कोटा की 5 प्रसूताओं की मौत पर बड़ा झोल; मंत्री और कमिश्नर के दावे में आखिर कौन झूठा?

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कोटा की पांच प्रसूताओं की मौत पर सरकार के भीतर ही दो अलग-अलग दावे सामने आने से मामला और उलझ गया है। जब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह सवाल बना रहेगा कि इन पांच मौतों का असली कारण क्या था और इसके लिए जवाबदेह कौन है?

कोटा की 5 प्रसूताओं की मौत पर बड़ा झोल; मंत्री और कमिश्नर के दावे में आखिर कौन झूठा?

कोटा में पांच प्रसूताओं की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। हैरानी की बात यह है कि इस संवेदनशील मामले में सरकार के दो वरिष्ठ जिम्मेदार अधिकारियों के बयान एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खीमसर मौतों की वजह खराब इंजेक्शन और अत्यधिक रक्तस्राव को बता रहे हैं, जबकि ड्रग कंट्रोल कमिश्नर टी. सुमंगला का कहना है कि इन मौतों का कारण इंजेक्शन नहीं था।

स्वास्थ्य मंत्री का दावा: इंजेक्शन में दवा नहीं, सिर्फ पानी था

स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खीमसर ने कहा कि प्रसूताओं को डिलीवरी के बाद टोसिन इंजेक्शन लगाया गया था, जिसमें ऑक्सीटोसिन दवा होनी चाहिए थी। यह दवा प्रसव के बाद होने वाली ब्लीडिंग को रोकने के लिए दी जाती है। लेकिन जांच में सामने आया कि इंजेक्शन में दवा की जगह सिर्फ पानी था। नतीजा यह हुआ कि महिलाओं की ब्लीडिंग नहीं रुकी और उनकी मौत हो गई।

लोकल खरीद पर भी उठे सवाल

खीमसर ने बताया कि संबंधित इंजेक्शन अस्पताल द्वारा लोकल परचेज के जरिए खरीदे गए थे। अस्पतालों को सीमित प्रतिशत तक स्थानीय स्तर पर दवाएं खरीदने की अनुमति होती है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ऐसी दवाएं अस्पताल तक पहुंचीं कैसे और उनकी गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं हुई?

ड्रग कंट्रोल कमिश्नर ने मंत्री के दावे पर खड़े किए सवाल

मंत्री के बयान से पहले ड्रग कंट्रोल कमिश्नर टी. सुमंगला ने अलग ही तस्वीर पेश की थी। उन्होंने माना कि टोसिन इंजेक्शन में ऑक्सीटोसिन नहीं था, लेकिन उनका कहना था कि इन इंजेक्शनों की वजह से किसी महिला की मौत नहीं हुई। उन्होंने कहा कि दवाओं की जांच करवाई जा चुकी है और मौतों को सीधे तौर पर इंजेक्शन से जोड़ना सही नहीं होगा।

सिर्फ एक महिला को थी ज्यादा ब्लीडिंग

टी. सुमंगला के अनुसार पांच मृत महिलाओं में से केवल एक महिला को अत्यधिक रक्तस्राव की समस्या थी। बाकी महिलाओं में ऐसी स्थिति नहीं थी। उनका तर्क है कि यदि ब्लीडिंग मौत की वजह होती तो मरीजों को अन्य ब्लीडिंग कंट्रोल करने वाली दवाएं भी दी जातीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

मौत की वजह ब्लीडिंग या संक्रमण?

मामले में सबसे बड़ा विवाद यही है कि आखिर महिलाओं की मौत किस कारण हुई। स्वास्थ्य मंत्री ब्लीडिंग को जिम्मेदार बता रहे हैं, जबकि ड्रग कंट्रोल विभाग पहले संक्रमण और अन्य चिकित्सकीय कारणों की ओर इशारा कर चुका है। दोनों दावों के बीच सच्चाई अब भी धुंधली बनी हुई है।

जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर

स्वास्थ्य मंत्री का दावा है कि सभी जांच रिपोर्टें सरकार को मिल चुकी हैं और मौतों के कारण स्पष्ट हो चुके हैं। लेकिन अभी तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि सच्चाई सामने आ चुकी है तो उसे जनता के सामने क्यों नहीं रखा जा रहा?

बीकानेर का मामला सामने आने से बढ़ी चिंता

कोटा की घटना पर सवाल अभी थमे भी नहीं थे कि बीकानेर में छह प्रसूताओं की किडनी फेल होने का मामला सामने आ गया। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

सबसे बड़ा सवाल: आखिर जिम्मेदार कौन?

कोटा की पांच प्रसूताओं की मौत पर सरकार के भीतर ही दो अलग-अलग दावे सामने आने से मामला और उलझ गया है। जब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह सवाल बना रहेगा कि इन पांच मौतों का असली कारण क्या था और इसके लिए जवाबदेह कौन है?

Sachin Sharma

लेखक के बारे में

Sachin Sharma

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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