महिला अपराधों में राजस्थान अव्वल,NCRB रिपोर्ट में जयपुर सबसे असुरक्षित शहर
रेगिस्तान की धरती राजस्थान एक बार फिर राष्ट्रीय अपराध आंकड़ों में सबसे ऊपर पहुंच गई है, लेकिन इस बार यह उपलब्धि नहीं बल्कि चिंता और शर्म का विषय है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2024 की रिपोर्ट ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के दावों की परतें खोल दी हैं।

रेगिस्तान की धरती राजस्थान एक बार फिर राष्ट्रीय अपराध आंकड़ों में सबसे ऊपर पहुंच गई है, लेकिन इस बार यह उपलब्धि नहीं बल्कि चिंता और शर्म का विषय है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2024 की रिपोर्ट ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के दावों की परतें खोल दी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में राजस्थान पूरे देश में पहले स्थान पर है।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर 12.2 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत महज 4.3 प्रतिशत है। यानी राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराध देश के औसत से लगभग तीन गुना ज्यादा हैं। यह आंकड़ा सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
दुष्कर्म के आंकड़ों ने बढ़ाई दहशत
रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में राजस्थान में दुष्कर्म के 4,871 मामले दर्ज किए गए। हालांकि 2023 की तुलना में इनमें 4.08 प्रतिशत की मामूली कमी जरूर आई है, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश का देश में शीर्ष पर बने रहना गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते महिला अपराध न केवल सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि महिलाओं के भीतर असुरक्षा की भावना भी गहरा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक अपराध का ग्राफ लगातार ऊंचा बना हुआ है।
जयपुर बना देश का सबसे असुरक्षित महानगर
राजधानी जयपुर की स्थिति भी कम भयावह नहीं है। NCRB की रिपोर्ट में देश के 19 बड़े महानगरों का विश्लेषण किया गया, जिसमें जयपुर अपराध दर के मामले में सबसे ऊपर रहा। प्रति लाख आबादी पर महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर 34.3 प्रतिशत दर्ज की गई, जो देश के किसी भी बड़े शहर से अधिक है।
जयपुर के अलग-अलग पुलिस जिलों के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं—
जयपुर ईस्ट जिला – 163 मामले
जयपुर साउथ जिला – 132 मामले
जयपुर वेस्ट जिला – 129 मामले
जयपुर नॉर्थ जिला – 73 मामले
इन आंकड़ों ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है। सवाल उठ रहे हैं कि स्मार्ट सिटी और हाईटेक पुलिसिंग के दावों के बावजूद महिलाएं आखिर कितनी सुरक्षित हैं।
बच्चों और बुजुर्गों पर भी बढ़े अपराध
NCRB रिपोर्ट सिर्फ महिला अपराधों तक सीमित नहीं रही। इसमें बच्चों और बुजुर्गों के खिलाफ बढ़ते अपराधों का भी जिक्र किया गया है। देशभर में बच्चों के खिलाफ अपराधों में 5.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। वर्ष 2024 में कुल 1,87,702 मामले सामने आए, जिनमें सबसे अधिक केस अपहरण के रहे।
बाल अपराध के मामलों में महाराष्ट्र 24,171 केस के साथ पहले और उत्तर प्रदेश 22,222 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। वहीं बुजुर्गों के खिलाफ अपराधों में भी लगातार इजाफा दर्ज किया गया है। कर्नाटक में ऐसे मामलों में ढाई गुना तक वृद्धि देखने को मिली।
साइबर अपराध का नया खतरा
देश में साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 में 1,01,928 साइबर क्राइम के मामले दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 17.9 प्रतिशत अधिक हैं। ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, डिजिटल अरेस्ट और बैंकिंग फ्रॉड जैसे मामलों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
महानगरों में बेंगलुरु साइबर अपराध का सबसे बड़ा केंद्र बनकर सामने आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल इंडिया के दौर में साइबर सुरक्षा अब सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
सड़क हादसों में दिल्ली सबसे खतरनाक
रिपोर्ट में सड़क दुर्घटनाओं को लेकर भी चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राजधानी दिल्ली सड़क हादसों के मामले में सबसे घातक शहर साबित हुई। यहां 2,000 सड़क दुर्घटनाओं में 1,658 लोगों की मौत दर्ज की गई।
NCRB की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि अपराध अब सिर्फ पारंपरिक रूप तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक, डिजिटल और सार्वजनिक सुरक्षा के हर क्षेत्र में खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं। राजस्थान के लिए यह रिपोर्ट एक चेतावनी है कि यदि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र में प्रभावी सुधार नहीं हुए, तो आने वाले वर्षों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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