
राजस्थान: अंता बनेगा बीजेपी की साख का इम्तिहान, संगठन ने उतारी स्टार प्रचारकों की पूरी फौज
अंता विधानसभा उपचुनाव अब सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा की जंग बन गया है। पार्टी ने अपने सबसे बड़े दांव के रूप में 40 स्टार प्रचारकों की लंबी सूची जारी कर दी है
अंता विधानसभा उपचुनाव अब सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा की जंग बन गया है। पार्टी ने अपने सबसे बड़े दांव के रूप में 40 स्टार प्रचारकों की लंबी सूची जारी कर दी है — और यह सूची बताती है कि संगठन इस सीट को हर हाल में जीतना चाहता है। मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्री, प्रदेश प्रभारी से लेकर पुराने दिग्गजों तक — बीजेपी ने अंता के रण में अपनी पूरी फौज उतार दी है।

जारी सूची में सबसे आगे हैं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, जो चुनावी रणनीति का नेतृत्व करेंगे। इनके साथ प्रदेश प्रभारी डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल और भागीरथ चौधरी जैसे चेहरे भी मतदाताओं के बीच पार्टी का संदेश पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
प्रदेश स्तर पर पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और प्रेमचंद बेरवा, वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़, सतीश पूनिया, सीपी जोशी और अलका सिंह गुर्जर को भी मैदान में उतारा है। इन नेताओं का उद्देश्य साफ है — संगठन की मजबूती और मतदाताओं में बीजेपी के प्रति भरोसे को और मजबूत करना।
बीजेपी ने इस बार अनुभव और युवा जोश का एक ऐसा मिश्रण तैयार किया है जो स्थानीय समीकरणों को साधने में अहम भूमिका निभा सकता है। पार्टी ने अपने अनुभवी नेताओं में किरोड़ी लाल मीणा, घनश्याम तिवारी, राजेंद्र गहलोत और अरुण चतुर्वेदी को भी शामिल किया है।
इनके साथ ही नए और स्थानीय चेहरों को भी स्टार प्रचारकों की सूची में जगह दी गई है। इनमें मंत्री कनकमल कटारा, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, राधेश्याम बेरवा, महेंद्रजीत सिंह मालवीय, हेमंत मीणा, अविनाश गहलोत, प्रभुलाल सैनी और कल्पना सिंह जैसे नेता शामिल हैं।
इसके अलावा स्थानीय प्रभाव वाले नेताओं में बाबूलाल खराड़ी, नरेंद्र नागर, कन्हैयालाल चौधरी, दुष्यंत सिंह, डॉ. मन्नालाल रावत, मोतीलाल मीणा, हीरालाल नागर, मुकेश दाधीच, ओमप्रकाश भड़ाना, गौतम दक, जोगाराम पटेल, बाबूलाल वर्मा, जितेंद्र गोठवाल और ललित मीणा को भी प्रचार अभियान में अहम जिम्मेदारी दी गई है।
बीजेपी की इस रणनीति से साफ झलकता है कि पार्टी ने अंता उपचुनाव को केवल एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि अपनी साख का सवाल मान लिया है। प्रदेश में सत्ता में आने के बाद यह उपचुनाव पार्टी के लिए पहली बड़ी परीक्षा है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।
40 स्टार प्रचारकों की यह टीम केवल भाषण देने नहीं, बल्कि माइक्रो मैनेजमेंट के जरिए बूथ स्तर तक मतदाताओं से संवाद बनाने की जिम्मेदारी निभाएगी। पार्टी का फोकस अंता के जातीय और स्थानीय समीकरणों को साधने पर है — ताकि विपक्ष के लिए कोई भी गलियारा खुला न रह जाए।
राजस्थान की राजनीति पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि अंता उपचुनाव न केवल स्थानीय बल्कि प्रदेश स्तरीय सियासत की दिशा तय कर सकता है। बीजेपी के लिए यह सीट सत्ता में आने के बाद जनता के मूड को समझने का अवसर भी है।

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