहीं, अगर कांग्रेस या निर्दलीय उम्मीदवार विजयी होते हैं, तो विपक्ष के लिए हमलावर होने का अवसर बनेगा।

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Sachin Sharmaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




