PM मोदी 21 अप्रैल को राजस्थान आएंगे, पचपदरा रिफाइनरी का करेंगे उद्घाटन
राजस्थान के बालोतरा जिले में स्थित पचपदरा रिफाइनरी के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। करीब 79 हजार करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस मेगा प्रोजेक्ट को राज्य के औद्योगिक विकास की दिशा में बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

राजस्थान के बालोतरा जिले में स्थित पचपदरा रिफाइनरी के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। करीब 79 हजार करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस मेगा प्रोजेक्ट को राज्य के औद्योगिक विकास की दिशा में बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। खास बात यह है कि पीएम मोदी दो महीने के भीतर दूसरी बार राजस्थान दौरे पर आ रहे हैं, जिससे राज्य की विकास परियोजनाओं को लेकर केंद्र की सक्रियता भी साफ झलकती है।
मारवाड़ के लिए गेमचेंजर साबित होगी रिफाइनरी
पचपदरा रिफाइनरी केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि पश्चिमी राजस्थान के आर्थिक परिदृश्य को बदलने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है। इस रिफाइनरी के शुरू होने से बाड़मेर और जैसलमेर जैसे सीमावर्ती जिलों में इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित होने की संभावनाएं तेज होंगी। इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और सहायक उद्योगों को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
कमर्शियल उत्पादन की तैयारी पूरी
रिफाइनरी के पहले चरण को लेकर जनवरी 2026 से ही ट्रायल रन की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। इसमें कच्चे तेल के प्रसंस्करण की प्रक्रिया का परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, उद्घाटन के बाद जल्द ही यहां कमर्शियल उत्पादन भी शुरू हो जाएगा, जिससे राज्य को आर्थिक रूप से प्रत्यक्ष लाभ मिलने लगेगा।
दो बार हुआ शिलान्यास, कई बार बढ़ी लागत
पचपदरा रिफाइनरी परियोजना का इतिहास भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इसका पहला शिलान्यास 22 सितंबर 2013 को Sonia Gandhi ने किया था, जब प्रदेश में Ashok Gehlot के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार थी। उस समय परियोजना की लागत करीब 37,230 करोड़ रुपए आंकी गई थी।
इसके बाद सत्ता परिवर्तन के बाद परियोजना की शर्तों में बदलाव हुआ और 16 जनवरी 2018 को प्रधानमंत्री Narendra Modi ने दोबारा इसका औपचारिक शुभारंभ किया। उस समय लागत बढ़कर 43,129 करोड़ रुपए हो गई थी।
हालांकि, समय के साथ लागत में लगातार इजाफा होता गया। जून 2023 में यह बढ़कर 72,937 करोड़ रुपए पहुंच गई, जबकि Bhajan Lal Sharma के कार्यकाल में जुलाई 2025 में संशोधित प्रस्ताव के बाद इसकी कुल लागत 79,459 करोड़ रुपए हो गई।
यह रिफाइनरी Hindustan Petroleum Corporation Limited और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है, जिसे एचआरआरएल (HPCL Rajasthan Refinery Limited) के तहत विकसित किया जा रहा है।
पर्यावरण के लिहाज से आधुनिक तकनीक
पचपदरा रिफाइनरी देश की सबसे आधुनिक बीएस-6 मानक वाली रिफाइनरी में शामिल है। यहां रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्पलेक्स को एक साथ विकसित किया गया है। इसकी खासियत ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ तकनीक है, यानी क्रूड ऑयल प्रोसेसिंग के दौरान किसी भी प्रकार का तरल कचरा बाहर नहीं छोड़ा जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
9 मिलियन टन रिफाइनिंग क्षमता
रिफाइनरी की सालाना रिफाइनिंग क्षमता 9 मिलियन टन कच्चे तेल की है। इसके अलावा यहां 2 मिलियन टन क्षमता का पेट्रोकेमिकल प्लांट भी स्थापित किया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 7.5 मिलियन टन कच्चा तेल अरब देशों से आयात किया जाएगा, जबकि करीब 1.5 मिलियन टन कच्चा तेल राजस्थान में उत्पादित होगा।
रेल कनेक्टिविटी से बढ़ेगा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क
रिफाइनरी के संचालन के साथ ही माल ढुलाई में भी बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है। इसे ध्यान में रखते हुए बालोतरा से पचपदरा के बीच बंद पड़ी रेल लाइन को फिर से शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत करीब 12 किलोमीटर लंबी नई रेलवे लाइन बिछाई जाएगी, जिससे रिफाइनरी साइट तक सीधी कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
दो महीने में दूसरी बार राजस्थान दौरा
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi इससे पहले 28 फरवरी 2026 को Ajmer आए थे, जहां उन्होंने 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया था और 21 हजार से ज्यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे थे।
कुल मिलाकर, पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन न केवल एक औद्योगिक परियोजना की शुरुआत है, बल्कि यह पश्चिमी राजस्थान के विकास, रोजगार और निवेश के नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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