राजस्थान में ACB का बड़ा एक्शन,PWD इंजीनियर- दलाल 33 लाख की रिश्वत लेते दबोचा

Sachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक बड़े रैकेट का खुलासा करते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के एक्सईएन और एक दलाल को 33 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई जयपुर और झुंझुनूं में एक साथ की गई

राजस्थान में ACB का बड़ा एक्शन,PWD इंजीनियर- दलाल 33 लाख की रिश्वत लेते दबोचा

राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक बड़े रैकेट का खुलासा करते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के एक्सईएन और एक दलाल को 33 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई जयपुर और झुंझुनूं में एक साथ की गई, जिससे साफ हो गया कि सरकारी सिस्टम में इंजीनियर और प्राइवेट एजेंट की मिलीभगत से बड़े स्तर पर खेल चल रहा था।

अलाइनमेंट बदलने के नाम पर करोड़ों का खेल

एसीबी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि झुंझुनूं में स्टेट हाईवे को नेशनल हाईवे से जोड़ने के लिए प्रस्तावित सड़क के अलाइनमेंट में बदलाव के नाम पर यह रिश्वत मांगी गई थी। शिकायतकर्ता की खातेदारी जमीन को पहले सड़क में शामिल किया गया और बाद में उसे बाहर निकालने का झांसा देकर मोटी रकम की मांग की गई।

बताया जा रहा है कि जिस जमीन को बाहर करने की बात हो रही थी, उसकी बाजार कीमत 3 से 4 करोड़ रुपए के बीच थी। इसी का फायदा उठाते हुए आरोपियों ने पहले 75 लाख रुपए की डिमांड की, जो बाद में 33 लाख रुपए में तय हुई।

जयपुर में दलाल ट्रैप, झुंझुनूं में इंजीनियर गिरफ्तार

एसीबी की टीम ने शुक्रवार रात करीब 8 बजे जयपुर की चौमूं पुलिया के पास ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया। शिकायतकर्ता तय प्लान के मुताबिक रिश्वत की रकम लेकर पहुंचा। जैसे ही दलाल याकूब अली ने पैसे लिए और गाड़ी में बैठा, शिकायतकर्ता ने कार का इंडिकेटर जलाकर टीम को संकेत दिया।

संकेत मिलते ही एसीबी ने मौके पर दबिश देकर याकूब को 33 लाख रुपए के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया।

इसी के समानांतर झुंझुनूं में दूसरी टीम ने कार्रवाई करते हुए PWD के एक्सईएन राकेश कुमार को उसके घर से हिरासत में ले लिया। जांच में सामने आया कि याकूब यह रकम एक्सईएन तक पहुंचाने वाला था।

कंपनी-इंजीनियर-एजेंट की तिकड़ी पर शक

मामले में एक और अहम कड़ी सामने आई है। रोड अलाइनमेंट का सर्वे और डिजाइन का काम एक प्राइवेट कंपनी को दिया गया था, जिसके प्रतिनिधि के तौर पर याकूब अली काम कर रहा था।

एसीबी को शक है कि यह केवल एक मामला नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसमें सरकारी इंजीनियर, प्राइवेट कंपनी और बिचौलिये मिलकर जमीन मालिकों को टारगेट कर रहे थे।

गजट नोटिफिकेशन में अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में शामिल याकूब की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जिससे जांच और गहरी हो सकती है।

मोबाइल कॉल और डिलीवरी प्लान से खुली साजिश

ट्रैप के दौरान यह भी सामने आया कि रिश्वत लेने के तुरंत बाद याकूब ने एक्सईएन राकेश कुमार से मोबाइल पर बात की थी। योजना के मुताबिक, यह रकम अगले दिन झुंझुनूं के चिड़ावा में एक्सईएन को सौंपी जानी थी।

यानी पूरा ऑपरेशन प्लानिंग के तहत किया जा रहा था, जिसमें रिश्वत की डिलीवरी के लिए अलग-अलग लोकेशन और समय तय किया गया था।

ACB की सख्ती, बढ़ सकती हैं गिरफ्तारियां

एडिशनल एसपी संदीप सारस्वत के अनुसार, यह कार्रवाई पुख्ता शिकायत और सत्यापन के बाद की गई है। फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और इस पूरे मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

संभावना जताई जा रही है कि इस केस में और भी अधिकारी या एजेंट सामने आ सकते हैं।

सिस्टम में जड़ें जमाए भ्रष्टाचार का संकेत

यह मामला केवल एक रिश्वतखोरी का केस नहीं, बल्कि सरकारी प्रोजेक्ट्स में चल रहे संभावित संगठित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। जमीन अधिग्रहण और अलाइनमेंट जैसे तकनीकी फैसलों का दुरुपयोग कर आम लोगों को फंसाने और उनसे करोड़ों की वसूली करने का यह मॉडल गंभीर चिंता का विषय है।

एसीबी की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अब ऐसे नेटवर्क पर शिकंजा कसने की शुरुआत हो चुकी है।

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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