ऑर्डर नहीं, फिर भी दौड़ती गाड़ियां! राजस्थान में अधिकारियों के खिलाफ कर्मचारी संघ ने खोला मोर्चा
राजस्थान में सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता दिख रहा है। अखिल राजस्थान राज्य वाहन चालक एवं तकनीकी कर्मचारी संघ ने राज्य के विभिन्न विभागों के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा है।

राजस्थान में सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता दिख रहा है। अखिल राजस्थान राज्य वाहन चालक एवं तकनीकी कर्मचारी संघ ने राज्य के विभिन्न विभागों के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा है। संघ का दावा है कि बिना अनुमति और नियमों की अनदेखी कर राजकीय वाहनों का इस्तेमाल निजी और अनधिकृत यात्राओं में किया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजयवीर सिंह ने इस मुद्दे को “व्यवस्था में बढ़ती लापरवाही और जवाबदेही की कमी” का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अधिकारीगण अपने कार्यक्षेत्र से बाहर सरकारी वाहनों का उपयोग कर रहे हैं, जबकि इसके लिए विभागाध्यक्ष, प्रमुख शासन सचिव या संभागीय आयुक्त की पूर्व लिखित अनुमति अनिवार्य है।
नियमों की अनदेखी, बढ़ता खर्च
ज्ञापन में उल्लेखित वित्त विभाग के परिपत्र का हवाला देते हुए संघ ने आरोप लगाया कि इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। बिना स्वीकृति के यात्राएं किए जाने से न केवल ईंधन की खपत बढ़ रही है, बल्कि वाहन रखरखाव और अन्य प्रशासनिक खर्चों में भी अनावश्यक वृद्धि हो रही है।
संघ ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चल रही ईंधन बचत की अपील से भी जोड़ा। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अनावश्यक ईंधन खपत कम करने और सरकारी तंत्र में सादगी लाने की बात कही गई थी। ऐसे में राज्य स्तर पर इस प्रकार की लापरवाही सवाल खड़े करती है।
चालकों पर दबाव और सुरक्षा का सवाल
मामले का एक संवेदनशील पहलू वाहन चालकों की स्थिति को लेकर भी सामने आया है। संघ का कहना है कि नियमानुसार प्रत्येक यात्रा का आदेश (ट्रैवल ऑर्डर) चालक को दिया जाना जरूरी है, ताकि दुर्घटना या किसी अन्य आपात स्थिति में चालक के पास वैध दस्तावेज हों। लेकिन कई मामलों में ऐसा नहीं किया जा रहा।
संघ के अनुसार, बिना आदेश यात्रा कराने के बाद कुछ अधिकारी चालकों पर लॉगबुक में गलत प्रविष्टियां दर्ज करने का दबाव बनाते हैं। ऐसा करने से इनकार करने पर चालकों को प्रताड़ना और अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। इससे कर्मचारियों में भय और असुरक्षा का माहौल बन रहा है।
पहले भी उठ चुका है मुद्दा
यह पहला मौका नहीं है जब इस मुद्दे को उठाया गया हो। संघ ने बताया कि 5 मई 2025 को भी इसी विषय पर ज्ञापन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई या स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए। इससे कर्मचारियों में नाराजगी और बढ़ गई है।
सख्त निर्देशों की मांग
संघ ने मुख्य सचिव से मांग की है कि इस पूरे मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर स्पष्ट और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि बिना अनुमति वाहन उपयोग पर जवाबदेही तय हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
संघ का कहना है कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह न केवल सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को बढ़ावा देगा, बल्कि निचले स्तर के कर्मचारियों के मनोबल को भी प्रभावित करेगा।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
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